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इन देशों में पड़ती है खून जमा देने वाली सर्दी, जानें से पहले करवा लें बीमा

August 31st, 2018 12:58 IST
इन देशों में पड़ती है खून जमा देने वाली सर्दी, जानें से पहले करवा लें बीमा


डिजिटल डेस्क । भारत में कहते है कि मकर संक्रांति के बाद ठंड का असर थोड़ा कम हो जाता है। हालांकि ग्लोबल वॉर्मिंग से प्रकृति में आए बदलाव के बाद ये दावा फिका पड़ने लगा है। अब अन्य देशों के तरह भारत तापमान संक्रांति के बाद भी गिरता है। भारत में तो 2 डिग्री तापमान में मौतों का आंकड़ें सामने आने लगते हैं, लेकिन इस वक्त दुनिया में सबसे बड़े देश रूस ऐसा है जहां तापमान इतना कम हो गया है, जितना कि आप कल्पना भी नहीं कर पाएंगे। रूस में तापमान -62 डिग्री तक पहुंच गया हैं। बावजूद इसके वहां लोग मरे नहीं बल्कि इस बर्फ में जमी जिंदगी को इंजॉय कर रहे हैं। ये उस देश के लोगों का जज्बा और सरकारी व्यवस्थाएं ही हैं, जो उन्हें इस बेदर्द ठंड में बचाए हुए है। 
रूस के साइबेरिया में बर्फ की घाटी में एक गांव बसा है जहां सबसे ज्यादा ठंड पड़ रही है। इस गांव का नाम है ओइमाकॉन है। यहां का पारा -62 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इसे दुनिया का सबसे ठंडी जगह माना जाता है। इस गांव की कुल आबादी 500 है।

यहां के लोगों का गुजर-बसर करना मुश्किल हो गया है। नदी से लेकर पेड़ सभी चीज जमी हुई है। सोशल मीडिया पर यहां की तस्वीरें काफी वायरल हो रही हैं। बता दें, ओइमाकॉन का मतलब होता है, ऐसी जगह जहां पानी जमता नहीं हो, लेकिन यहां पानी से लेकर इंसान भी जम गया है। यहां सबसे कम तापमान -72 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। इस जगह को 'पोल ऑफ कोल्ड' भी कहा जाता है। इसी के साथ हम आपको वो पांच जगह बनाते ना रहे हैं, जो दुनिया में सबसे ठंडा रहने के लिए जानी जाती हैं। 

याकुत्स्क, रूस

याकुत्स्क को दुनिया का सबसे ठंडा शहर माना जाता है। आमतौर पर सर्दी के मौसम में यहां पारा शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है। सितंबर में ये हाल शुरू होता है और मई तक पारा वापस शून्य के निशान तक वापस नहीं लौटता है। जनवरी में तो हाल ये रहता है कि पूरे महीने औसत तापमान -34 डिग्री बना रहता है। करीब 2 लाख की आबादी वाले इस शहर में खनन उद्योग इसकी आर्थिक रीढ़ है। याकुत्स्क में दो एयरपोर्ट हैं, एक यूनिवर्सिटी है, स्कूल हैं, थियेटर हैं और म्यूजियम भी है। 

वेरखोयांस्क, रूस

दुनिया की दूसरी सबसे ठंडी जगह भी रूस में ही है। याकुत्स्क से करीब 404 मील दूर और उत्तरी ध्रुव से 1,500 मील के फासले पर है वेरखोयांस्क शहर। 2002 की जनगणना के मुताबिक, यहां 1,434 लोग रहते थे। फर की टोपियां और लंबे ओवरकोट के बिना इन लोगों के लिए सड़कों पर निकलना मुश्किल होता है। यहां के हालात भी ओइमाकॉन से बहुत अलग नहीं हैं। आमतौर पर जनवरी में यहां 50.4 डिग्री फॉरेनहाइट तापमान रहता है। इस जगह में कड़ाके की ठंड में जीना कितना मुश्किल है ये इससे समझा जा सकता है कि कालापानी की तरह ही 1860 से 20वीं सदी की शुरुआत तक निर्वासन में भेजे गए लोगों को वेरखोयांस्क में रखा जाता था। 

इंटरनेशनल फॉल, मिन, अमेरिका

बेशक, इंटरनेशनल फॉल ओइमाकॉन और वेरखोयांस्क के मुकाबले आधा ठंडा भी नहीं है लेकिन इसमें शक नहीं है कि यहां हाड़ कंपा देने वाली सर्दी पड़ती है। अमेरिका और कनाडा की सरहद पर बसे इस छोटे से कस्बे में करीब साढ़े छह हजार लोग रहते है। यहां साल में कम से कम 60 बार पारा शून्य से नीचे चला जाता है। सबसे ज्यादा मुश्किल की बात ये है कि इंटरनेशनल फॉल में साल भर भारी बर्फबारी होती है। इसे आईसबॉक्स ऑफ नेशन भी कहा जाता है, लेकिन इस नाम पर इंटरनेशनल फॉल को एक दूसरे शहर से कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी।

फ्रेजर, कोलो, अमेरिका

आईसबॉक्स ऑफ नेशन-इस टाइटल के लिए अमेरिका का फ्रेजर शहर-अपने मुल्क के दूसरे ठंडे शहर इंटरनेशनल फॉल के साथ कानूनी लड़ाई में उलझा था। कोलोराडो के पहाड़ी इलाके में स्थित फ्रेजर कस्बे की आबादी सिर्फ 910 बाशिंदों की है। ये अमेरिका के मशहूर स्की स्पॉट विंटर पार्क के न्रुादीक स्थित है। जहां इंटरनेशनल फॉल की ठंडी ज्यादा सर्द होती है, वहीं सालाना औसत के हिसाब से फ्रेजर का तापमान ज्यादा कम है। यहां साल भर का औसत तापमान 32.5 डिग्री फॉरेनहाइट रहता है।

हेल, नार्वे

नार्वे के शहर हेल में एक लतीफा बहुत मशहूर है। लोग मजाक में एक दूसरे को कहते हैं हेल फ्रीजिंग ओवर। दिसंबर से लेकर मार्च तक आम तौर पर इस शहर में जहां भी नजर जाती है बर्फ की सफेद चादर नजर आती है। करीब चार महीने तक नार्वे का हेल शहर जमा रहता है। फरवरी 2010 में यहां पर औसत तापमान 20 डिग्री फॉरेनहाइट था, जिसने यहां रहने वालों को कंपकंपा दिया था।
 

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