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सरकार ने सही प्लान नहीं बनाया तो खुले में दूध बेचने की तैयारी

सरकार ने सही प्लान नहीं बनाया तो खुले में दूध बेचने की तैयारी

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  राज्य में एक बार उपयोग में लाए जाने वाले प्लास्टिक पर पिछले वर्ष 23 जून को लगाया गया प्रतिबंध कई व्यावहारिक कारणों और प्रशासन की सख्ती के अभाव में अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। प्रशासन की सख्ती के बाद दूध एजेंसी ने इस दिशा में सरकारी एजेंसियों से सफल पायलट प्लान पेश करने की मांग कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि बगैर विकल्प की व्यवस्था के उन पर नियम थोपा गया तो वे पैकेट वापस लेने के बजाए खुला दूध बेचने या पूरा दूध पाउडर बनाने वालों को बेचने का विकल्प अपनाएंगे।  बता दें कि राज्य सरकार अब एक कदम आगे बढ़ाते हुए दूध की प्लास्टिक की थैलियों की सौ फीसदी रिसाइकिल की व्यवस्था चाहती है। इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय पिछले माह कवायद शुरू कर चुका है। पर्यावरण मंत्रालय में राज्य के दूध उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं की बैठक हो चुकी है। बैठक में जहां दूध उत्पादकों ने दूध की प्लास्टिक थैलियों को रिसाइकिल करने के लिए सहमति जताई वहीं, उपभोक्ताओं से प्रत्येक थैली के लिए अतिरिक्त 50 पैसा डिपॉजिट के तौर पर जमा कराने की भी सलाह दी थी। पर्यावरण मंत्री रामदास कदम ने दूध उत्पादकों को अपने परिसर में रिसाइक्लिंग प्लांट शुरू करने की भी अनुमति की पुष्टि करते हुए दावा किया था कि इस काम शुरू हो जाने पर राज्य में सड़कों पर प्लास्टिक के खाली बैग नजर नहीं आएंगे।

प्रति पैकेट पचास पैसे

दूध विक्रेता एजेंसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि दूध का प्रत्येक पैकेट का रिसाइकिल हो। इसके लिए विक्रेता दूध खरीदने वालों से प्रति पैकेट पचास पैसे ले सकते हैं, जो पैकेट वापस आने पर वापस कर दिया जाएगा। 

बिकती हैं एक करोड़ दूध की थैलियां 

राज्य में प्रतिदिन एक करोड़ दूध की थैलियां यानी लगभग 31 टन प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है। इतनी बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की थैलियों के कारण होने वाले प्रदूषण को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है। 

महानंद ने किया एजेंसी से अनुबंध

राज्य की शासकीय दुग्ध एजेंसी महानंद दूध के पैकटों को जमा करने और रिसाइकिल करने के लिए वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम रह रही इंडियन पौल्यूशन कंट्रोल अथाॅरिटी की सेवा ली है। पूरे राज्य में दूध विक्रेताओं के यहां जमा दूध की खाली थैलियों का जमा करने और उन्हें रिकसाइिकल करने का काम आईपीसीए करेगी। उन्होंने इस वर्ष फरवरी से यह व्यवस्था शुरू की है।   

दूध विक्रेता और जनता अनजान

नागपुर में अधिकतर चिल्लर दूध विक्रेता और नागरिक इस व्यवस्था से अनजान हैं। कॉटन मार्केट इलाके में कई दुकानों में विभिन्न ब्रांड की दूध की थैलियों की ब्रिकी होती है। इनमें से किसी भी दुकान में अब भी थैली वापस लेने की व्यवस्था शुरू नहीं हुई है।

पाउडर बनाने वालों को बेच देंगे दूध 

पर्यावरण मंत्रालय के साथ बैठक में भले ही राज्य के दूध उत्पादक और आपूर्तिकर्ता इस व्यवस्था के लिए हामी भर चुके हैं, लेकिन लागू करने में होने वाली परेशानियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं। इस क्षेत्र में अब तक शासकीय दुग्ध एजेंसियां महानंद और आरे मिल्क ने ही पहल की है। महानंद ने वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम कर रही निजी एजेंसी से दूध के पैकेट वापस लेने और उसे रिसाइकिल करने की सेवा ली है। अन्य एजेंसियां सरकार से इस दिशा में सरकारी एजेंसियों से सफल पायलट प्लान पेश करने की मांग कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि बगैर विकल्प की व्यवस्था के उन पर नियम थोपा गया तो वे पैकेट वापस लेने के बजाए खुला दूध बेचने या पूरा दूध पाउडर बनाने वालों को बेचने का विकल्प अपनाएंगे।

नागपुर में शुरू नहीं हुई व्यवस्था

शहर के प्रमुख दूध आपूर्तिकर्ताओं इस संबंध में अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई भी आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। मदर्स डेयरी के घनश्याम कोटेले ने कहा, अब तक कोई सर्कुलर प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि डेयरी इस संबंध में तैयारी कर रही है, यानी अगर नियम लागू होता है तो इसे मानने को तैयारी है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि नियम को लागू करने में कुछ व्यावहारिक परेशानियां हैं, जो लागू किए जाने के बाद ही सामने आएंगी। 
 

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