गोवर्धन पूजा, जानें इसका महत्व

Govardhan worship will take place on the day after Diwali, Know its importance
गोवर्धन पूजा, जानें इसका महत्व
गोवर्धन पूजा, जानें इसका महत्व

डिजिटल डेस्क। दीपावली के ठीक एक‌ दिन बाद यानी कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपाद तिथि को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा की बजाय गोवर्धन की पूजा शुरू करवाई थी। इस दिन गोबर घर के आंगन में गोवर्धन पर्वत की चित्र बनाकर पूजन किया जाता है। इस दिन गायों की सेवा का विशेष महत्व है। गोवर्धन पूजा का श्रेष्ठ समय प्रदोष काल में माना गया है।

महत्व
इस दिन गोबर का गोबर्धन बनाया जाता है इसका खास महत्व होता है। इस दिन सुबह-सुबह गाय के गोबर से गोबर्धन बनाया जाता है। यह मनुष्य के आकार के होते हैं। गोबर्धन तैयार करने के बाद उसे फूलों और पेड़ों का डालियों से सजाया जाता है। गोबर्धन को तैयार कर शाम के समय इसकी पूजा की जाती है। इस पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल, खील, बताशे आदि उपयोग किया जाता है। गोवर्धन में ओंगा यानि अपामार्ग की डालियां जरूर रखी जाती हैं।

पूजा मुहूर्त 
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 28 अक्टूबर  सुबह 09 बजकर 08 मिनट से।
प्रतिपदा तिथि का समापन: 29 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 13 मिनट तक।
सायंकाल पूजा का समय
28 अक्टूबर दोपहर 03 बजकर 26 मिनट से शाम को 05 बजकर 40 मिनट तक।

पूजा विधि
- गोवर्धन पूजा के दिन सुबह शरीर पर तेल की मालिश करके स्नान करना चाहिए। 
- घर के द्वार पर गोबर से प्रतीकात्मक गोवर्धन पर्वत बनाएं। 
- इस पर्वत के बीच में पास में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति रख दें। 
- अब गोवर्धन पर्वत और श्री कृष्ण को विधिन्न प्रकार के पकवानों व मिष्ठानों का भोग लगाएं। 
- साथ ही देवराज इंद्र, वरुण, अग्नि और राजा बलि की भी पूजा करें। 
- पूजा के बाद कथा सुनें। 
- प्रसाद के लिए दही और चीनी का मिश्रण बनाएं और सब में बांटे। 
- इसके बाद ब्राह्मण को भोजन करवाकर उसे दान-दक्षिणा दें।

अन्नकूट
बता दें कि इसी दिन श्रीकृष्ण ने इंद्र का मानमर्दन कर गिरिराज की पूजा की थी। इस दिन मंदिरों में अन्नकूट किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गाय की पूजा करने के बाद गाय पालक को उपहार एवं अन्न वस्त्र देना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। वृंदावन  और मथुरा में इस दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है।

अन्नकूट शब्द का अर्थ
अन्नकूट शब्द का अर्थ होता है अन्न का समूह। विभिन्न प्रकार के अन्न को समर्पित और वितरित करने के कारण ही इस पर्व का नाम अन्नकूट पड़ा है। इस दिन बहुत प्रकार के पक्वान, मिठाई आदि का भगवान को भोग लगाया जाता है।

Created On :   26 Oct 2019 11:38 AM GMT

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