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गोरखालैंड की मांग को लेकर प्रदर्शन उग्र, धारा 144 लागू

BhaskarHindi.com | Last Modified - July 27th, 2017 19:55 IST

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गोरखालैंड की मांग को लेकर प्रदर्शन उग्र, धारा 144 लागू

टीम डिजिटल,कोलकाता. पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग में गोरखालैंड की मांग को लेकर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) द्वारा सोमवार को बुलाया गया अनिश्चितकालीन बंद पहले दिन ही उग्र और हिंसक होता दिखा है. यहां GJM के कार्यकर्ताओं ने सरकारी कार्यालयों को बंद कराने का भी प्रयास किया. प्रदर्शन कारियों पर ममता सरकार की सख्ती और चाक-चौबंद पुलिसिया इंतजाम का भी असर कम दिखा. उन्होंने कई दफ्तरों में आग लगाने की हरकतें भी कीं, जिसको देखते हए जिला कलेक्टर कार्यालय, राजस्व इमारत, अदालत और सभी महत्वपूर्ण इलाकों में धारा 144 लागू की गई. 

विमल गुरुंग की अगुवाई वाले GJM ने कहा कि राज्य सरकार की कथित दमनकारी कार्यप्रणाली से गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) का क्रियान्वयन विफल रहा है. गुरंग ने स्पष्ट किया कि पृथक गोरखालैंड आंदोलन की अगुवाई के लिए उनके पास आन्दोलन के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. जीजेएम ने दार्जीलिंग आए पर्यटकों से भी जाने की बात कहते हुए स्पष्ट किया कि किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के मामले में उनकी पार्टी की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी. 

हालांकि जिला कलेक्टर जॉयसी दासगुप्ता ने बताया कि फूलबाजार में अनुमंडलीय अधिकारी कार्यालय को जलाने का प्रयास किया गया. इसके अलावा क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण है. सभी कार्यालयों में उपस्थिति भी अच्छी रही है. बंद को देखते हुए आन्दोलन कारियों की खिलाफत में खड़ी ममता सरकार की सख्ती के बावजूद ट्राई ट्रेन की सेवा देने वाली दार्जीलिंग हिमालयीन रेलवे ने अपनी सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी हैं.

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (दीदी) ने इस बंद के खिलाफ सख्ती दिखाते हुए कहा था कि सभी सरकारी दफ्तर खुले रहेंगे और दफ्तर न आने वालों का एक दिन का वेतन कटेगा. साथ ही सोमवार की छुट्टी को ब्रेक इन सर्विस माना जाएगा. बावजूद इसके विरोध प्रदर्शन का माहौल और अनिश्चितकालीन बंद जारी है. हालांकि इस बार का बंद कुछ अलग तरह का है. इसलिए होटलों और परिवहन को इसमें छूट है. स्कूलों एवं कॉलेजों को भी इस बंद में शामिल नहीं किया गया है.

इसलिए है विरोध : सरकार ने साफ किया है कि गोरखा मुक्ति मोर्चा का विरोध ममता बनर्जी के उस एलान की वजह से है, जिसमें उन्होंने 10वीं तक सरकारी स्कूलों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई अनिवार्य कर दी है. गौरतलब है कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा सभी साइनबोर्ड के नेपाली और अंग्रेज़ी में करने की मांग कर रहा है. साथ ही गोरखालैंड की मांग को लेकर टॉर्च रैली और सिग्नेचर कैंपेन की तैयारी भी हो रही है.

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