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एयरपोर्ट तक बना ग्रीन कोरीडोर, लीवर भेजा मुंबई, त्वचा भी कर दी दान

BhaskarHindi.com | Last Modified - July 27th, 2017 15:18 IST

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एयरपोर्ट तक बना ग्रीन कोरीडोर, लीवर भेजा मुंबई, त्वचा भी कर दी दान

दैनिक भास्कर न्यूज़ डेस्क, नागपुर।  एक बार फिर अंगदान के प्रति जागरुक होने का प्रमाण संतरानगरवासियों ने दिया है। यहां से पहला लीवर शनिवार को मुंबई भेजा गया है, जबकि विदर्भ से अंगदान कर कैडेवर ट्रांसप्लांट के लिए 3 लीवर पहले ही भेजे जा चुके हैं। इतना ही नहीं नागपुर से ब्रेन डेड मरीज की दो किडनी, दो आंखों के अलावा त्वचा भी परिजनों ने शनिवार को दान कर दी। परिजनों की इच्छा थी कि हृदय और फेफड़ों का भी उपयोग हो जाए, लेकिन कुछ मेडिकल कारणों से ऐसा नहीं हो सका।

फिर नहीं धड़क सका दिल
मरीज के परिजन हृदय और फेफड़े भी दान करने के लिए तैयार थे, लेकिन नागपुर से कनेक्टीविटी के कारण वह टल गया। इस वजह से दान में मिलने वाला दिल किसी और के शरीर में नहीं धड़क सका। जेडटीसीसी सचिव का कहना है कि हृदय के लिए जिसे चयनित किया गया था, वह हृदय पहुंचने तक जीवित नहीं रह सकता था, इसलिए ऑपरेशन टाल दिया गया। हालांकि फेफड़ों के लिए किसी के पास कोई जवाब नहीं है।

5 मिनट में तय की 4 किमी की दूरी
लीवर को मुंबई भेजने के लिए ऑरेंज सिटी अस्पताल से डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय विमानतल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इस दौरान एंबुलेंस के आगे दो गाड़ियां और पीछे भी गाड़ियां चल रही थीं। 4 किलोमीटर की दूरी ग्रीन कॉरिडोर की मदद से 5 मिनट में तय की गई।

गिरकर बेहोश हो गए थे 
नागपुर के सोमलवाड़ा स्थित नरेन्द्र नगर निवासी विनायक देशकर (67) अपने परिवार के साथ पचमढ़ी घूमने गए थे। 16 जून को वह बाथरूम में नहाने गए और वहीं गिरकर बेहोश हो गए। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए नागपुर के निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। जांच में सामने आया कि मरीज को ब्रेनहैमरेज है। 22 जून को मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगी। न्यूरोसर्जन डॉक्टरों द्वारा जांच के बाद मरीज को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसी के साथ जोनल ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेशन कमेटी सचिव डॉ. रवि वानखेड़े से संपर्क किया गया। पत्नी गायत्री देशकर और पुत्र अनुराग व अभिषेक ने अंगदान करने पर सहमति जताई। 23 जून को मरीज को सुबह ऑरेंज सिटी अस्पताल लाया गया। नियमानुसार प्रक्रिया शुरू की गई। लीवर के लिए मुंबई के ग्लोबल अस्पताल को चुना गया। लीवर शाम 4 बजे से निकालना शुरू हुआ। इसके लिए अस्पताल से एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और शाम 5.45 बजे जेट एयरवेज के विमान से मुंबई भेजा गया। इसके बाद किडनी निकालने का सिलसिला शुरू हुआ, जिसे वोक्हार्ट अस्पताल और दूसरे केयर अस्पताल को दी गई। आंखें महात्मा आई बैंक और त्वचा ऑरेंज सिटी अस्पताल को दी गईं।

इन डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा
डॉ. देवयानी बुचे, डॉ. आर. अटल, डॉ. वसंत डांगरा ने अंगदान के लिए जांच एवं कागजी तैयारी की। डॉ. अनूप मरार ने ग्रीन कॉरिडोर के लिए पुलिस से संपर्क किया। मुंबई ग्लोबल हॉस्पिटल के लीवर सर्जन डॉ. रवि मोहनका लीवर लेने नागपुर आए। इसके अतिरिक्त अन्य डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हम तो सारे अंगदान करना चाहते थे
मैं अपने पिता के सारे अंगदान करना चाहता था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जिससे हृदय और फेफड़े बेकार चले गए। इस बात का दु:ख हमें हमेशा रहेगा। मेरी माँ ने अंगदान का निर्णय लिया था, इससे सभी को बुरा लगा। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे सभी अंगों का उपयाेग हो सके। अनुराग देशकर, अंगदाता का पुत्र  हार्ट ट्रांसप्लांट टला  लीवर मुंबई भेज दिया गया। दोनों किडनियां शहर के ही दोनों अस्पतालों को दे दी गईं, जबकि नेत्र एवं त्वचा को भी शहर के ही अस्पतालों को दिया गया। दिल्ली में हार्ट भेजने की बात चल रही थी, लेकिन मरीज के स्वास्थ्य की स्थिति की वजह से वह टल गया। फेफड़ों के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी।

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