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किडनी की बीमारी के साथ अरुण जेटली को सॉफ्ट टिशू कैंसर, हो गए हैं बेहद कमजोर


हाईलाइट

  • किडनी की बीमारी से भी पीड़ित हैं जेटली
  • जनवरी में इलाज के लिए गए थे अमेरिका
  • मीडिया में जेटली को लेकर कई तरह की खबरें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की तबीयत इन दिनों खराब चल रही है। मीडिया में जेटली को लेकर कई  तरह की खबरें चल रही हैं, जिसे केंद्र सरकार के प्रवक्ता और पीआईबी के प्रधान महानिदेशक ने आधारहीन और गलत बताया था। सूत्रों के मुताबिक जेटली काफी कमजोर हो गए हैं। उन्हें पिछले सप्ताह एम्स में भी भर्ती कराया गया था। जेटली का पिछले साल मई में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था।

जेटली किडनी की बीमारी के अलावा सॉफ्ट टिशू कैंसर से भी पीड़ित हैं, जिसका ऑपरेशन करवाने वो पिछले साल जनवरी में अमेरिका गए थे। जेटली फिलहाल कीमो से बाहर आने का प्रयास कर रहे हैं। आइए आपको बताते हैं कि आखिर सॉफ्ट टिशू कैंसर क्या होता है।

हमारे शरीर में कई तरह के सॉफ्ट टिशू ट्यूमर होते हैं, सभी कैंसर नहीं होते। सॉफ्ट टिशू में कई ट्यूमर होते हैं, लेकिन उसमें कैंसर नहीं होता। वो शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल भी नहीं सकते, लेकिन जब ये ट्यूमर में विकसित हो जाता है तो इसमें सार्कोमा शब्द भी जुड़ जाता है। सर्कोमा हड्डियों और मांसपेशियों के टिशू से शुरू होता है। 

सॉफ्ट टिशू कैंसर का सार्कोमा नर्व्स, मसल्स, फैट, टिशू सर्कोमा, फाइबर टिश्यू  में विकसित होता है। ये शरीर के किसी भी हिस्से में पाए जा सकते हैं। माना जाता है कि सॉफ्ट टिशू कैंसर की शुरुआत पैर या हाथ से होती है, लेकिन ये शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। इसके लक्षण में शरीर के किसी हिस्से में गांठ दिखना, पेट में दर्द धीरे-धीरे बढ़ना, उल्टी आने पर खून आना शामिल हैं।
 

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