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अमरावती के जलाशयों का घटने लगा जलस्तर  

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 03rd, 2018 16:21 IST

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अमरावती के जलाशयों का घटने लगा जलस्तर  

डिजिटल डेस्क, अमरावती। जिले में सूखे के आसार अभी से नजर आने लगे हैं। क्षेत्र के बड़े जलाशयों का जलस्तर घट रहा है, जबकि मध्यम प्रकल्पों की स्थिति सामान्य है। जिले के ऊध्र्व वर्धा बांध में मात्र 36.23 फीसदी जलसंग्रह शेष है, मध्यम प्रकल्पों में जलसंचय की स्थिति सामान्य है।जलाशयों की स्थिति को देखते हुए अगले एक साल तक पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होगा, लेकिन इसके बाद जलसंकट निर्माण होने की संभावना है, यह अनुमान ऊर्ध्व  वर्धा प्रकल्प विभाग ने लगाया है। सिंचाई के पानी की किल्लत तो पहले से थी, अब पीने का पानी का भी संकट गहराते जा रहा है।  जलाशयों में उपलब्ध जलसंग्रह की आंकड़ेवारी पर नजर डालें तो भविष्य में भीषण जलसंकट निर्माण होने के आसार दिखाई दे रहे है। जलाशयों का पानी एमआईडीसी के प्रकल्पों को दिए जाने से सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा। इससे किसानों के समक्ष संकट निर्माण हो गया है।

ठप पड़े हैं सिंचाई प्रकल्पों के कार्य
अनेक गांवों में सिंचाई प्रकल्पों का कार्य ठप पड़ा हुआ है। यदि प्रकल्प का काम पूरा होता है तो इसके अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण इलाकों को सिंचाई की सुविधा का लाभ मिलेगा,  लेकिन प्रकल्प अधूरा होने से ग्रामीण किसानों को सिंचाई के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिले के मोर्शी तहसील के सावरखेड़, शिरखेड़ तथा अन्य गांवों में शीतकाल में ही जलसंकट की स्थिति निर्माण हुई है। यहां के नागरिकों को टैंकर से जलापूर्ति करना संभव नहीं होने से 70 गांव जलापूर्ति योजना शुरू करने  के लिए जनप्रतिनिधियों के प्रयास शुरू हैं। विधायक एड.यशोमति ठाकुर, विधायक जगताप ने यह मुद्दा विधानभवन में रखा। प्राप्त आंकड़ेवारी के मुताबिक 29 नवंबर तक ऊर्ध्व वर्धा में जलसंग्रह क्षमता 336.48 है। जलसंग्रह 204.37  दलघमी है। मात्र 36.23  फीसदी जलसंग्रह ऊर्ध्व वर्धा में शेष है।

गहरा सकता है भीषण जलसंकट
अमरावती जिले में मध्यम प्रकल्प शहानुर, चंद्रभागा व पूर्णा की स्थिति सामान्य है। वहीं सपन में 29  नवंबर तक 93.03 फीसदी जल संग्रह दर्ज किया गया है। अमरावती शहर को ऊर्ध्व वर्धा प्रकल्प से ही जलापूर्ति की जाती है। जलाशयों की स्थिति को देखते हुए आनेवाले समय में भीषण संकट का भी सामना करना पड़ सकता है। सपन प्रकल्प का जलसंग्रह  38.90 दलघमी, दर्ज किया गया है। मध्यम प्रकल्प शहानुर का जलसंग्रह  31.11 दलघमी है। चंद्रभागा का जलसंगह 31.16 दलघमी दर्ज किया गया। पूर्णा प्रकल्प में 16.74  दलघमी जलसंग्रह शेेष है। इस बार बारिश की बेरूखी से जलाशयों में उम्मीद के मुताबिक जलसंग्रह नहीं हुआ है। दर्ज किए गए जिले के बड़े एवं मध्यम जलाशयों के जलसंग्रह के आंकड़ेवारी के मुताबिक  इस वर्ष मानसून के दौरान जलाशयों को भरने में बारिश का कुछ खास योगदान नहीं रहा।

एक साल तक स्थिति रहेगी सामान्य 
ऊध्र्व वर्धा बांध से रबी फसल के लिए पानी देना शुरू है। यहां से एमआईडीसी, अमरावती कार्पोरेशन, वरूड, मोर्शी, आष्टी सहित ग्रामीण क्षेत्र में पानी छोडा जाता है। किसानों को चना फसल लेने के लिए कहा गया। दिवाली से पूर्व खरीफ फसल तुअर, पर्हाटी फसल के पानी उपलब्ध कराया गया। दिवाली के बाद रबी फसल के लिए पानी देना शुरू है। उपलब्ध जलसंग्रह को देखते हुए एक साल तक स्थिति सामान्य रहेगी।कृषि विभाग के सहयोग से किसानों का मार्गदर्शन किया जा रहा है। ( पी. पी. पोटफोडे, कार्यकारी अभियंता, ऊर्ध्व वर्धा प्रकल्प )

जिले के बड़े, मध्यम व छोटे सिंचाई प्रकल्पों में जलसंचय की स्थिति
जिले में बडे, मध्यम व छोटे प्रकल्प 85 है। इन प्रकल्पों में 29 नवंबर  2018  तक  42.57  फीसदी जलसंग्रह शेष है। प्राप्त आंकडेवारी के मुताबिक जिले के 1 बड़े प्रकल्प में  204.37  दलघमी यानी  36.23 फीसदी, 4 मध्यम प्रकल्प में 71.26  फीसदी तथा 80 छोटे प्रकल्प में  74.81 दलघमी जलसंग्रह शेष है। 

रोजाना कम हो रहा जलसंग्रह
इस वर्ष मानसून के दौरान उम्मीद के मुताबिक बारिश कम होने का असर फसलों के साथ ही जिले के जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। यहां बता दें कि, मानसून का प्रारंभ होते ही जलाशयों में जलसंग्रह की वृद्धि अत्यंत धीमी गति से दर्ज की गई। वर्तमान स्थिति में नवंबर माह में भी जलस्तर घटने की प्रक्रिया अब भी धीमी गति से जारी है। संभाग में कुछ जलाशयों की स्थिति भले ही बेहतर है। वहीं बड़े व मध्यम सहित लघु जलाशयों में कुछ जलाशय की स्थिति अत्यंत दयनीय दिखाई दे रही है। जिसमें केवल रिजर्व कोटे का पानी शेष बचा हुआ है। इस रिजर्व कोटे से पीने का पानी, रबी फसल को पानी तथा एमआईडीसी को पानी दिया जा रहा है। आज भी जिले के अनेक गांव जलसंकट की समस्या से जूझ रहे हैं। इससे आनेवाले समय में जलसंकट की स्थिति निर्माण हो सकती है। भविष्य में निर्माण होनेवाले जलसंकट को देखते हुए अभी से पानी का उचित नियोजन करने की बेहद जरूरत है। जिले के सभी प्रकल्प का जलस्तर धीरे-धीरे रोजाना कम हो रहा है। 
 

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