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लंबोदर के आगमन की तैयारी, तैयार किए मिट्‌टी के गणपति, विसर्जन भी होगा इको फ्रेंडली

लंबोदर के आगमन की तैयारी, तैयार किए मिट्‌टी के गणपति, विसर्जन भी होगा इको फ्रेंडली

डिजिटल डेस्क, नागपुर। पूरा शहर गणेश उत्सव की तैयारी में जुटा है। पर्यावरण का संदेश देने के लिए मिट्टी के गणपति तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए स्कूल, कॉलेज, कॉलोनी, संस्थाओं में प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। गणेश प्रतिमा निर्माण के लिए बरगद, पीपल, नीम सहित कई तरह के बीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि उन्हें प्रतिमा के बीच में रखा जाए और जब गणेश विसर्जन किया जाए तो पौधा तैयार हाे सके। साथ ही फिटकरी के गणपति भी तैयार किए गए हैं, ताकि विसर्जित करने पर तालाब का पानी साफ रहे। शहर में हर गणेश उत्सव की जोरदार तैयारी चल रही है। हर आयु वर्ग के लोग इको फ्रेंडली गणपति बना रहे हैं। शहर की प्रभा भैया ने 108 तरह के गणपति बनाए हैं।

मूर्ति विसर्जन से जल प्रदूषण न हो

मैंने सोचा की फिटकरी के गणपति बनाए जाएं, लेकिन फिटकरी बहुत हार्ड होती है, इसलिए मैंने उसे बारीक कूटकर मिक्सर में पीसा। फिर भी पानी में डालकर बनाना शुरू किया, लेकिन उसे शेप देना मुश्किल हो रहा था। फिर मैंने केमेस्ट्री के एक प्रैक्टिकल को फॉलो करते हुए बिना सांचे के उसे शेप दिया। फिटकरी की गणेश प्रतिमा बनाकर बहुत अच्छा लगा। सोसायटी के सभी लोगों को मिट्टी और शाडू मिट्टी के गणेश बनाना भी सिखाए। फिटकरी से पानी साफ होता है, इसलिए अगले वर्ष फिटकरी के बड़े गणपति बनाएंगे, ताकि मूर्ति विसर्जन से जल प्रदूषण न हो। मैंने 108 चीजों से गणपति बनाए हैं, जिसमें क्रोशिया, ऊन, लाख, डामर, संगमरमर, मखाना, हल्दी, सोंठ, साबुन, पेपर मैश आदि के गणपति हैं। 
-प्रभा भैया, हाउस वाइफ

कॉलेज में बना रहे गणपति
हमारे कॉलेज में हम सभी स्टूडेन्ट इको फ्रेंडली कलर यूज कर गणपति बना रहे हैं। सभी स्टूडेन्ट्स गणपति बनाते समय बहुत उत्साहित हैं। अपने हाथ से बनाए बप्पा को स्थापित करने में बहुत अच्छा लगता है। इस उत्सव में हम अपने मनपसंद की सजावट कर सकते हैं। कई लोग अपने शौक के लिए चॉकलेट गणपति भी बनाने वाले हैं, लेकिन उसे स्थापित नहीं किया जाएगा। हर उत्सव को बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। गणपति उत्सव में हाथ से बनाई प्रतिमा को स्थापित करना बहुत ही अच्छा लगता है।  -वैदेही कनेर, स्टूडेन्ट

पर्यावरण  पर देना होगा ध्यान
पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखना हम सभी का कर्तव्य है। इस बार घर में हाथ से बनाी बाप्पा की मूर्ति की स्थापना करना है। मूर्ति का विसर्जन भी घर में करना है। हमारी कॉलोनी में मिट्टी के गणपति बनाने में सभी महिलाएं जुटी हैं। यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। आज भी हमारी परंपरा और रीति-रिवाज को ध्यान में रखा जा रहा है। मिट्टी के गणपति बनाते समय उसमें विभिन्न पौधों के बीज भी डाले हैं, ताकि उसमें से पौधा तैयार हो सके। पिछले कई सालों से मिट्टी के ही गणेश तैयार करते हैं। सभी ने मिलकर यह  प्रण लिया है कि,  कभी भी प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्ति नहीं बनाएंगे। -शिवानी चतुर्वेदी, हाउस वाइफ

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