comScore
Dainik Bhaskar Hindi

10 वीं और 12 वीं की परीक्षा में पास कराने वाला स्कूल का पूर्व प्रधानाचार्य पकड़ाया

BhaskarHindi.com | Last Modified - March 14th, 2019 15:44 IST

2k
0
0
10 वीं और 12 वीं की परीक्षा में पास कराने वाला स्कूल का पूर्व प्रधानाचार्य पकड़ाया

डिजिटल डेस्क, नागपुर। पर्चा घोटाले में किदवई स्कूल का सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य मास्टर माइंड के तौर पर सामने आया है, उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अभी तक उसके द्वारा दर्जन भर विद्यार्थियों को पास कराए जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। प्रकरण में शिक्षा मंडल सहित कुछ शिक्षकों की भी लिप्त होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। यह जानकारी  पत्रपरिषद में उपायुक्त हर्ष पोद्दार ने दी है। मामले में तीन आरोपियों को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है तथा एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है।

जरीपटका क्षेत्र के भीम चौक में दो दिन पहले पुलिस ने छापा मारकर आरोपी दलाल अतुल उर्फ गुड्डु शिवमोहन अवस्थी, चंद्रकांत उर्फ चंदू नीलंकठ मते, पूर्व विद्यार्थी अमन मुकेश मोटघरे को गिरफ्तार किया है तथा एक नाबालिग को हिरासत में लिया है। आरोपियों को 16 मार्च तक पीसीआर में लिया गया है। आरोपियों से हुई पुछताछ से पुलिस को पता चला है कि कक्षा 10वीं और 12वीं परीक्षा में घोटाला करने वाल किदवई स्कूल का सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य जुबेर खान गिट्टीखदान निवासी है, जो दो वर्ष पहले ही सेवानिवृत्त हुआ है।

सेवानिवृत्ति के पूर्व और बाद में वह फेल हुए विद्यार्थियों से रुपए लेकर पास कराने का दावा करता था। ऐसे विद्यार्थियों को तलाशने के लिए कमीशन देकर उसने अतुल और चंदू को रखा था, जो फेल होने वाले विद्यार्थियों को जुबेर से मिलाते थे। सौदा पक्का होने के बाद जुबेर उन्हें अच्छे अंकों से पास कराने का दावा करता था। दरअसल प्रधानाचार्य होने के कारण जुबेर के संपर्क में पूर्व के कई होशियार विद्यार्थी थे, जो अच्छे अंकों पास हुए थे। उन विद्यार्थियों की जानकारी जुबेर को रहती थी। इधर सौदा पक्का होने के बाद जुबेर मात्र एक-दो हजार रुपए देकर फर्जी विद्यार्थी को परीक्षा में बिठा देता था। बाकी के रुपए जुबेर खुद डकार लेता था। बरसों से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहने के कारण बोर्ड व कई स्कूलों के शिक्षक जुबेर को पहचानते थे। जिसमें कुछ और लोगों के भी इस घोटाले में शामिल होने की आशंका है।

विद्यार्थी को पास कराने के दो रास्ते
जुबेर घटित प्रकरण को अंजाम देते हुए दो तरह से विद्यार्थियों को पास कराता था। एक परीक्षा केंद्र में फर्जी पहचान पत्र के जरिए किसी और विद्यार्थी के नाम पर फर्जी विद्यार्थी को परीक्षा में बिठा देता था, दूसरा रास्ता था जिस पर्यवेक्षक के पास पड़ताल के लिए पर्चा भेजा जाता था, जुबेर उससे संपर्क कर संबंधित विद्यार्थी का पर्चा बदल देता था।

बार कोड गलाने का भी था तरीका 
बार कोड लगा होने से उत्तर पत्रिका बदलना आसान नहीं था, लेकिन जुबेर और उसके गिरोह में इसका भी तरीका ढूंढ निकाला था। 220 हाई वोल्टेज बल्ब के नीचे बार कोड को रखा जाता था, तापमान से बार कोड की पकड़ ढीली हो जाने से उससे बार कोड निकालकर फर्जी उत्तर पत्रिका में लगाया जाता था। इस तरह से जुबेर अभी तक 11 विद्यार्थियों को पास करा चुका है। जुबेर संबंधित विद्यार्थी आर्थिक स्थिति देखकर रेट तय करता था। एक विषय में विद्यार्थी को पास कराने दस से पंद्रह हजार रुपए लेता था। इसमें से दो से तीन हजार रुपए फर्जी विद्यार्थी को मिलते थे।
 

समाचार पर अपनी प्रतिक्रिया यहाँ दें l

ये भी देखें
Survey

app-download