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बजट को लेकर क्या है आपकी उम्मीदें? ये सौगात दे सकते हैं वित्त मंत्री

September 06th, 2018 15:48 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली 1 फरवरी को बजटपेश करने वाले हैं। इस बजट से आमजन को काफी उम्मीदें भी हैं। खासकर तब जबकि 2019 में लोकसभा चुनाव हो सकते हैं। मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि उनकी सरकार का आखिरी बजट लोकलुभावन नहीं होगा। लोगों को काफी उम्मीदें इसलिए भी हैं क्योंकि उनको लगता है कि 2019 चुनाव को देखते हुए मोदी सरकार लोकलुभावन बजट भी बना सकती है।

अमीर से लेकर गरीब तबके, किसानों, व्यापारियों, छोटो-मझोले कारोबारियों, टैक्स पेयर्स को इस बजट का बेसब्री से इंतजार है। आइए जानते हैं कि इन सेक्टरों को आम बजट से क्या उम्मीदें हैं और ये किस तरह आम आदमी की जेब पर असर डाल सकता है....

पेट्रोल और डीजल
भारतवासी मानते हैं कि आज महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दाम भी हैं। अगर पेट्रोल और डीजल के दाम कम हो जाएंगे तो आधी से ज्यादा महंगाई अपने आप कम हो जाएगी। बता दें कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन संजीव सिंह ने भी पेट्रो पदार्थों को GST के अधीन लाने की मांग की है। इन मांगों के असर के रूप में पेट्रोल और डीजल सस्ता हो सकता है।

पेट्रोलियम सेक्टर इस समय भारत में आम लोगों की जिंदगी को काफी हद तक प्रभावित कर रहा है। इस सेक्टर की प्रमुख मांगों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने, एक्साइज ड्यूटी घटाने, पेट्रो उत्पादों को GST के अधीन लाने, प्राकृतिक गैस को GST में लाने, घरेलू कच्चे तेल पर 2 फीसदी सेंट्रल सेल्स टैक्स घटाकर इसमें और आयातित तेल की कीमतों में समानता लाना आदि हैं।

किसान और खेती
भारत देश हमेशा से ही कृषि प्रधान रहा है, यह बात सभी जानते हैं। एग्रीकल्चर सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था में काफी महत्वपूर्ण माना गया है। मगर वर्तमान में किसानों की जो हालत है, वह किसी से भी अछूती नहीं है। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे राज्यों में किसान आत्महत्याओं के मामले भी काफी बढ़े हैं। यह किसान भाई अब अरुण जेटली की ओर बजट 2018 पर अपनी उम्मीद की टकटकी लगाए ताक रहे हैं। देखना होगा कि वित्तमंत्री इन किसान भाईयों को कितनी राहत देते हैं।

बता दें कि वित्त मंत्री अरुण जेटली यह बात कह भी चुके हैं कि इस बार उनकी प्राथमिकता में कृषि क्षेत्र ज्यादा रहेगा। इस क्षेत्र यानी किसानों की प्रमुख मांगों में साहूकारों द्वारा दिए जाने वाले कर्ज पर रोक लगाना, किसानों को कम दरों पर आसानी से सरकारी कर्ज उपलब्ध कराना, कीटनाशकों और बीजों पर GST की दरें कम करना और नकली दवाओं पर रोक लगाना आदि हैं। इससे किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिलने के साथ ही इस क्षेत्र का जीडीपी में योगदान बढ़ सकता है और आयात पर निर्भरता कम होने से आम लोगों के लिए भी कृषि उत्पाद सस्ते हो सकते हैं।

रोजगार
इस बजट से भारतीय युवाओं की काफी उम्मीदें लगी हुई हैं। युवाओं को उम्मीद है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली अपने इस आखिरी बजट में मोदी सरकार के रोजगार देने के वादे को पूरा कर सकते हैं। मतलब मोदी सरकार 2019 के चुनावों को देखते हुए इस बजट में सरकार रोजगार के कई अवसर युवाओं को दे सकती है। वहीं अगर पीएम मोदी के पकौड़े बेचने वाले रोजगार के बयान को सुना जाए तो यह उम्मीद बहुत ही कम लग रही है कि युवाओं को रोजगार के मौके मिलेंगे। विश्लेषकों को भी कुछ ऐसा ही लगता है।

मगर कुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं कि मोदी सरकार इस बजट 2018 में देश की पहली रोजगार नीति पेश कर सकती है। इस नई नीति के माध्यम से सरकार द्वारा रोजगार प्रदाताओं को प्रोत्साहन देते हुए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे। अगर यह नीति लागू होती है तो सरकार के इस फैसले से देश में बेरोजगारी की समस्या खत्म होगी।

बता दें कि नौकरियों के सृजन में लक्ष्य से काफी पीछे रहने पर आलोचना का सामना कर रही मोदी सरकार अब स्वरोजगार को भी नौकरी के आंकड़ों में शामिल करने की तैयारी कर रही है। श्रम मंत्रालय के प्रस्ताव को अगर स्वीकार किया गया तो देश में नौकरियों के आंकड़ों में काफी तेज बढ़त होगी।

हॉस्पिटेलिटी और होटल इंडस्ट्री
मोदी सरकार के इस आखिरी बजट से हॉस्पिटेलिटी सेक्टर को भी काफी उम्मीदें लगी हुई हैं। ऐसा ही हाल कुछ होटल इंडस्ट्री का भी है। इनमें GST स्लैब में राहत देने, कॉर्पोरेट टैक्स की दरें 25 फीसदी तक घटाने, आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) के फायदे देने जैसी मांगें हैं। अगर इस सेक्टर की ये मांगें पूरी होती हैं तो इससे लोगों का घर से बाहर ठहरना और खाना सस्ता हो सकता है।

बढ़ सकता है मेडिकल अलाउंस
हाल ही में देखा गया है कि मेडिकल सेवा पर होने वाले खर्च में लगातार बढ़ोतरी हुई है। सरकार कंपनियों की तरफ से दी जाने वाली मेडिकल अलाउंस पर टैक्स छूट को बढ़ा सकती है। अगर ऐसा होता है तो नौकरीपेशा लोगों को इससे खासा फायदा होगा। फिलहाल मेडिकल के क्षेत्र में छूट 15 हजार रुपए है। छूट बढ़ने के साथ ही कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को मेडिकल अलाउंस बढ़ाकर दे सकती हैं।

GST टैक्स स्लैब में कटौती
मोदी सरकार इस बजट में GST टैक्स स्लैब को 2 से 3 दरों तक ही सीमित रखने का फैसला ले सकती है। माना जा रहा है कि बजट में 12 और 18 फीसदी टैक्स स्लैब को एक ही किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो इस श्रेणी में आने वाले उत्पाद और सेवाएं सस्ती हो जाएंगी।

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