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दार्जिलिंगः हिंसा में 4 मरे, 36 घायल

BhaskarHindi.com | Last Modified - July 27th, 2017 16:22 IST

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दार्जिलिंगः हिंसा में 4 मरे, 36 घायल

टीम डिजिटल, दार्जिलिंग. दार्जिलिंग में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के अनिश्चितकालीन बंद से हालात और भी बेकाबू हो गए हैं. सुरक्षा बलों और आंदोलनकारियों के बीच झड़प में यहां 36 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं. इनमें इंडियन रिजर्व बटालियन (आइआरबी) की सह कमांडेट किरण तमांग की हालत गंभीर बनी हुई है.

गोरखालैंड की मांग कर रहे GJM ने दावा किया है कि पुलिस फायरिंग में उनके चार समर्थकों की मौत हुई है. हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एडीजी (कानून व्यवस्था) अनुज शर्मा ने इससे इनकार करते हुए कहा कि पुलिस ने फायरिंग नहीं की है. मोर्चा समर्थकों ने ही गोली चलाई है, जिसमें एक की मौत हुई है. राज्य के उत्तरी पहाड़ी इलाके में हो रही हिंसा को गहरी साजिश करार दिया. इस पहाड़ी इलाके में जीजेएम ने अनिश्चितकालीन बंद का आह्वान किया है. हिंसा को देखते हए स्कूल, कॉलेज और बोर्डिंग स्कूल बंद कर दिए गए हैं.

इससे पहले, शनिवार को जीजेएम की महिला मोर्चा ने बड़ी रैली निकाली. ममता बनर्जी ने कहा कि कोर्ट ने जीजेएम के प्रोटेस्ट को अवैध करार दिया वे कोर्ट की बात भी नहीं मान रहे. दार्जिलिंग में जो कुछ हो रहा है वह गुंडागर्दी है. 

दार्जिलिंग में कई जगह पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच झड़पें हुई. पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए हवाई फायरिंग भी की. झड़पों में 36 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं जिनमें 5 को गोलियां लगी हैं. हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने इलाके में सेना तैनात कर दी है.

ममता की बयानबाजी

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग बंद के पीछे जीजेएम पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया है. इसके साथ ही बंगाल सीएम ने कहा कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के संबंध पूर्वोत्तर के उग्रवादी समूहों से हैं. सीएम ने बताया कि इलाके में शांति स्थापित करने के लिए पैनल का गठन किया गया है.

पर्यटकों की आफत

जीजेएम के अनिश्चितकालीन बंद की सबसे बड़ी मार पर्यटकों पर पड़ी है. शहर के होटलों में रुके पर्यटकों से मालिकों ने होटल खाली करने के लिए कह दिया है. बता दें कि जीजेएम कार्यकर्ताओं ने भी पर्यटकों को कुछ दिन दार्जिलिंग ना आने की हिदायत दी थी. आंदोलनकारियों ने दार्जिलिंग घूमने आए पर्यटकों से भी जल्द से जल्द शहर छोड़ने का कहा था.

केन्द्र से हस्तक्षेप की मांग

दार्जिलिंग में दोबारा भड़की हिंसा के बाद जीजेएम नेताओं ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की है. उन्होंने गोरखालैंड आंदोलन के बारे में गृहमंत्री को बताया और इस मामले में केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की. गुरुवार की देर शाम नई दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद जीजेएम नेताओं ने बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई अनिवार्य कर हमें विरोध करने पर मजबूर किया है.

जीजेएम चीफ के दफ्तर पर छापा

जीजेएम चीफ बिमल गुरुंग के दफ्तर पर शुक्रवार को रेड डाली गई थी. इस रेड में हथियार, तीर और कैश बरामद किए गए थे. इसमें नाइट विजन दूरबीन और एक रेडियो सेट भी पाए गए थे. जीजेएम नेता बिनय तमांग ने इस छापे का विरोध करते हुए कहा कि हम आदिवासी हैं और अपनी परंपरागत तीरंदाजी प्रतियोगिता को आयोजित करते हैं. वह हमारे परंपरागत सामानों को हथियारों के रूप में दिखा रहे हैं. इस रेड के बाद आंदोलन और हिंसक हो गया.

क्यों भड़का गोरखालैंड आंदोलन

पश्चिम बंगाल के सभी स्कूलों में 11वीं तक बंगाली पढ़ाए जाने को अनिवार्य किए जाने और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दार्जिलिंग दौरे के खिलाफ जेएमएम पूरे पहाड़ी इलाके में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रही है. जेएमएम की मांग है कि दार्जिलिंग में पढ़ाई नेपाली भाषा में ही हो या जरूरत हो तो हिंदी पढ़ाया जाए. साथ ही आंदोलनकारी अलग गोरखालैंड राज्य की भी मांग कर रहे हैं

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