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सतना से रीवा के लिए रेफर बीमार बच्चे को  नर्सिंग होम के हवाले कर आई 108 एम्बुलेंस! 

सतना से रीवा के लिए रेफर बीमार बच्चे को  नर्सिंग होम के हवाले कर आई 108 एम्बुलेंस! 

डिजिटल डेस्क, सतना। ब्रेन फीवर से बेसुध ढाई साल के एक बच्चे शानू कुशवाहा को इलाज के लिए जिला अस्पताल से रीवा मेडिकल कॉलेज ले जाने के बजाय एम्बुलेंस-108 ने बीच रास्ते में एक प्रायवेट एम्बुलेंस के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं परिजनों का आरोप है कि प्रायवेट एम्बुलेंस के ड्राइवर ने बच्चे के परिजनों से 500 रुपए लिए और उसे यहीं के एक निजी नर्सिंग होम में ले गया। जब इलाज के सवाल पर  इस नर्सिंग होम ने भी हाथ उठा दिए तो परिजन बच्चे को इलाज के लिए रीवा मेडिकल कॉलेज ले गए। 

नाजुक थी हालत 

बताया गया है कि कोटर के वार्ड नंबर 3 निवासी रामप्रसाद कुशवाहा के ढाई वर्ष के बेटे शानू को गंभीर हालत में सोमवार की देर रात उसके चाचा रामाश्रय इलाज के लिए जिला अस्पताल लाए थे। शानू को बच्चा वार्ड में भर्ती करके इलाज शुरु किया गया। मंगलवार को सुबह 7 बजे तक तबियत नियंत्रित नहीं होने पर डा.विनोद दहायत ने शानू को रीवा मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। बच्चे को रीवा ले जाने के लिए डयूटी डॉक्टर ने ही एम्बुलेंस-108 कॉल की। जिला अस्पताल में एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में निकटतम कोटर से एम्बुलेंस बुलाई गई। आरोप है कि एम्बुलेंस-108 का ड्राइवर बीमार शानू को लेकर जिला अस्पताल से रीवा के लिए तो निकला लेकिन उसने बीच रास्ते में एक प्रायवेट एम्बुलेंस बुला ली। प्रायवेट एम्बुलेंस के ड्राइवर ने बच्चे के चाचा रामाश्रय से 500 रुपए लिए और उसे एक प्रायवेट शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखाने के बाद निजी नर्सिंग होम में ले गया। जब निजी नर्सिंग होम ने भी हाथ उठा दिए तो अंतत:शानू को परिजन एक अन्य प्रायवेट एम्बुलेंस से रीवा मेडिकल कालेज ले गए।  

क्यों आई ये नौबत 

उधर, इस मामले में चिकित्सा हेल्थ केयर के जिला समन्वयक आशुतोष  चतुर्वेदी ने परिजनों के आरोप को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि ये सही है कि  कॉल के वक्त जिला अस्पताल में एम्बुलेंस की उपलब्धता नहीं होनेे के कारण निकटतम कोटर से एम्बुलेंस बुला कर उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन रास्ते में बच्चे के चाचा रामाश्रय ने रीवा जाने से इंकार कर दिया। चाचा ने जब जिद की तो ड्राइवर ने उनसे इस संबंध में लिखित सहमति ले ली थी कि वो रीवा नहीं जाना चाहते। सतना के ही प्रायवेट अस्पताल में इलाज कराना चाहते हैं। उन्होंने ये भी लिखा कि पेसेंट की सारी जिम्मेदारी उनकी है।  श्री चतुर्वेदी के मुताबिक ऐसे में ये आरोप सही नहीं है कि 108 एम्बुलेंस के ड्राइवर ने पेसेंट और परिजनों को प्रायवेट एम्बुलेंस या फिर निजी नर्सिंग होम में जाने को बाध्य किया था। 

जिले में हैं 17 एम्बुलेंस 

उल्लेखनीय है, गंभीर रोगियों के परिवहन के लिए जिले में 17 एम्बुलेंस उपलब्ध हैं। इनमें से एक एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस (एएलएस) और 16  बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस (बीएलएस)हैं। इन एम्बुलेंस का संचालन डॉयल-108 के माध्यम से चिकित्सा हेल्थ केयर करती है। एएलएस को दिन में जिला अस्पताल में और रात में सिटी कोतवाली में रखा जाता है,जबकि अन्य 16 बीएलएस कस्बाई इलाकों में तैनात रहती हैं।

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