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गांवों के रास्ते से होकर गुजरात की सत्ता तक पहुंचेगी कांग्रेस ? 

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 17th, 2017 23:45 IST

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डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो चुकी है। नतीजे 18 दिसंबर को घोषित होंगे, लेकिन धड़कनें अभी से तेज हो गई हैं। न सिर्फ गुजरात में चुनाव लड़ रही पार्टियों की, बल्कि पूरे देश की जनता। इसकी वजह है कि गुजरात विधानसभा चुनावों को 2019 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। एक तरफ बीजेपी जहां एक बार फिर से अपनी सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त है, वहीं कांग्रेस 22 सालों बाद राज्य में अपनी वापसी की उम्मीद देख रही है। गुजरात पीएम मोदी का गढ़ है, यहां उन्होंने 12 सालों तक एकतरफा राज किया है और पिछले 22 सालों से बीजेपी यहां सत्ता में है। इस बार के चुनाव उतने आसान नहीं है, जितने हर बार रहते थे। भले ही बीजेपी और कांग्रेस अपनी जीत का दावा कर रहे हों, लेकिन उसके बावजूद यहां पर मुकाबला इस बार तगड़ा होने वाला है। अगर पिछले चुनावों और इस बार के ओपिनियन पोल्स पर नजर डालें तो बीजेपी इस बार भी शहरी इलाकों में मजबूत स्थिति में है, वहीं कांग्रेस का वोट शेयर ग्रामीण इलाकों में पहले से काफी बढ़ा है। गुजरात विधानसभा की 182 सीटों में से 98 सीटें ऐसी हैं, जो ग्रामीण इलाकों में आती है। जबकि राज्य में जादुई आंकड़ा 92 सीटों का है। ऐसे में अगर इन सभी सीटों को जीत लिया जाए, तो राज्य में आसानी से सरकार बनाई जा सकती है। माना जा रहा है कि कांग्रेस ग्रामीण इलाकों में काफी मजबूत हुई है, तो क्या माना जाए कि गांव के रास्ते से होकर गुजरात की सत्ता तक पहुंचने की कोशिश कर रही है?


4 क्षेत्रों में बंटा है गुजरात

गुजरात को 4 क्षेत्रों में बांटा गया है- नॉर्थ गुजरात, सौराष्ट्र-कच्छ, सेंट्रल गुजरात और साउथ गुजरात। राज्य की 182 सीटों में से नॉर्थ गुजरात में 53 सीट और सौराष्ट्र-कच्छ में 54 सीटें आती हैं। वहीं सेंट्रल गुजरात में 40 सीटें हैं, जबकि साउथ गुजरात में 35 सीटें शामिल हैं। बता दें कि पिछले यानी 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इस वक्त गुजरात विधानसभा में बीजेपी के 114, कांग्रेस के 61 और अन्य के खाते में 6 सीटें हैं।

ग्रामीण इलाकों में मजबूत है कांग्रेस 

गुजरात की 182 विधानसभा सीटों में से 98 सीट ऐसी हैं, जो ग्रामीण इलाकों में आती है। ये सभी सीटें राज्य में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। अगर इन 98 सीटों में से 80-85% सीटों पर भी कब्जा कर लिया जाए, तो राज्य में सरकार बनाई जा सकती है। वहीं अगर ग्रामीण इलाकों में कोई कमजोर है, तो राज्य में सरकार तो बनाई जा सकती है, लेकिन वोट शेयर और सीटें उम्मीद से भी कम मिल सकती है। वोटिंग से पहले आए ओपिनियन पोल्स में कांग्रेस की पकड़ ग्रामीण इलाकों में काफी मजबूत मानी जा रही है, जबकि बीजेपी अब भी शहरी इलाकों में बढ़त बनाए हुए हैं। आइए जानते हैं ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस कितनी मजबूत है?



नॉर्थ गुजरात

नॉर्थ गुजरात में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा है। हालांकि, 2012 के चुनावों में बीजेपी ने इस इलाके की 53 सीटों में से 32 सीटें जीती थी। जबकि कांग्रेस 21 सीटों पर कब्जा कर पाई थी। पिछले चुनावों में कांग्रेस भले ही बीजेपी से पीछे रही हो, लेकिन इस बार आसार बदलने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस बीजेपी को कड़ी टक्कर दे सकती है। 

ग्रामीण इलाके : चुनावों से पहले आए ओपिनियन पोल्स के मुताबिक, नॉर्थ गुजरात के ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस को फायदा होते दिख रहा है। गांवों में कांग्रेस का वोट शेयर जहां 56% रहने का अनुमान है, वहीं बीजेपी को 41% वोट मिलने की बात कही गई है। 

शहरी इलाके : नॉर्थ गुजरात के शहरी इलाकों की बात करें, तो यहां बीजेपी फायदे में है। बीजेपी जहां 50% वोट शेयर के साथ आगे है, वहीं कांग्रेस को शहरों में 41% वोट मिलने का अनुमान है।

