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सुरंग बनाकर ब्रह्मपुत्र नदी का बहाव मोड़ने की खबर गलत : चीन

November 01st, 2017 09:44 IST
सुरंग बनाकर ब्रह्मपुत्र नदी का बहाव मोड़ने की खबर गलत : चीन

डिजिटल डेस्क, बीजिंग। चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी का रुख मोड़ने और 1000 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की खबर को पूरी तरह निराधार' बताया है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा है कि साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की यह रिपोर्ट सच नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन सीमा पार नदी के जल के साझा उपयोग की बात पर कायम है। उल्लेखनीय है कि हांगकांग से प्रकाशित होने वाले साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट में छपी रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन ने शिनजियांग प्रांत के बंजर इलाके में पानी पहुंचाने के लिए 1000 किमी लंबी सुरंग बनाकर ब्रह्मपुत्र नदी के पानी की धारा को मोड़ने का प्रोजेक्ट बनाया है।   


क्यों दिया स्पष्टीकरण
सोमवार को साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में बताया था, चीन उत्तर-पूर्व चीन में ब्रह्मपुत्र नदी के पानी को शिनजियांग प्रांत के बंजर इलाके में ले जाने के लिए 1,000 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की योजना पर गुपचुप काम कर रहा है। यह अपनी तरह की दुनिया की सबसे लंबी सुरंग है। इस प्रॉजेक्ट पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। इससे पहले चीन ने छोटी सुरंग वाले युन्नान प्रोजेक्ट पर अगस्त में काम शुरू किया है। यह सुरंग 600 किलोमीटर लंबी होगी। मार्निंग पोस्ट ने इस परियोजना को लंबी सुरंग पर काम करने के पहले की तैयारी बताया था। 


विश्वसनीय नहीं है चीन
गौरतलब है कि तिब्बत के पठार में चीन के प्रॉजेक्ट्स की वजह से नदी का प्रवाह प्रभावित होने को लेकर भारत काफी पहले से चिंतित है। ब्रह्मपुत्र की धारा मोड़ने से चीन ने सार्वजनिक रूप से  भले ही इनकार किया हो, लेकिन वह पहले भी ऐसे प्रयास करता रहा है। बता दें कि 2013 में चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर हाइड्रो प्रोजेक्ट स्थापित किया था, तब भी भारत ने बहुत विरोध किया था।


यह हैं भारत की चिंताएं
भारत के साथ मुश्किल यह है कि यदि चीन ने अपने ऊंचाई वाले इलाके में इस तरह की परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ाया, तो यह भारत के लिए बड़ा संकट साबित होगा। हाल ही में चीन ने ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी पर बांध बनाने की घोषणा की थी। गौरतलब है कि 2001 में तिब्बत में बना एक कृत्रिम बांध टूट गया था जिसके चलते 26 लोगों की मौत हो गई थी। साथ ही अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी के पास 140 करोड़ से अधिक की संपत्ति को नुकसान हुआ था। इस तरह की जल परियोजनाओं से चीन भारत में जब चाहे महाविनाश मचा सकता है। बांध, नहर और सिंचाई के अन्य साधन युद्ध के समय भी हथियार के तौर पर काम आ सकते हैं।


 

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