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यहां चबूतरे पर विराजमान हैं गिरिराज महाराज, देखें VIDEO

BhaskarHindi.com | Last Modified - August 28th, 2017 11:24 IST

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डिजिटल डेस्क, मथुरा। जिस गिरिराज पर्वत को कन्हैया ने अपनी छोटी अंगुली पर उठाया था आज उसके दर्शनों के लिए लाखों-करोड़ों भक्त हर साल पहुंचते हैं। यह मथुरा के पश्चिम में लगभग 21 किमी की दूरी पर यह पहाड़ी स्थित है। यहीं पर गिरिराज पर्वत है जो 4 या 5 मील तक फैला हुआ है। इस पर्वत पर अनेक पवित्र स्थल है। पुलस्त्य ऋषि के श्राप के कारण यह पर्वत एक मुट्ठी रोज कम होता जा रहा है, यहां मौजूद शिला भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां देशी-विदेशी भक्त बड़ी संख्या में देखने मिलते है...

कलयुग में सतयुग के दर्शन करने के समान सुख

गिरिराज महाराज के दर्शन कलयुग में सतयुग के दर्शन करने के समान सुख देते है। यहां अनेक शिलाएं है, उन शिलाओं का प्रत्येक खास अवसर पर श्रृंगार किया जाता है। यहां के एक चबूतरे पर विराजमान गिरिराज महाराज की शिला बेहद दर्शनीय है। महाराज गिरिराज की शिला को अधिक से अधिक सजाने की यहां श्रद्वालुओं में होड़ रहती है।

आरती का दृश्य

लाखों की संख्या में भक्त इस शिला के दर्शनों के लिये आते है। इनकी आरती का दृश्य हर रोज ही मनोहारी होता है। जो व्यक्ति 11 एकादशियों को नियमित रुप से गोवर्धन शिला के दर्शन या पर्वत की परिक्रमा करता हैए उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। 

पौराणिक मान्यता 

गर्ग संहिता में इस पर्वत को गोलोक का मुकुटमणि कहा गया है। पौराणिक मान्यता अनुसार श्री गिरिराजजी को पुलस्त्य ऋषि द्रौणाचल पर्वत से ब्रज में लाए थे। दूसरी मान्यता यह भी है कि जब राम सेतुबंध का कार्य चल रहा था तो हनुमान जी इस पर्वत को उत्तराखंड से ला रहे थे लेकिन तभी देव वाणी हुई की सेतु बंध का कार्य पूर्ण हो गया है तो यह सुनकर हनुमानजी इस पर्वत को ब्रज में स्थापित कर दक्षिण की ओर पुनरू लौट गए। 

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