comScore
Dainik Bhaskar Hindi

ट्रिपल तलाक पर मोदी सरकार के ड्राफ्ट बिल का 8 राज्यों ने किया समर्थन

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 15th, 2017 13:06 IST

669
0
0

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में सदियों से चली आ रही है तीन तलाक की प्रथा को खत्म करने के लिए एक ड्राफ्ट बिल तैयार किया गया है। मोदी सरकार के इस बिल का आठ राज्यों ने समर्थन किया है। वहीं बाकी राज्यों का भी इस पर जवाब आना अभी बाकी है। लॉ मिनिस्ट्री ने लगभग 15 दिनों पहले जुबानी, लिखित या किसी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से तीन तलाक को देने पर प्रतिबंध लगाने और गैर-जमानती अपराध बनाने से जुड़े कानून पर सभी राज्य सरकारों से राय मांगी थी। 

केंद्र सरकार के ड्राफ्ट बिल में लिखा है कि अगर कोई पुरुष अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोलकर तलाक देता है तो उस मुस्लिम पुरुष को तीन साल की सजा दी जाए। वहीं पीड़ित महिला को कोर्ट में गुहार लगाने की इजाजत मिले, इसके साथ ही महिला मुआवजा लेने की गुहार भी लगा सकती है। अगस्त के महीने में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था। हालांकि, यह कानून बनने के बाद भी जम्मू और कश्मीर में लागू नहीं होगा। 

मोदी सरकार में बनी कमेटी

हालांकि बाद में शीर्ष अदालत ने इस पर रिपोर्ट देने के लिए कहा था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद करीब 37 मामले ऐसे आए थे, जिनमें महिलाओं को उनके पति ने तीन तलाक दे दिया। जानकारी के अनुसार ज्यादातर मामले यूपी से आए थे। जिसके बाद केंद्र सरकार ने इसका समाधान निकालने के लिए एक कमिटी बनाई थी। इस कमिटी में मोदी सरकार के कई मंत्री शामिल थे। 

तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं का गुजारा भत्ता बढ़ा

बता दें कि इस कमिटी में राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, रवि शंकर प्रसाद, मुख्तार अब्बास नकवी समेत दो और राज्यमंत्री शामिल हुए हैं। इसके बाद ही 'मुस्लिम विमिंज प्रॉटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज ऐक्ट' नाम का ड्राफ्ट बिल तैयार किया गया। दूसरी तरफ बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा है कि सरकार अब तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता के रूप में दस हजार नहीं बल्कि पच्चीस हजार रुपए देगी। बता दें कि राजीव गांधी की सरकार ने कानून में संशोधन कर मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को उससे वंचित कर दिया था। 31 साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने 1986 में शहबानो मामले में गुजारा भत्ता का निर्णय दिया था।

सुशील कुमार मोदी ने बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति बैठक के दौरान इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तलाकशुदा महिलाओं को गुजारा भत्ता देने की शुरुआत 2005 में की गई थी। अब इसमें संशोधन कर महिलाओं के गुजारे भत्ते की राशि बढ़ा दी गई है।

समाचार पर अपनी प्रतिक्रिया यहाँ दें l

ई-पेपर