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गोविंद द्वादशी 27 काे, व्रत की इस विधि से मिलता है वैकुण्ठ धाम

February 16th, 2018 20:15 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गोविंद द्वादशी, कल्याणकारी, रोगों का नाश करने वाली एवं अत्यंत ही फलदायी व मनोवांछित फल प्रदान करने वाली बतायी गई है। गोविंद द्वादशी का व्रत रखने से मनुष्य को गोविंद अर्थात भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। ये व्रत तिथि श्रीहरि को समर्पित है। 


इस व्रत का प्रारंभ प्रातः संकल्प के साथ ही प्रारंभ होता है। इस वर्ष यह 27 फरवरी 2018 को है इसी दिन प्रदोष व्रत अर्थात शिव पूजन का दिन है जिसकी वजह से इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।


व्रत की पौराणिक कथा
इस व्रत की कथा के संबंध में उल्लेख मिलता है कि गोविंद द्वादशी का व्रत एक यादव कन्या ने रखा था जिसके प्रताप एवं पुण्य फल से उसे वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति हुई थी। इस व्रत के संबंध में कन्हैया ने पितामह भीष्म को बताकर यादव कन्या के व्रत एवं इससे मिलने वाले पुण्य प्रताप के संबंध में बताया था। 


करें इन मंत्रों का जाप
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:
ॐ नमो नारायणाय नम:
श्रीकृष्णाय नम:, सर्वात्मने नम:

इन मंत्रों का जाप जातक को व्रत धारण कर पूजन के दाैरान करना चाहिए। इससे व्रत काे पूर्णता प्राप्त होती है।

व्रत का पुण्य फल

इस व्रत को धारण करने वाले के लिए दान, हवन, तर्पण, ब्राम्हणों को दान, यज्ञ आदि का बहुत ही महत्व बताया गया है। गोविंद द्वादशी के संबंध में बताया जाता है कि इस दिन जो भी दान करता है वह साक्षात भगवान विष्णु की कृपा का पात्र बनता है और उसे अंतकाल मंे वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है। इस व्रत के संबंध मंे कहा गया है कि मानव के समस्त पापों नाश कर उसके जीवन में सुख समृद्धि लाने का एकमात्र कारक यह व्रत ही बनता है, किंतु इसके लिए आवश्यक है कि वह इसे धारण करने के उपरांत सभी नियमों और व्रत का विधि-विधान से पालन करे।

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