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80 साल की शीला दीक्षित दिल्ली की खत्म हो चुकी कांग्रेस में फूकेंगी जान

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 11th, 2019 10:00 IST

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News Highlights

  • 80 वर्षीय शीला दीक्षित को कांग्रेस ने दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया
  • अजय माकन के इस्तीफे के बाद खाली हुआ था कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद
  • देवेंद्र यादव, राजेश लिलोथिया और हारून युसूफ को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली कांग्रेस की कमान एक बार फिर राज्य की पूर्व सीएम शीला दीक्षित को सौंप दी गई है। गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए उनके नाम का ऐलान किया गया। हाल ही में वरिष्ठ नेता अजय माकन के इस्तीफा देने के बाद यह पद खाली हुआ था। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के बाद से ही शीला दीक्षित के एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष बनने की संभावना जताई जा रही थी। अध्यक्ष पद पर खुद के चुने जाने के बाद शीला दीक्षित ने पार्टी हाईकमान को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा है कि एक बार फिर से यह जिम्मेदारी मिलने से वे गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के लिए शीला दीक्षित के नाम की घोषणा ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के दिल्ली इनचार्ज पीसी चाको ने की। पीसी चाको ने इसके साथ ही कार्यकारी अध्यक्ष के लिए भी नियुक्तियों की घोषणा की। देवेंद्र यादव, राजेश लिलोथिया और हारून युसूफ को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।

शीला दीक्षित के प्रदेश अध्यक्ष बनने पर निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, ' शीला दीक्षित जी को पुन: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर बधाई व शुभकामनाएं। उनके आधीन, मुझे संसदीय सचिव एवं कैबिनेट मंत्री के रूप में काम करके सीखने का सुअवसर मिला। मुझे विश्वास है कि शीला जी की अगुआई में हम,मोदी+केजरीवाल सरकारों के विरोध में एक सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाएंगे।'

बता दें कि 20 साल बाद शीला दीक्षित दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई  है। उनके कंधों पर राजधानी में पार्टी को एक बार फिर से खड़ी करने की जिम्मेदारी होगी। गौरतलब है कि पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी, लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के हाथ राज्य में खाली रहे थे। ऐसे में अब जब लोकसभा चुनाव में महज 3 माह बाकी है, शीला दीक्षित को बेहद सक्रिय भूमिका में आते हुए पार्टी को गति प्रदान करनी होगी।

बता दें कि शीला दीक्षित 15 साल राज्य की सीएम रही हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में AAP की जबर्दस्त जीत के बाद से वे राजनीति से लगभग दूर हो गईं थी।
 

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