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इंफोसिस की नौकरी छोड़ चुनाव मैदान में कूदा मूक-बधिर इंजीनियर, सतना से आजमाएंगे किस्मत

October 22nd, 2018 17:10 IST
इंफोसिस की नौकरी छोड़ चुनाव मैदान में कूदा मूक-बधिर इंजीनियर, सतना से आजमाएंगे किस्मत

डिजिटल डेस्क, सतना। नेताओं के क्रियाकलापों से आहत एक इंजीनियर मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाएगा। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें खास क्या है, देश में कई इंजीनियर चुनाव लड़े और विधायक, मंत्री भी बने...मगर ठहरिए, ये इंजीनियर साधारण इंजीनियर नहीं हैं बल्कि जन्म से ही गूंगे-बहरे हैं। जिले का एक मूक-बधिर युवा इंफोसिस की अच्छी खासी नौकरी छोडकऱ विधानसभा चुनाव मैदान में कूद गया। उसने यह कदम सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के मकसद से उठाया है। महज 36 साल के सुदीप शुक्ला जन्म से ही गूंगे बहरे हैं। बैंगलोर में 1 लाख रुपए प्रतिमाह की नौकरी करने वाले सुदीप को भरोसा है कि लोग उनकी भावनाओं की कद्र करेंगे। इसमें उनको जिले के करीब 50 हजार मूक-बधिरों का साथ मिला है। सुदीप की बहन श्रद्धा उनकी इंटरप्रेटर हैं। यह भारत का संभवत: पहला मामला है जब कोई मूक-बधिर युवा प्रत्याशी चुनाव मैदान में होगा।

क्यों छोड़ा 1 लाख महीने का जॉब
सतना जिले के एक छोटे से गांव गौरइया में पले-बढ़े सुदीप शुक्ला जन्म से ही गूंगे बहरे हैं। भोपाल में स्कूलिंग करने के बाद हैदराबाद से एमएससी आईटी की और बैंगलोर में इंफोसिस कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी कर ली। सुदीप की पत्नी दीपमाला शुक्ला भी हैदराबाद में फाइनेंस में नौकरी करती हैं। मगर जनता की परेशानियां उनसे देखी नहीं गईं और 1 लाख रुपए महीने के अच्छी खासी नौकरी को अलविदा कह दिया और सतना विधानसभा से चुनाव लड़ने का मन बनाया है।

एक जैसे सभी पॉलिटीशियन
इंटरप्रेटर श्रद्धा के माध्यम से सुदीप ने बताया कि जितने भी पॉलीटिशियन होते हैं वह कुछ भी नहीं करते हैं। दिल्ली हो या चेन्नई अलग-अलग जगहों में इतनी लड़कियों के साथ गलत काम होता है, बलात्कार होता है, लेकिन कहीं भी कोई सुनवाई नहीं होती। जब चुनाव होगा तब सब नेता हाथ जोड़कर पैर पकड़ के वोट मांगेंगे, लेकिन उसके बाद वो कुछ भी नहीं करते। यही कारण है कि न्याय की लड़ाई के लिए नौकरी छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पॉलिटिशियन मजबूर और जरूरतमंद लोगों की कभी भी मदद नहीं करते हैं। लोग सफर कर रहे हैं फिर भी उनका कोई सपोर्ट नहीं करते।

यमुना प्रसाद शास्त्री से प्रेरित
सुदीप विन्ध्य क्षेत्र के समाजवादी नेता यमुना प्रसाद शास्त्री को अपना आदर्श मानते हैं। इंटरप्रेटर के जरिए उन्होंने बताया कि श्री शास्त्रीजी ने दृष्टिबाधित रहते हुए भी सफल राजनीति की। उन्होंने रीवा के महाराजा को शिकस्त दी थी। मुझे भी एक मौका चाहिए। मेरे जैसे बहुत सारे लोग डरते हैं, लेकिन मैं डरूंगा नहीं मुझे खुद पर भरोसा है। उन्होंने बताया कि किसी दल में जाने का उनका कोई प्लान नहीं है। वो सबका समर्थन चाहते हैं। जैसे खाना वेस्ट चला जाता है वैसे वो वोट को वेस्ट नहीं होने देना चाहते।

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