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16 सितंबर को खुलेंगे सबरीमाला मंदिर के द्वार,अय्यप्पा स्वामी की होगी परंपरागत पूजा

September 14th, 2018 10:27 IST
16 सितंबर को खुलेंगे सबरीमाला मंदिर के द्वार,अय्यप्पा स्वामी की होगी परंपरागत पूजा

हाईलाइट

  • 16 सितंबर को खुलेंगे सबरीमाला मंदिर के द्वार
  • भक्य्यत करेंगे अय्यप्पा स्वामी की परंपरागत पूजा
  • बाढ़ से मंदिर को 100 करोड़ का नुकसान हुआ

डिजिटल डेस्क, तिरुवनंतपुरम। अय्यप्पा स्वामी के चमत्कारिक सबरीमाला मंदिर के पट 16 सितंबर से खुलने वाले हैं। इस दौरान मलयालम महीने ‘कान्नी’ के दौरान होने वाली पांच दिवसीय परंपरागत पूजा भी की जाएगी। केरल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण मंदिर के पट बंद करने पड़े थे। 

ओनम के दौरान था प्रतिबंध
केरल में आई भीषण बाढ़ के चलते मंदिर की देखरेख करने वाले त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड ने यात्रा पर रोक लगा दी थी। अब एक बार फिर मंदिर के द्वार सभी श्रद्धालुओं  के लिए खुलने वाले हैं। श्रद्धालु अपने निजी वाहनों से निलक्कल आधार शिविर तक पहुंच पाएंगे। केरल राज्य परिवहन की बस लोगों को पंपा नदी के तट तक पहुंचाएंगी जहां से श्रद्धालु मंदिर की यात्रा कर पाएंगे।

21 सितंबर तक होंगे दर्शन 
अय्यप्पा स्वामी के चमत्कारिक सबरीमाला मंदिर के द्वार 16 से 21 सितंबर तक खुले रहेंगे। बाढ़ के कारण बिगड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के बाद टीडीबी के अध्यक्ष एम पद्मकुमार ने कहा कि अय्यप्पा भक्त कान्नी पूजा के दौरान पूजा करने के लिए मंदिर जा सकेंगे।

अयप्पा उत्सव का है विशेष महत्व
केरल के सबरीमालामलई में अयप्पा स्वामी मंदिर स्थित है। इस मंदिर के बारे में भी अनेक मान्यताएं हैं, लेकिन एक खास तरह का चमत्कार है जो हर साल ही यहां होता है। दरअसल, इस मंदिर के पास मकर संक्रांति की रात थोड़ी-थोड़ी देर में एक ज्योति दिखाई देती है। जब ये रोशनी नजर आती है तो इसके साथ कुछ आवाज भी आती है। यह सब घने अंधेरे में होता है, जो किसी आश्चर्य से कम नही है। इस ज्योति को लेकर मान्यता है कि खुद भगवान इसे जलाते हैं। ये एक मकर, देव ज्योति है।यह मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है। अयप्पा उत्सव सबरीमालामलई का प्रमुख उत्सव है।

बाढ़ से मंदिर को 100 करोड़ का नुकसान
केरल हाल ही में आई भीषण बाढ़ से धीरे-धीरे उभर रहा है। केरल की पहचान माने जाने वाले प्रसिध्द सबरीमाला मंदिर को भी बाढ़ के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा है। मंदिर बोर्ड के अनुसार बाढ़  के कारण पंपा नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था, बोर्ड के पास मंदिर को बंद करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं था। इस भीषण तबाही के कारण मंदिर को 100 करोड़ रुपए का नुकसान भी हुआ।


 

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