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इन महिलाओं से थी नजदीकियां, पढ़ें पूर्व PM से जुड़े कुछ किस्से

BhaskarHindi.com | Last Modified - November 14th, 2017 16:25 IST

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की 14 नवंबर को जयंती है। पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने घर पर निजी शिक्षकों से प्राप्त की। उनके जन्मदिन को बाल दिवस (childrens day) के रूप में मनाया जाता है। 

नेहरू कश्मीरी ब्राह्मण परिवार के थे, जो अपनी प्रशासनिक क्षमताओं तथा विद्वत्ता के लिए विख्यात थे। वैसे तो आपने नेहरू की जीवन से जुड़ी बहुत सी बातें पढ़ी, सुनी होंगी, लेकिन आज हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़ा अनकहा सच बताएंगे। अपने व्यक्तित्व से लोगों को आकर्षित करने वाले नेहरू की कई महिलाओं से प्रेम संबंध रहे। उनकी प्रेम कथा अक्सर चर्चा का विषय होती थीं। bhaskarhindi.com सिलसिलेवार ढंग से आपको उन शख्सियतों के बारे में बताएगा जिनसे नेहरू की नजदीकियां रहीं। पहले बात श्रृद्धा माता की।

श्रृद्धा माता
श्रृद्धा माता आकर्षक काया वाली सुंदर महिला थीं। वो संस्कृत में विद्वान थीं। युवा संन्यासिन श्रृद्धा माता बनारस रहा करती थीं। बाद में वो दिल्ली शिफ्ट हो गईं। एक बार उन्होंने नेहरू से मिलने का मन बनाया। लेकिन पूर्व पीएम ने उनमें दिलचस्पी नहीं दिखाते हुए मिलने से मना कर दिया। फिर जब एक बार उनकी मुलाकात नेहरू से हुई तो मिलने का ये सिलसिला जारी रहा।

वह रात में सीधे प्रधानमंत्री हाउस आ जाया करती थीं जब, नेहरू अपना काम निपटा चुके होते थे। बाद में वह गायब हो गईं और बेंगलुरु से प्रधानमंत्री हाउस में उनके पत्रों का एक बंडल भेजा गया, जो नेहरू ने उन्हें लिखे थे, साथ में एक डॉक्टर का पत्र आया कि ये पत्र उन्हें उस महिला से मिले हैं, जो यहां चर्च अस्पताल में एक बच्चे को जन्म देने आई थी। कहा जाता है कि उनका नेहरू पर प्रभाव भी दिखने लगा था। बाद में कुछ समय गायब रहने के बाद श्रृद्धा माता उत्तर भारत लौटीं और जयपुर में रहने लगीं। वहां सवाई मानसिंह ने उन्हें आलीशान किला दिया। श्रृद्धा माता का जिक्र बाद में खुशवंत सिंह ने भी अपनी किताब में किया। वह उनसे जब मिले तो श्रृद्धा माता ने उनसे नेहरू के करीबी का दावा किया।


 

एडविना माउंटबेटन
कहा जाता है कि नेहरू और लेडी एडविना माउंटबेटन एक दूसरे से प्यार करते थे। एडविना के जिंदा रहने तक दोनों के बीच आत्मीयता बरक़रार रही। केएफ रूस्तमजी की डायरी के संपादित अंश किताब के रूप में प्रकाशित हुए। उसमें उन्होंने भी एडविना और नेहरू के प्यार पर चर्चा की और लिखा कि दोनों अभिजात्य थे। दोनों की रुचियां परिष्कृत थीं। दोनों एक दूसरे को काफी पसंद करते थे।



पद्मजा नायडू
पद्मजा सरोजिनी नायडू की बड़ी बेटी थीं। मथाई लिखते हैं, 1946 जब मैं उनसे इलाहाबाद में मिला, तब वह नेहरू के घर को संभालने में लगी हुईं थीं। फिर दिल्ली आकर पद्मजा यही काम करने लगीं। वह हमेशा नेहरू के बगल के कमरे में रहना चाहती थीं। इंदिरा को उनका आना अच्छा नहीं लगता था। न ही उनका वहां लंबा ठहरना। इसी दौरान नेहरू की लेडी माउंटबेटन से भी नजदीकियां रहीं।

बात 1947 के जाड़ों की है जब नेहरू को लखनऊ आना था। तब सरोजिनी नायडू उत्तर प्रदेश की राज्यपाल थीं। अचानक ये खबर जंगल में आग की तरह फ़ैल गई कि नेहरूजी पद्मजा को शादी के लिए प्रोपोज करेंगे। नेहरू लखनऊ तो गए लेकिन साथ में लेडी माउंटबेटन थीं। ये बात पद्मजा को नागवार गुजरी। एक बार जब उन्होंने नेहरू के बेडरूम में एडविना के दो फोटोग्राफ देखे तो काफी उदास हो गईं और तुरंत वहां अपनी एक छोटी सी फोटो लगा दी।

1948 में पद्मजा हैदराबाद से सांसद चुनी गईं। दिल्ली आने पर प्रधानमंत्री हाउस में ठहरीं, नेहरू के बगल के कमरे में। मथाई ने लिखा है कि वह नेहरू से शादी करना चाहती थीं लेकिन जब उन्हें लगा कि नेहरू के जीवन में केवल वही नहीं बल्कि कई स्त्रियां हैं। तो वह टूट से गईं। कहा जाता है कि इंदिरा के विरोध के चलते नेहरू ने उनसे शादी नहीं की।



मृदुला साराभाई 
मृदुला साराभाई नेहरू के बहुत करीब थीं। हालांकि 1946 तक नेहरू उनमें दिलचस्पी खो चुके थे। वह कांग्रेस की समर्पित कार्यकर्ता थीं। मृदुला गुजरात के प्रसिद्ध उद्योगपति और धनाढ्य साराभाई परिवार की बेटी थीं। एम ओ मथाई ने अपनी किताब रिमिनिसेंस ऑफ द नेहरू एज के हवाले से लिखा है कि मृदुला ने कश्मीर में शेख अब्दुल्ला के साथ काम किया। देशविरोधी गतिविधियों के लिए मृदुला क जेल में भी डाला गया।

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