सौराष्ट्र कच्छ

ये इलाका हमेशा से बीजेपी का गढ़ माना जाता है। गुजरात में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल भी इसी इलाके से आते हैं। हालांकि इस बार पटेलों में बीजेपी को लेकर कुछ नाराजगी है, लेकिन पिछले 22 सालों से बीजेपी ने इस इलाके में कांग्रेस को बहुत पीछ छोड़ रखा है। 2012 के चुनावों में बीजेपी ने यहां की 54 में से 35 सीटों पर कब्जा किया था, जबकि कांग्रेस सिर्फ 16 सीटों पर ही जीत पाई थी। हालांकि इस बार पटेल आंदोलन की वजह से समीकरण बदल सकते हैं। 

ग्रामीण इलाके : ओपिनियन पोल्स के मुताबिक, सौराष्ट्र-कच्छ के ग्रामीण इलाकों में भी कांग्रेस फायदे में दिख रही है। गांवों में कांग्रेस का वोट शेयर जहां 49% रहने का अनुमान जताया गया है, वहीं बीजेपी को 43% वोट मिलने की बात कही गई है। 

शहरी इलाके : सौराष्ट्र-कच्छ के शहरी इलाकों में बीजेपी को भारी बढ़त मिलने की बात कही गई है। शहरी इलाकों में बीजेपी का वोट शेयर 46% है, तो वहीं कांग्रेस को सिर्फ 30% वोट मिलता दिखाई दे रहा है।



सेंट्रल गुजरात 

सेंट्रल गुजरात में विधानसभा की 182 सीटों में से 40 सीटें यहां पर है। पिछले बार के यानी 2012 के विधानसभा चुनावों में नॉर्थ गुजरात में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला काफी करीबी पर आकर खत्म हुआ था। पिछली बार 40 में से 22 सीटें जहां बीजेपी को मिली थी, वहीं कांग्रेस ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सेंट्रल गुजरात में वड़ोदरा जिला आता है, यहां पर नोटबंदी और जीएसटी का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। इसलिए इसका फायदा इस बार कांग्रेस को मिलने का अनुमान है। 

ग्रामीण इलाके : इस बार के ओपिनियन पोल्स के मुताबिक, सेंट्रल गुजरात के ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस बीजेपी से थोड़ी सी आगे दिख रहा है। गावों में वोट शेयर की बात करें तो कांग्रेस को 47% और बीजेपी को 43% वोट शेयर मिलता दिख रहा है। 

शहरी इलाके : सेंट्रल गुजरात के शहरी इलाकों में भी बीजेपी का दबदबा कायम है। ओपिनियन पोल्स में बीजेपी को शहरों में 35% वोट शेयर तो कांग्रेस को 20% वोट शेयर मिलने की बात कही गई है।

साउथ गुजरात

साउथ गुजरात में पिछले कई सालों से बीजेपी का एकतरफा राज रहा है। साउथ गुजरात में 35 सीटें आती है। पिछले विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने यहां की 28 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ 6 सीटें ही आई थी। हालांकि, साउथ गुजरात के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस का दबदबा रहा है, लेकिन वो अब तक इस दबदबे को सीट में तब्दील नहीं कर पाई है, लेकिन इस बार हालात बदले नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि साउथ गुजरात में कारोबारी बीजेपी सरकार से नाराज चल रहे हैं, जिसका फायदा कांग्रेस को हो सकता है। 

ग्रामीण इलाके : हाल ही में आए ओपिनियन पोल्स में साउथ गुजरात के ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है। बीजेपी के हिस्से में जहां 44% वोट शेयर जा रहा है, वहीं कांग्रेस को 42% वोट शेयर मिलने की बात कही गई है। 

शहरी इलाके : साउथ गुजरात में बीजेपी शहरी इलाकों में कमजोर होती दिख रहा है। यहां के शहरों में कांग्रेस को पसंद किया जा रहा है। ओपिनियन पोल्स के मुताबिक, शहरी इलाकों में बीजेपी के खाते में सिर्फ 36% वोट शेयर और कांग्रेस के खाते में 43% वोट शेयर जाता दिख रहा है।



आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस मजबूत

गुजरात के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस हमेशा से पहली पसंद रही है। भले ही कांग्रेस पिछले 22 सालों से गुजरात में सत्ता से बाहर चल रही हो, लेकिन फिर भी ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में पार्टी काफी मजबूत स्थिति में है। राज्य की 182 सीटों में से 98 सीटें इसी इलाके से आती है। 2012 के चुनावों में ग्रामीण इलाकों की इन 98 सीटों में से 49 सीटें कांग्रेस ने जीती थी, जबकि बीजेपी सिर्फ 44 सीटों पर ही जीत पाई थी। पिछले चुनावों में कांग्रेस को जहां 42.9% वोट मिले थे, वहीं बीजेपी का वोट शेयर 42.1% रहा था। ऐसे में अगर इस बार ओपिनियन पोल्स सही साबित होते हैं और कांग्रेस को ग्रामीण इलाकों में बीजेपी से ज्यादा वोट शेयर मिलता है, तो कांग्रेस बीजेपी को कड़ी टक्कर दे सकती है। वहीं आदिवासी बहुल इलाकों में भी कांग्रेस बीजेपी से काफी आगे रही है। इन इलाकों में भी कांग्रेस सीट और वोट शेयर के मामलों में बीजेपी से आगे है। पिछले चुनावों में अनुसूचित जनजाति वाले इलाकों में कांग्रेस का वोट शेयर 45.3% रहा था, जबकि बीजेपी का वोट शेयर 40.2% था। बता दें कि राज्य की आबादी का 15% हिस्सा जनजातियों का है। 

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