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चुनाव आयोग ने NaMo TV को माना राजनीतिक विज्ञापन, ​दिए ये निर्देश


हाईलाइट

  • चुनाव प्रचार के तरीकों पर चुनाव आयोग की सख्त नजर
  • दूरदर्शन को एयरटाइम कवरेज में समानता लाने को कहा
  • विपक्ष दल के साथ अन्य दलों ने EC से की थी शिकायत

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दल प्रचार प्रसार के नए नए तरीकों को अपना रहे हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ​इन पर सख्त नजर रख रहा है। हाल ही में चुनाव आयोग ने NaMo TV पर आपत्ति जताते हुए नमो टीवी को राजनीतिक विज्ञापन माना है। आयोग इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी से सवाल भी करेगा और इस पर होने वाले पूरे खर्च की जानकारी सालाना ऑडिट रिपोर्ट में शामिल करनी होगी। हालांकि यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी चुनाव आयोग की तरफ से NaMo TV पर जवाब मांगा गया था। 

फिलहाल भारतीय चुनाव आयोग ने दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि यह सुनिश्चित करें कि NaMo TV की सामग्री स्थानीय मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति द्वारा पूर्व-प्रमाणित है। आयोग ने कहा कि NaMo TV के कंटेंट को प्रसारण से पहले सर्टिफिकेशन पैनल से पास कराया जाना चाहिए। बता दें कि चुनाव के दौरान जिला और राज्य स्तर पर ऐसी समितियों का गठन किया जाता है। वे राजनीतिक अभियान और विज्ञापन साफ करते हैं।

कैंपेन पर भी सख्ती
आपको बता दें कि 31 मार्च को NaMo TV देश की कुछ DTH सर्विस पर लॉन्च हुआ था। इसके बाद कांग्रेस और कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी। कांग्रेस पार्टी ने कहा, यह सीधे तौर पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। हालांकि शिकायत के बाद NaMo TV बंद नहीं हो सका, लेकिन चुनाव आयोग ने बीजेपी के मैं भी चौकीदार कैंपेन पर सख्ती दिखाई थी। 

दूरदर्शन को भी लिखा पत्र
इसके अलावा विपक्षी दल के साथ कई अन्य राजनीतिक दलों ने शिकायत की थी कि दूरदर्शन द्वारा विभिन्न राजनीतिक दलों को दिए गए एयरटाइम कवरेज में समानता नहीं है। इसके बाद चुनाव आयोग ने दूरदर्शन को पत्र लिखकर कहा कि सभी राजनीतिक दलों को देने जाने एयरटाइम कवरेज में समानता लाए।

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