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ICICI लोन मामला: चंदा कोचर और वेणुगोपाल के घर- ऑफिसों में ED ने की छापेमारी

BhaskarHindi.com | Last Modified - March 01st, 2019 19:43 IST

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News Highlights

  • पांच कार्यालय और आवासीय परिसर में की गई छापेमारी
  • मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज है
  • वीडियोकॉन ग्रुप और उससे संबंद्धित कंपनियों को दी थी लोन की मंजूरी


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वीडियोकॉन लोन मामले में ICICI बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर और वीडियोकॉन के मैनेजिंग डायरेक्टर वेणुगोपाल धूत के घरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार यह छापेमारी मुंबई एवं अन्य जगहों पर कम से कम पांच कार्यालय और आवासीय परिसर में की गई है। निदेशालय ने इस महीने की शुरुआत में कोचर, उनके पति दीपक कोचर, धूतएवं अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया था। इस मामले में अधिक सबूतों की तलाश के लिए ED ने शुक्रवार सुबह यह छापेमारी की।

लुक आउट नोटिस जारी
बता दें कि चंदा कोचर के कार्यकाल के दौरान ICICI ने वीडियोकॉन ग्रुप और उससे संबंद्धित कंपनियों के लिए 1875 करोड़ रुपए के छह लोन को मंजूरी दी थी। चंदा दो मामलों में मंजूरी देने वाली कमेटी में खुद भी शामिल थीं। CBI लोन के मामले में दोनों के घरों में छापेमारी कर रही है। इससे पहले ही चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और वेणुगोपाल धूत के खिलाफ केंद्रीय जांच व्यूरो (सीबीआई) लुक आउट नोटिस जारी कर चुका है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि आरोपी देश छोड़कर भाग न पाएं।

ये है पूरा मामला
चंदा कोचर पर मार्च 2018 में अपने पति को आर्थिक फयदा पहुंचाने के लिए पद के दुरुपयोग का आरोप लगा था। वहीं वीडियोकॉन ग्रुप के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत पर आरोप है कि उन्होंने 2010 में 64 करोड़ रुपए न्यूपावर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) को दिए थे। इस कंपनी को धूत ने दीपक कोचर और दो अन्य रिश्तेदारों के साथ मिलकर खड़ा किया था। जनवरी 2009 में धूत ने इस कंपनी में डायरेक्टर का पद छोड़ दिया और ढाई लाख रुपए में अपने 24,999 शेयर्स भी न्यूपावर में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद 2012 में धूत ने वीडियोकॉन के नाम से ICICI बैंक से 3250 करोड़ रुपए का कर्ज लिया और बाद में इसका उपयोग दीपक कोचर की कंपनी को फायदा पहुंचाने में किया। 

विवाद सामने आने के बाद इस मामले की जांच न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण समिति को सौंपा गया। जिसमें लोन देने की प्रक्रिया को सही नहीं ठहराया गया था। समिति ने माना था कि इस लोन को देने में बैंक के आचार संहिता का उल्लंघन किया गया, क्योंकि इस कर्ज का एक हिस्सा उनके पति दीपक द्वारा चलाई जा रही कंपनी को दिया गया, जिससे उन्हें विभिन्न वित्तीय लाभ प्राप्त हुए। 

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