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शिर्डी संस्थान से कर्ज लेकर सिंचाई परियोजना पूरी करेगी सरकार, कांग्रेस का हल्लाबोल

December 02nd, 2018 23:52 IST
शिर्डी संस्थान से कर्ज लेकर सिंचाई परियोजना पूरी करेगी सरकार, कांग्रेस का हल्लाबोल

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कांग्रेस ने अहमदनगर के निलवंडे सिंचाई परियोजना के लिए श्री साईबाबा ट्रस्ट शिर्डी से बिना ब्याज के 500 करोड़ रुपए के कर्ज लेने के फैसले को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है। सरकार ने निलवंडे सिंचाई परियोजना की नहर के विकास काम के लिए साईबाबा ट्रस्ट शिर्डी से जलसंसाधन विभाग के अधिकार क्षेत्र वाले गोदावरी- मराठवाड़ा सिंचाई विकास महामंडल को 500 करोड़ रुपए कर्ज लेने की अनुमति दी है। इसको लेकर रविवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने सरकार पर हमला बोला। चव्हाण ने आरोप लगाया कि जिस तरीके से मोदी सरकार की नजर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पैसों पर है उसी तरह प्रदेश सरकार साईबाबा मंदिर में भक्तों द्वारा दान किए गए पैसों का इस्तेमाल कर रही है। सरकार का आर्थिक प्रबंधन पूरी तरह से बिगड़ गया है।

भाजपा और शिवसेना सरकार के शासनकाल में महाराष्ट्र कर्ज में डूब गया है। केवल चार सालों में पांच लाख करोड़ से अधिक कर्ज सरकार ने लिया है। सिंचाई परियोजनाओं के लिए सरकार ने तीन सालों के लिए 64 करोड़ रुपए से अधिक संशोधित प्रशासकीय मंजूरी ली गई है। इसलिए जनता को यह पूछने का व्यक्त आ गया है कि महाराष्ट्र को कहां पर लाकर खड़ा कर दिया। चव्हाण ने कहा कि सरकार पेट्रोल और डीजल पर सूखा टैक्स लगा रही है। राज्य के महामार्गों पर शराब की दुकानें बंद किए जाने के कारण सेस लगाकर पैसों की वसूली की जा रही है। जलयुक्त शिवार योजना में घोटाला हुआ है। भूजल सर्वेक्षण में 31 हजार गांवों का जलस्तर मंज गिरावट दर्ज की गई है।

दूसरी ओर सरकार का कहना है कि साईबाबा संस्थान शिर्डी में प्रतिदिन लगभग 60 से 70 हजार भक्त दर्शन के लिए आते हैं। त्यौहार और उत्सव के समय प्रति दिन 3 से 3.50 लाख भक्त मंदिर में आते हैं। शिर्डी और आसपास के परिसर में जलापूर्ति के लिए अतिरिक्त पानी की जरूरत पड़ती है। इसलिए शिर्डी और आसपास के परिसर में पीने के पानी की सुविधा निलवंडे बांध से की जाती है। सरकार के विधि व न्याय विभाग के शासनादेश के अनुसार कर्ज देने को लेकर शिर्डी के साईबाबा संस्थान ट्रस्ट और गोदावरी मराठवाड़ा सिंचाई विकास महामंडल के बीच सामंजस्य करार होगा।

500 करोड़ कर्ज की राशि केवल नए काम के लिए खर्च की जा सकेगी। इसमें से 125 करोड़ रुपए की राशि पहली किस्त के रूप में तत्काल महामंडल को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। यह राशि मिलने के बाद जलसंसाधन विभाग को 2 साल में काम पूरा होगा। आवंटित राशि खर्च करने के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र मिलने के बाद अगली किस्त के पैसे दिए जाएंगे। अंतिम किस्त की राशि वितरित करने के 10 सालों में एक समान किस्तों में जलसंसाधन विभाग को साईबाबा संस्थान को पैसे वापस लौटने होंगे। 
 

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