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छेज नृत्य परंपराओं को जोड़ने का प्रभावी माध्यम : पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले

BhaskarHindi.com | Last Modified - February 11th, 2019 17:45 IST

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छेज नृत्य परंपराओं को जोड़ने का प्रभावी माध्यम : पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले

डिजिटल डेस्क, नागपुर। सिंधी समाज की संस्कृति बेहद प्राचीन है। इस संस्कृति से जुड़ी परंपराओं को बचाने के लए आज की नई पीढ़ी को इसकी विरासत को बनाए रखने की आवश्यकता है। नई पीढ़ी का अपनी संस्कृति परिचय करवाने में अखिल भारतीय सिंधी छेज नृत्य प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है। यह विचार पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने रविवार 10 फरवरी को मनपा व भारती सिंधू सभा के तत्वावधान में मानकापुर स्थित क्रीड़ा संकुल में आयोजित भारतीय सिंधी छेज नृत्य प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में प्रकट किए।

मंच पर महापौर नंदा जिचकार, विधायक गिरीश व्यास, डॉ. मिलींद माने, स्थायी समिति सभापति व प्रतियोगिता के संयोजक वीरेंद्र कुकरेजा, नगरसेविका प्रमिला मथरानी, गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडवानी, राष्ट्रीय सिंधी भाषा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घनशाम कुकरेजा, भारतीय सिंधु सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लधाराम नागवानी, अजीत मन्याल, दिनेश टहिलानी, मुरलीधर माखीजा, डॉ. विंकी रुघवानी, विदर्भ सिंधी विकास परिषद के अध्यक्ष राकेश कृपलानी, डॉ. वंदना खुशलानी, प्रताप मोटवानी, विजय केवलरामानी, सतीश आनंदानी, किशोर लालवानी, अशोक केवलरामानी, किसन लालवानी, आशू तुलसानी, गोपाल खेमानी, प्रशांत सपाटे उपस्थित थे।

पालकमंत्री ने कहा कि संस्कृति का संवर्धन और उसका प्रचार व प्रसार के लिए मनपा की पहल सराहनीय है। सिंधी छेज नृत्य लुप्त होने की कगार पर है जो इस प्रतियोगिता के माध्यम से पुनर्जीवित हो रही है। देश ही नहीं दुनिया में इस तरह का पहला आयोजन किया गया है। सिंधी संस्कृति के संवर्धन के लिए सरकार हमेशा समाज के साथ है। इसी कड़ी में सिंधी आर्ट गैलरी बनाने का निर्णय महत्वपूर्ण निर्णय सरकार ने लिया है, जल्द ही उसका भूमिपूजन किया जाएगा। 

प्रतियोगता में पुरुष वर्ग में पहले स्थान पर अकोट संघ, दूसरे स्थान पर बड़ोदा स्टाइल, सिंधू शाक्य संघ उल्हास नगर, तीसरे स्थान पर चंदूराम सेवा मंडल संघ आया। वहीं महिला वर्ग में पहले स्थान पर जूली उल्हास नगर, दूसरे स्थान पर अहमदाबाद एमजी संघ, तीसरे स्थान पर सिंधू सहेली मंडल नागपुर आया। सभी विजेताओं को आकर्षक चषक व धनादेश दिया गया। प्रतियोगता में परीक्षक के रूप में अमरावती के नितीन आसुदानी, बड़ोदा की पूजा लालवानी, मुंबई के आशू आलीमचंदानी ने भूमिका निभाई। कार्यक्रम की प्रस्तावना घनशाम कुकरेजा, संचालन तुलसी सेठीया व आभार वीरेंद्र कुकरेजा ने व्यक्त किया। 
 

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