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चिल्ड्रंस डे स्पेशल : कैंगरू किडस स्कूल बना न्यूज रूम, बच्चों ने उठाए गंभीर मुद्दे

November 14th, 2017 13:37 IST
चिल्ड्रंस डे स्पेशल : कैंगरू किडस स्कूल बना न्यूज रूम, बच्चों ने उठाए गंभीर मुद्दे

डिजिटल डेस्क, नागपुर। जमाना बहुत तेजी से डिजिटल और वर्चुअल दौर में दौड़ रहा है। नए-नए गैजेट्स के बीच बचपन कैसे सयाना हो रहा है, हम खुद नहीं समझ पा रहे हैं। दादा-दादा की कहानियां और लोरियां मोबाइल की ऑडियो और वीडियो फाइल में सेव होकर रह गईं। खेल का मैदान, घर के किसी कोने में गेमिंग डिवाइस में सिमट कर रह गया है। ऐसा नहीं है कि सयाना होता बचपन खुद इससे नावाकिफ है। वे नए जमाने की दौड़ में परिवार की सीख के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।

बाल दिवस के मौके पर दैनिक भास्कर ने ऐसे ही चुनिंदा बच्चों को अतिथि संपादक बनाकर उनके अंदर छिपे पत्रकार को बाहर लाने का प्रयास किया। चूंकि बच्चों को ही स्टोरी आइडिया से लेकर खबराें का संपादन तक करना था, इसलिए हमारी संपादकीय टीम भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कैंगरू किड्स स्कूल में जुटी। संपादकीय टीम के साथ अतिथि संपादकों ने स्कूल के क्लास रूम को संपादकीय दफ्तर में बदल दिया। अतिथि बाल संपादकों ने पेज भी लगवाए। ये बाल संपादक पर्यावरण को लेकर जितने चिंतित नजर आए, उतनी ही पीड़ा उन्हें आत्महत्या को मजबूर किसानों की भी है। वे विकास की दौड़ में बाल मजदूरों की पीड़ा को भी महसूस कर रहे हैं। ऐसे ही कई गंभीर विषयों पर तैयार कराई गई खबरें आज आपके समक्ष प्रस्तुत हैं।  

जानिए अतिथि बाल संपादकों के कुछ अंश

वैकल्पिक रोजगार से ही रुक सकती है किसान आत्महत्या -ओम बदियाणी 

मानसून के इस बार रूठने से रबी फसल का संकट गहरा गया है। जिनके पास सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, वे अब पीछे हटते दिख रहे हैं। इसका असर फसल उत्पादन पर हो सकता है। दूसरी ओर ऐसे किसानों के लिए वैकल्पिक रोजगार का भी संकट बढ़ गया है। दूध उत्पादन का धंधा भी महंगा साबित हो रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा मुद्रा योजना लाई गई, लेकिन किसान को इससे भी दूर रखा गया है। इस संबंध में सरकार के ही वसंतराव नाईक शेतकरी स्वावलंबन मिशन द्वारा सरकार को अनेक सिफारिशें की गईं, लेकिन यह सिफारिशें सिर्फ कागजों पर दबकर रह गई है। 

जलाशयों में सूखे जैसी स्थिति
अपर्याप्त बारिश के कारण इस बार जलाशयों में सूखे जैसी स्थिति है। जलापूर्ति आरक्षण में पहले ही कटौती कर दी गई है। रबी फसल को भी पानी देने से इनकार कर दिया गया है। हजारों किसान कर्जमाफी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में उनके सात-बारा भी कोरे नहीं हो रहे हैं। सात-बारा कोरा नहीं होने से उन्हें नया कर्ज नहीं मिल रहा है।

पशु क्रूरता, जीवों के अधिकारों का हनन- नामया चंदेल

पशु को संरक्षण का अधिकार संविधान से प्राप्त है। पशु क्रूरता उनके अधिकारों का हनन है। संविधान के अनुच्छेद 51 एजी में पशु को मारना, भूखा रखना, क्षमता से भारी या समय से अधिक काम करवाने वाले पशु पालकों से जुर्माना वसूल करना और सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद पशु क्रूरता रूकने का नाम नहीं ले रही है। 

3 साल जेल और जुर्माने का प्रावधान
जहां तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो, वहां दोपहर 12 से 3 बजे के दौरान पशुओं से काम नहीं करवाया जा सकता। यदि कोई पशु पालक पशु क्रूरता कानून का उल्लंघन करता है, तो उसे 3 साल जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

कानून में विसंगतियां 
पशुओं को प्रताड़ित करना या कष्ट पहुंचाना कानूनी अपराध है। आश्चर्य तो इस बात का है कि जान से मार देने पर नाममात्र दंड का प्रावधान है। पशु वध करने के लिए बूचड़खानों को अनुमति प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। पशु कल्याण विभाग को मांस निर्यात का दायित्व दिया गया है। इन विसंगतियों को दूर करने के लिए पशु हत्या, क्रूरता, बर्बरता, निर्दयता, अत्याचार जैसे शब्दों की सरकार को परिभाषा स्पष्ट करनी चाहिए।

पशु क्रूरता दंडनीय अपराध

पशु प्रेमी करिश्मा गलानी का कहना है कि पशु को पत्थर माना, हथियार या लाठी से वार करना, पालतु पशु को भूखा रखना, कड़ी धूप में काम करवाना, क्षमता से अधिक वजह की ढुलाई करवाना पशु क्रूरता है। पशुओं के साथ क्रूरता से पेश आना दंडनीय अपराध है।



ये भी बने बाल संपादक, जिनकी सलाह है अनमोल 

  • मानसी अग्रवाल - सेंट्रल इंडिया पब्लिक स्कूल, कापसी
  • वेदिका दिसावाल- सेंटर प्वाइंट स्कूल, वर्धमान नगर
  • यशिता वेंसियानी- बुटी पब्लिक स्कूल, कलमना 
  • ईशानी राठी- मार्डन स्कूल, कोराडी
  • सानिया मरिया साबू- दिल्ली पब्लिक स्कूल, कामठी रोड 
  • आस्था प्रवीण गाढवे- हिलफोर्ट पब्लिक स्कूल, रामनगर
  • साक्षी श्रीवास- सेंट्रल इंडिया पब्लिक स्कूल, कामठी
  • नाम्या ए. सिंह चंदेल- नारायणा विद्यालयम स्कूल, चिंचभवन 
  • प्रथम बहिलानी- मॉडर्न स्कूल 
  • रोशन सरकार- दिल्ली पब्लिक स्कूल, कामठी रोड 
  • अमन शेख- सेंटर प्वाइंट स्कूल, वर्धमान नगर
  • हैनीष आचार्य- सेंट्रल इंडिया पब्लिक स्कूल, कापसी 
  • फैज मोहम्मद शेख- बुटी पब्लिक स्कूल, कलमना 
  • संकेत पारिख- सांदीपनि स्कूल, हजारी पहाड़ 
  • ओम बदियाणि- सांदीपनि स्कूल, हजारी पहाड़
  • भुवेश जायसवाल- सेंट्रल इंडिया पब्लिक स्कूल
  • अमोघ गाडे- हिलफोर्ट पब्लिक स्कूल


 

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