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क्या आपने कभी खाई है लाल चीटियों की चटनी? यहां खाते हैं लोग

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 13th, 2017 16:50 IST

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डिजिटल डेस्क, ब्राजीलिया। चापड़ा, नाम थोड़ा अजीब है, लेकिन बताया जाता है कि इसका स्वाद खाने में सबसे ज्यादा अलग और स्वादिष्ट है। यह अनोखी किस्म की चीज ओडिशाए छत्तीसगढ़ए झारखंड राज्यों के घने जंगलों वाले आदिवासी इलाको में खाई जाती है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये है क्या चीज।  

स्वादिष्ट चटनी का नाम है चापड़ा

दरअसल, ये एक तरह की चटनी है जो आदिवासी इलाकों में विशेष रूप से पकाई जाती है। वह भी चीटियों से। आदिवासी लाल रंग की चीटियों को इकट्ठा करते हैं उसके बाद उनकी चटनी बनाकर खाते हैं। स्थानीय भाषा में इस स्वादिष्ट चटनी का नाम है चापड़ा।

एक बात और जानकर आपको हैरानी होगी, आदिवासी इसे स्वयं तो खाते ही है साथ ही इसे मार्केट में बेचकर अच्छी कमाई भी करते हैं। ये एक तरह की स्पेशल चटनी है जो बड़े ही जतन से बनायी व खायी जाती है। 

 
कैसे बनाते हैं ऐसी चटनी
साल के पेड़ इन इलाकों में बहुतायत पाए जाते हैं। इन्हीं पेड़ों पर पायी जाती हैं ये भयानक लाल चीटियां। आदिवासी पहले इन्हें एकत्रित करते हैं बाद में उन्हें पीसा जाता है। इसमें स्वाद के अनुसार मिर्ची और नमक भी डाला जाता है। फिर इसे दूसरे व्यंजनों के साथ बड़े ही चाव से खाया जाता है। इसका स्वाद चटपटा होता है। 

प्रोटीन का स्रोत

विशेषज्ञ मानते हैं फार्मिक एसिड होने की वजह से इसका स्वाद चटपटा लगता है। ये एक तरह का प्रोटीन का स्रोत भी है। आदिवासी इस मामले में मानते हैं कि इससे डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियां ठीक हो जाती हैं। साथ ही कई तरह की बीमारियों में भी आराम मिलता है। यह चटनी विशेष अवसरों पर विशेष रूप से बनायी जाती है। यह इनके खास व्यंजनों में शामिल है। फलों के बगीचों में इन चीटियों को छोड़ा जाता है। इनके डर से फलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट दूर रहते हैं।

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