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म्यूजिक मिस्ट्री, सुनसान पड़े रेगिस्तान में सदियों से सुनाई देता है मधुर संगीत

November 26th, 2017 12:18 IST
म्यूजिक मिस्ट्री, सुनसान पड़े रेगिस्तान में सदियों से सुनाई देता है मधुर संगीत

डिजिटल डेस्क, मोरक्को। ड्रम, गिटार, वायलिन  सहित वे सभी वाद्ययंत्र जिनकी धुन कानों में रस घोल देतीे है। ये अगर आपको सुनाई दे तो कोई आश्चर्य की बात नही है, लेकिन अगर ये आवाजें ऐेेसे रेगिस्तान से आ रही हैं जहां दूर-दूर तक सन्नाटा पसरा हुआ है। इंसान तो क्या कोई जानवर, परिंदा या पानी की एक बूंद भी ना हो तो हैरानी भी होगी और डर भी लगेगा। 

गर्म रेत पर जहां कुछ पल ठहरना भी मुश्किल

मोरक्को के रेगिस्तान में एक या दो नहीं ऐसी कई जगहे हैं। जहां सगीत की मधुर धुन सुनाई देती है। गर्म रेत पर जहां कुछ पल ठहरना भी मुश्किल हो वहां ऐसी आवाजें सचमुच ही हैरानी वाली रहती हैं। ये किस्सा आज या एक दो साल का नहीं, बल्कि दशकों का है। इन रास्तों से जो भी मुसाफिर गुजरता है वह इन आवाजों को सुनता है और जल्दी ही वहां से भागने की कोशिश करने लगता है। 

मार्को पोलो लगाया था भटकते साए का अनुमान

ऐसा भी बताया जाता है कि जब 13वीं शताब्दी में  मार्को पोलो पहली बार चीन पहुंचे थे तो उन्होंने भी आसपास के रेगिस्तानी इलाकों में  ऐसी ही संगीत की मधुर आवाजें सुनीं थीं। तब उन्होंने यहां भटकते साए का अनुमान लगाया था। 

वैज्ञानिकों ने इस जवाब ढूंढ निकाला

अब आपको डरने या हैरान होन की जरूरत नही है वैज्ञानिकों ने इस जवाब ढूंढ निकाला है। उनका कहना है कि रेगिस्तान में रेत के टीले पल भर में बनते व बिगड़ते हैं। इन टीलों के नीचे की जब रेत खिसकती है तो वाइब्रेशन होता है जिससे संगीत जैसी आवाजें निकलने लगती हैं। ये हवा के साथ मिक्स होकर जगह-जगह सुनाई देती हैं। रेत के कणों का आकार भी इसकी मुख्य वजह है। रेत के घनत्व और हवा के रुख से ये आवाजें तेजी से चलती व बदलती रहती हैं। जिसकी वजह से ऐसा संगीत सुनने मिलता है। रेगिस्तान में अवाएं अपना रुख पल-पल बदलती हैं।

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