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सरकार ने घटाई ESIC की दरें, 6.5% से घटाकर की 4% , 3.6 करोड़ कर्मचारियों को फायदा


हाईलाइट

  • सरकार ने ईएसआईसी में अंशदान 6.5% से घटाकर 4% कर दिया है
  • इससे 3.6 करोड़ कर्मचारियों और 12.85 लाख नियोक्ताओं को फायदा होगा
  • 1 जुलाई, 2019 से नई दरें प्रभावी होंगी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को स्वास्थ्य बीमा योजना (ईएसआईसी) में नियोक्ता और कर्मचारियों का कुल अंशदान 6.5% से घटाकर 4% कर दिया है। इससे 3.6 करोड़ कर्मचारियों और 12.85 लाख नियोक्ताओं को फायदा होगा। इस कटौती से कंपनियों को सालाना 5,000 करोड़ रुपए की बचत होगी। 1 जुलाई, 2019 से नई दरें प्रभावी होंगी। 22 सालों में ये पहली कटौती है। श्रम मंत्रालय ने इसका ऐलान किया है।

मंत्रालय ने कहा, सरकार ने कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के तहत योगदान की दर को 6.5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है (नियोक्ताओं का योगदान 4.75 प्रतिशत से घटाकर 3.25 प्रतिशत किया जा रहा है और कर्मचारियों के योगदान को 1.75 प्रतिशत से 0.75 प्रतिशत घटाया जा रहा है)। 2018-19 में ईएसआई योजना के लिए 12.85 लाख नियोक्ताओं और 3.6 करोड़ कर्मचारियों ने 22,279 करोड़ रुपये का योगदान दिया।

मंत्रालय ने कहा कि योगदान की कम दर से श्रमिकों को काफी राहत मिलेगी। दरें घटाने के बाद और ज्यादा कर्मचारी इस योजना से जुड़ेंगे। इसी प्रकार, नियोक्ताओं के योगदान की हिस्सेदारी में कमी से प्रतिष्ठानों की वित्तीय देयता कम हो जाएगी। इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को भी बढ़ाया जा सकेगा। यह भी उम्मीद है कि ईएसआई योगदान की दर में कमी से कानून का बेहतर अनुपालन हो सकेगा।

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 (ईएसआई अधिनियम) के तहत बीमित व्यक्तियों को चिकित्सा, कैश, मातृत्व, विकलांगता और आश्रित लाभ प्रदान किया जाता है। ESI अधिनियम को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) द्वारा प्रशासित किया जाता है। ईएसआई अधिनियम के तहत प्रदान किए गए लाभ नियोक्ताओं और कर्मचारियों द्वारा किए गए योगदान से वित्त पोषित हैं।

ईएसआई अधिनियम के तहत, नियोक्ता और कर्मचारी दोनों क्रमशः अपने शेयरों का योगदान करते हैं। भारत सरकार श्रम और रोजगार मंत्रालय के माध्यम से ईएसआई अधिनियम के तहत योगदान की दर तय करती है। सरकार ने 1 जनवरी 2017 से ईएसआई का दायरा बढ़ाकर 21,000 रुपए तक मासिक वेतन वाले कर्मचारियों को इसमें शामिल किया था। पहले 15,000 रुपए तक सैलरी वाले कर्मचारियों को इसका लाभ मिलता था।

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