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दशहरा: RSS के पथ संचलन मार्च में भागवत ने की मोदी सरकार की जमकर तारीफ


हाईलाइट

  • विजयादशमी के मौके पर RSS के पथ संचलन मार्च का आयोजन
  • मुख्य अतिथि के तौर पर HCL के संस्थापक शिव नादर उपस्थित
  • महाराष्ट्र CM फडणवीस के साथ रिटायर्ड जनरल वीके सिंह और नितिन गडकरी भी मौजूद

डिजिटल डेस्क नागपुर। देश भर में आज (मंगलवार) 'असत्य पर सत्य की जीत' का दशहरा पर्व मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा भी पथ संचलन मार्च का आयोजन किया गया। RSS प्रमुख मोहन भागवत के नेतृत्व में आयोजित हो रहे इस पथ संचलन मार्ग कार्यक्रम में पद्म भूषण से सम्मानित और HCL के संस्थापक शिव नादर (Shiv Nadar) मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। वहीं महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, रिटायर्ड जनरल वीके सिंह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि 'मोदी सरकार ने कई साहसिक फैसले लिये है। जिस कारण जनता ने सरकार पर भरोसा जताया है।' उन्होंने कहा कि 'देश में कई सराहनीय परिवर्तन भी हुए हैं लेकिन कुछ लोंगो को यह बदलाव पसंद नहीं आ रहा है।' उन्होंने सरकार के जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले की प्रशंसा करते हुए बताया कि 'सेना का मनोबल बढ़ा है और देश अब पहले से भी ज्यादा सुरक्षित है।'

भागवत ने मॉब लिंचिंग पर चर्चा करते हुए कहा कि 'ऐसी घटनाओं को रोकना हर किसी की जिम्मेदारी है। लिंचिंग की आड़ में देश और हिन्दू समाज का नाम बदनाम करने के साथ कुछ समुदायों के बीच भय पैदा किया जा रहा है।' उन्होंने कहा कि 'देश की पहचान उदारता है, लिंचिंग नहीं।' अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 'लिंचिंग जैसी घटनाओं से संघ का कुछ भी लेना-देना नहीं है लेकिन इस सबको तरह-तरह से पेश करके उसे झगड़ा बनाने का काम चल रहा है। एक षडयंत्र चल रहा है, यह सभी को समझना चाहिए।' साथ ही भागवत ने अपने संबोधन में बताया कि चंद्रयान-2 ने विश्वभर में भारत का मान बढ़ाया है।

डॉ. हेडगेवार ने रखी थी RSS की नींव

50 हजार से भी ज्यादा शाखाओं वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा 27 सितंबर 1925 को की गई थी। उन्होंने मुंबई में मोहिते के बाड़े नाम की एक जगह में RSS की नींव रखी थी। उस समय इस संघ में महज 5 ही स्वयंसेवक थे। बता दें कि जिस दिन (27 सितंबर 1925) RSS की स्थापना की गई थी, उस दिन दशहरा था। यही कारण है कि स्वयंसेवकों द्वारा इसी दिन RSS का स्थापना दिवस मनाया जाता है।

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