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बोफोर्स घोटाले में 13 साल बाद नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBI

February 03rd, 2018 08:28 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बोफोर्स मामले में दलाली के आरोपों की जांच को लेकर 13 साल बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने याचिका दायर कर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। साल 2005 में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस घोटाले में हिंदुजा भाईयों समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। बता दें कि साल 1987 में सामने आए इस मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर भी आरोप लगे थे।

हाईकोर्ट ने क्या दिया था फैसला? 

दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 मई 2005 को बोफोर्स मामले पर फैसला सुनाते हुए इससे जुड़े सभी लोगों को बरी कर दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट में उस समय के जस्टिस आरएस सोढ़ी ने फैसला सुनाते हुए यूरोप के हिंदुजा ब्रदर्स (श्रीचंद, गोपीचंद और प्रकाशचंद) के साथ-साथ बोफोर्स कंपनी पर लगे सभी आरोपों को निरस्त कर दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने CBI को फटकार लगाते हुए कहा था कि, इस मामले में उसकी जांच करने के तरीके से सरकारी खजाने पर 250 करोड़ का बोझ पड़ा है। वहीं इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट के एक और जज जेडी कपूर ने 4 फरवरी 2004 को दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर लगे बोफोर्स घोटाले के आरोपों को हटा दिया था और बोफोर्स कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप तय करने के निर्देश दिए थे।

माइकल हर्शमैन के आरोप 

अमेरिका की एक प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी 'फेयरफैक्स' के चेयरमैन माइकल हर्शमैन ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में बोफोर्स घोटाले से जुड़े कई दावे किए हैं। हर्शमैन ने दावा किया था कि बोफोर्स घोटाले का पैसा स्विस बैंक में रखा गया है। इसके साथ हर्शमैन ने ये भी आरोप लगाया है कि उस समय की राजीव गांधी सरकार ने इस मामले की जांच में रोड़े लगाए थे और उन्हें रिश्वत देने की कोशिश की थी। इतना ही नहीं उन्हें कई बार जान से मारने की भी धमकी दी गई।

क्या है बोफोर्स घोटाला? 

बोफोर्स तोप घोटाला या बोफोर्स कांड 1987 में सामने आया था और ये मामला 64 करोड़ रुपए की दलाली से जुड़ा हुआ है। 1986 में वेपेन्स बनाने वाली स्वीडिश कंपनी बोफोर्स ने इंडियन आर्मी को 400 तोपें सप्लाई करने की डील की थी। ये डील 1.3 अरब डॉलर (करीब 8,380 करोड़ रुपए) की थी। 1987 में ये बात सामने आई कि इस डील को हासिल करने के लिए भारत में 64 करोड़ रुपए की दलाली की गई। उस समय कांग्रेस की सरकार थी और राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। लिहाजा कांग्रेस और राजीव गांधी पर बोफोर्स घोटाले के आरोप लगे। इस घोटाले के बाद 1989 में राजीव गांधी की सरकार भी गिर गई। इस घोटाले में इटैलियन बिजनेसमैन और राजीव गांधी के करीबी ओताविया क्वात्रोची ने दलाल का रोल किया। बताया जाता है कि इसके बदल में क्वात्रोची को दलाली की बड़ी रकम दी गई। 1997 में इस मामले की जांच CBI को सौंपी गई। इसके बाद 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट ने राजीव गांधी को इस मामले में क्लीन चिट दे दी। बता दें कि क्वात्रोची की 2013 में मौत हो गई थी।  

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