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10 लाख से अधिक वाली कारों की कीमत फिर बढ़ेगी, जानें वजह

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 04th, 2019 19:59 IST

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10 लाख से अधिक वाली कारों की कीमत फिर बढ़ेगी, जानें वजह

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हर किसी का कार खरीदने का सपना होता है, इनमें अधिकांश लोग छोटी कारों को पसंद करते हैं, जिनकी कीमत 3 से 5 लाख रुपए तक होती है। वहीं कई लोग पावरफुल और शानदार फीचर्स वाली कार पसंद करते हैं। इनकी कीमत 8 से 15 लाख रुपए तक पहुंचती है। यदि आप भी 10 लाख रुपए से अधिक बजट की कार खरीदी का मन बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल भारतीय बाजार में बिकने वाली 10 लाख रुपए से अधिक कीमत की गाड़ियां अब महंगी हो सकती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स का हालिया निर्देश माना जा रहा है। 

ऐसे भरना होगा GST
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार ने कहा है कि GST सिर्फ सामान के दाम नहीं, बल्कि इनवॉयस वैल्यू और इनकम टैक्स में टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स (TCS) दोनों को मिलाकर निकलने वाली राशि पर लगेगा। इसका सीधा मतलब ये कि कस्टमर्स को GST, ऑटो डीलर की तरफ से कलेक्ट किए जाने वाले टैक्स के हिसाब से भी भरना होगा। सरकार के इस निर्देश का असर मिनरल और कोल सेक्टर के अलावा टेलीकॉम सेक्टर में भी पड़ेगा। खासतौर पर उन सेगमेंट्स पर, जिन्हें स्क्रैप पर लगने वाले GST और TCS से डील करना पड़ता है। दरअसल TCS 10 लाख रुपए से अधिक कीमत वाले ऑटोमोबाइल्स पर TCS उसके एक्स शोरूम प्राइस पर 1% के हिसाब से लगता है और उसमें भी GST शामिल होता है और इसमें भी GST शामिल होता है। 

सप्लाई पर TCS
वहीं इनकम टैक्स लॉ के मुताबिक, कुछ सामान के सप्लायर्स को अपनी सप्लाई की पेमेंट मिलने के समय स्क्रैप जैसे आइटम्स पर TCS वसूल करने की जिम्मेदारी होती है। जिस सप्लाई पर TCS वसूल किया जाना होता है, उसका खरीदार इनकम टैक्स लाइबिलिटी के पेमेंट के वक्त उस पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकता है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक GST के लिहाज से टैक्सेबल वैल्यू में इनकम टैक्स ऐक्ट के प्रोविजन्स के हिसाब से वसूल किए जाने वाले TCS को शामिल किया जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि बायर की ओर से सप्लायर को चुकाई जाने वाली राशि में TCS शामिल होगा।
 
एक्सपर्ट्स की मानें तो इस क्लैरिफिकेशन का ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर नेगेटिव असर दिखाई देगा। इसका कारण कस्टमर का खरीद दाम बढ़ जाना है। इसके अलावा TCS को सामान की बिक्री से हासिल रकम नहीं माना जाता है, बल्कि यह बायर की तरफ से इनकम टैक्स कलेक्शन होता है। ऐसे में इस पर GST लगाया जाना सही नहीं है। 
 

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