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हाईकोर्ट : सिर्फ आरोपी होना नौकरी से निलंबन का आधार नहीं, दूसरे मामले में कुत्ते को कुचलने वाले को नौ साल बाद राहत

हाईकोर्ट : सिर्फ आरोपी होना नौकरी से निलंबन का आधार नहीं, दूसरे मामले में कुत्ते को कुचलने वाले को नौ साल बाद राहत

डिजिटल डेस्क, मुंबई। किसी आपराधिक मामले में महज आरोपी होना किसी व्यक्ति के नौकरी से निलंबन का आधार नहीं हो सकता है, बशर्ते अपराध का स्वरुप नैतिक दृष्टि से इतना गंभीर नहीं होना चाहिए की इससे जन विश्वास हिल जाए। बांबे हाईकोर्ट ने एक शिक्षक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया। शिक्षक के छोटे भाई की पत्नी की जलने से मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर 25 नवंबर 2011 को उसे गिरफ्तार किया था। फरवरी 2012 में शिक्षक को जमानत मिल गई। लेकिन इससे पहले सेवा नियमों के तहत स्कूल प्रबंधन ने शिक्षक को नौकरी से निलंबित कर दिया। जमानत मिलने के बाद शिक्षक ने स्कूल से संपर्क किया। लेकिन उसे वहां पर न तो काम दिया गया और न ही बकाया वेतन का भुगतान किया गया। इसके बाद शिक्षक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नांदराजोग व न्यायमूर्ति एनएम जामदार की खंडपीठ के सामने शिक्षक की याचिका पर सुनवाई हुई। मामले से जुड़े तथ्यों पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि महज किसी आपराधिक मामले में आरोपी होना किसी व्यक्ति के नौकरी से निलंबन का आधार नहीं हो सकता, बशर्ते अपराध का स्वरुप नैतिक दृष्टि से इतना गंभीर नहीं होना चाहिए की इससे जन विश्वास हिल जाए। लेकिन जब व्यक्ति को सेवा से निलंबित किया जाए उसे उचित भत्ता प्रदान किया जाए। खंडपीठ ने कहा कि याचिका में काफी संक्षिप्त में अधूरे तथ्य हैं। इसलिए उप शिक्षा निदेशक इस मामले को लेकर शिक्षक के निवेदन पर विचार करे और 6 सप्ताह के भीतर उचित निर्णय ले। शिक्षा निदेशक याचिकाकर्ता के वेतन भुगतान से जुड़े पहलू पर भी विचार करे। यह निर्देश देते हुए खंडपीठ ने याचिका को समाप्त कर दिया। 

कुत्ते को कार कुचलने वाले को नौ साल बाद हाईकोर्ट से मिली राहत

इसके अलावा कुत्ते को कार से घायल करने के मामले में आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे एक शख्स को बांबे हाईकोर्ट से राहत मिली है। महानगर की वाकोला पुलिस ने हाउसिंग सोसायटी परिसर में आवारा कुत्ते को कार से ठोकर मारने को लेकर आरोपी फारुख रंगारिया के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 428 के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर कोर्ट में आरोपपत्र दायर किया था। जिसे रद्द करने की मांग को लेकर रगारिया ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सोसायटी की सचिव ने इस मामले में 17 मई 2010 को वाकोला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पुलिस ने गवाहों से पूछताछ में पाया कि 8 मई 2010 को आरोपी रंगारिया स्कार्पियो कार से बाहर से आ रहे थे। जब वे सोसाइटी के गेट के करीब पहुंचे तो उन्होंने कार की रफ्तार बढा दी। इससे पहले सोसाइटी परिसर में पहले से दो आवारा कुत्ता बैठे थे। कार की अवाज सुनकर एक कुत्ता भाग गया जबकि दुसरा कुत्ता नहीं भाग पाया। इसके चलते उसे कार की ठोकर लग गई जिससे वह बुरी तरह जख्मी हो गया। कुत्ते को जख्मी हालत में देखकर सोसायटी के लोगों ने उसे प्राणियों के अस्पताल में पहुंचाया। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बांद्रा कोर्ट में आरोपपत्र दायर किया। न्यायमूर्ति आरवी मोरे व न्यायमूर्ति भारती डागरे की खंडपीठ के सामने इस मामले की सुनवाई हुई। मामले से जुड़े तथ्यों  व आरोपपत्र पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि इस प्रकरण को लेकर पुलिस ने जिस धारा के तहत आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उस धारा के तहत आरोपी के खिलाफ मामला नहीं बनता है। क्योंकि मामले से जुड़े सबूत यह नहीं दर्शाते है कि आरोपी ने कुत्ते को मारने के आशय से उसे ठोकर मारी थी। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने सिर्फ सुनी-सुनाई बातो के आधार पर शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत घटना के सात दिन बाद दर्ज कराई गई है।  पुलिस ने सोसायटी के सचिव का बयान भी नहीं दर्ज किया है। ऐसे में इस प्रकरण को जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। यह कहते हुए खंडपीठ ने आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले व आरोपपत्र को रद्द कर दिया।। 
 

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