comScore
Dainik Bhaskar Hindi

डेढ़ करोड़ का गबन, शाखा और समिति प्रबंधकों पर नहीं आई जांच की आंच

BhaskarHindi.com | Last Modified - August 11th, 2018 14:09 IST

398
0
0
डेढ़ करोड़ का गबन, शाखा और समिति प्रबंधकों पर नहीं आई जांच की आंच

डिजिटल डेस्क  सिंगरौली (वैढऩ) । सहकारी बैंक घोटाले का भास्कर द्वारा खुलासा करने के बाद शाखा और समिति प्रबंधकों द्वारा प्रबंधन को डेढ़ करोड़ का चूना लगाने का एक और मामला प्रकाश में आया है। शाखा प्रबंधकों ने समिति की सांठगाठ से सहकारी बैंक को मोटी रकम की चपत लगाई है। ऑडिट टीम ने वर्ष 2013-14 में वित्तीय अनिमितिता को उजागर किया था। जांच में सहकारी बैंक में गबन की असलियत सामने आने के बाद आरोपियों से न तो सरकारी रकम की रिकव्हरी हो पाई और न ही अमानत में खायनत करने के दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो पाई है।

पिछले पांच साल से जांच में चल रहे मामलों में आरोपियों पर कार्रवाई की आंच को लेकर कई सवाल जरूर खड़े हो गए हैं। अब देखना यह है कि सहकारी बैंक में गबन के आरोपियों पर अफसर कब तक शिकंजा कसने में कामयाब होते हैं।

अब दौड़ रहे कागजी घोड़े
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बैंक सीधी सिंगरौली में वर्ष 2010 से लेकर 2015 के गबन के मामलों में अब तक आरोपियों पर सिर्फ पद से पृथक करने की ही आंच आई है। बताया जाता है कि आरोपियों को पद से पृथक करने के बाद विभागीय जांच के आदेश जारी किये गए थे। विभागीय जांच में आरोपियों के दोषी पाए जाने पर रिकव्हरी निकली गई थी। विभागीय जानकारों कहना है कि इन्हें बचाने के अफसरों ने जांच के नाम पर पिछले दस साल से मामले को खींच रहे हैं। इसी के चलते दागियों ने रिकव्हरी के नोटिस को धता बताते हुए गबन की राशि जमा नहीं की है।

भास्कर टीम के हाथ लगे रिकार्ड बताते हैं कि जांच अधिकारी ने कदम-कदम में दागियों को खुला संरक्षण दिया है। चर्चा की जांच की आड़ में अफसरों ने मकसद पूरा करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसके चलते करोड़ों की सरकारी रकम का गबन करने के आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।

केस-1
यह मामला आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित निवास का है। आरोप है कि वर्ष 2012-13 में आडिट टीम ने समिति में 5927563 रुपए की गड़बडी उजागर की थी। टीम ने जांच में सहायक समिति प्रबंधक सुरेन्द्र द्विवेदी को गबन का दोषी पाया था। इस पर डीआर ने आरोपी के खिलाफ रिकव्हरी का मामला दर्ज किया था।

केस-2
यह मामला आदिम जाति सेवा सहकारी समिति महुआगांव से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि शाखा प्रबंधक रामसजीवन सेन और समिति प्रबंधक छत्रधारी जायसवाल ने सरकारी राशि 5808747 रुपए का गोलमाल किया था। वित्तीय अनियमितता का खुलासा होने के बाद अब तक सिर्फ वसूली की कार्रवाई ही प्रचलित हो पाई है। इसी प्रकार वर्ष 2014-15 में इसी समिति के इन्हीं संचालकों पर 1512800 के गबन एक और मामले का खुलासा हुआ है। इस पर भी विभागीय खानापूर्ति जारी है।

केस-3
यह गबन का मामला झारा समिति का है। आरोप है कि शाखा प्रबंधक विपिन बहादुर सिंह और सहायक समिति प्रबंधक सूर्यसेन जायसवाल ने सांठगाठ कर 881125 रुपए का गबन किया था। जांच मेें इनकी करतूत उजागर होने के बाद रिकव्हरी का मामला 2014 से डीआर के यहां पेंडिंग है।

केस-4
यह मामला वर्ष 2014-15 में सहकारी समिति निवास का है। मामले में आरोप है कि शाखा प्रबंधक विपिन बहादुर सिंह और सहायक प्रबंधक दीनबंधु कुशवाहा ने 755460 का बैंक को चपत लगाई थी। इस मामले में भी फाइल डीआर के यहां चार साल से धूल फांक रही हैं।

इनका कहना है
गबन के मामलों में दस्तावेज एकत्रित हो गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर शीघ्र ही आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
पीके मिश्रा, उपायुक्त सहकारिता विभाग

 

समाचार पर अपनी प्रतिक्रिया यहाँ दें l

ई-पेपर