comScore

ग्यारह विद्यार्थियों के लिए फिर से शुरू होगा बंद इंजीनियरिंग कॉलेज

ग्यारह विद्यार्थियों के लिए फिर से शुरू होगा बंद इंजीनियरिंग कॉलेज

डिजिटल डेस्क,नागपुर। यूनिवर्सिटी  ने अधर में लटके 11 इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के लिए एक बंद हो चुका इंजीनियरिंग कॉलेज दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया है। यूनिवर्सिटी  ने गोंडखैरी स्थित विद्यानिकेतन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के प्रबंधन को दोबारा कॉलेज शुरू करने के आदेश जारी करने की तैयारी की है। एक या दो दिन में यूनिवर्सिटी  अधिकृत रूप से यह आदेश जारी करेगा। उल्लेखनीय है कि 28 सितंबर को प्रकाशित अंक में ‘दैनिक भास्कर’ ने इस विषय को प्रमुखता से उठाया था। नियमों के पेंच में किस प्रकार 11 विद्यार्थियों की इंजीनियरिंग की पढ़ाई रह गई, इसे प्रकाश में लाया था। विद्यार्थियों ने इस बाबत  यूनिवर्सिटी की ग्रीवन्स कमेटी से गुहार लगाई थी, जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। यूनिवर्सिटी  प्रभारी प्र-कुलगुरु डॉ. विनायक देशपांडे ने बताया कि कमेटी ने सभी पक्षों पर गौर करने के बाद यह निर्णय लिया है। विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में अधूरी न रह जाए, इसलिए कमेटी ने यह फैसला लिया है। 

बीते तीन वर्ष में किसी विद्यार्थी को एडमिशन  नहीं दिया गया

दरअसल, कॉलेज प्रबंधन ने कुछ वर्ष पूर्व कॉलेज बंद करने का निर्णय लिया था। एआईसीटीई ने संस्थान को प्रोग्रेसिव क्लोजर यानी धीरे-धीरे कॉलेज बंद करने की अनुमति दी। कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि बीते तीन वर्ष में उन्होंने किसी विद्यार्थी को प्रवेश नहीं दिया। अत: अब मौजूदा सत्र में कॉलेज बंद करने के लिए उन्हें नागपुर विश्वविद्यालय और डीटीई से एनओसी मिल गई है, लेकिन अब कॉलेज के 11 ऐसे विद्यार्थी सामने आए हैं, जिन्होंने अब एटीकेटी में बचे सारे विषय पास कर लिए और उनका अंतिम वर्ष बाकी था। अंतिम वर्ष की पढ़ाई कहां करें, यह प्रश्न विद्यार्थियों के सामने था। विद्यार्थियों द्वारा नागपुर यूनिवर्सिटी  में की गई शिकायत मंे प्रबंधन पर आरोप लगाए थे कि एटीकेटी क्लीयर करने के बाद कॉलेज ने उन्हें फाइनल ईयर में प्रवेश दिया और पैसे ले लिए, लेकिन अब फाइनल ईयर का परीक्षा फॉर्म भरने की बारी आई, तो नागपुर यूनिवर्सिटी ने उनके फाॅर्म स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यूनिवर्सिटी के अनुसार अब कॉलेज उनके संलग्नित नहीं है। 

कम संख्या के कारण बंद हुआ था कॉलेज

मामले में कॉलेज प्रबंधन का पक्ष था कि गिरती विद्यार्थी संख्या के कारण प्रबंधन ने कॉलेज बंद करने का निर्णय लिया। उन्होंने तीन वर्ष से कोई नया प्रवेश नहीं लिया और उनके सभी नियमित छात्र पास-आउट हो गए, लेकिन अब कहीं से पूर्व छात्र आ गए, जिन्हें फाइनल ईयर पास करना है। अब 11 विद्यार्थियों के लिए दोबारा कॉलेज शुरू नहीं किया जा सकता। सदस्य के अनुसार विद्यार्थियों के पास एक विकल्प था कि वे इंस्टीट्यूशन बदल कर फाइनल ईयर पास कर सकते हैं, लेकिन यहां उच्च व तंत्र शिक्षा विभाग (डीटीई) की एक शर्त आड़े आ गई। जो विद्यार्थी एक से अधिक विषय में फेल हुए, उन्हें इंस्टीट्यूशन बदल कर नहीं दिया जा सकता। अब  नागपुर विश्वविद्यालय ने खुद ही कॉलेज फिर से शुरू कराने की तैयारी की है। 

कमेंट करें
ugjYD