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सहायक वन संरक्षक की याचिका खारिज, चलेगा अनुपातहीन संपत्ति का मामला

सहायक वन संरक्षक की याचिका खारिज, चलेगा अनुपातहीन संपत्ति का मामला

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। हाईकोर्ट ने शहडोल जिले में पदस्थ सहायक वन संरक्षक के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति के मामले में अभियोजन स्वीकृति दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस सुजय पॉल और जस्टिस बीके श्रीवास्तव की युगल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि विधि और विधायी कार्य विभाग को अभियोजन स्वीकृति देने का अधिकार है। अभियोजन स्वीकृति के लिए मूल विभाग की स्वीकृति जरूरी नहीं है। 

अभियोजन की स्वीकृति वन विभाग से ली जाना चाहिए

शहडोल के सोहागपुर में पदस्थ सहायक वन संरक्षक चंद्रसेन वर्मा की ओर से दायर याचिका में कहा कि वर्ष 2011 में लोकायुक्त ने उसके खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति का मामला दर्ज किया था। विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने लोकायुक्त की विशेष स्थापना शाखा को 3 अक्टूबर 2011 को अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर दी। याचिका में कहा गया कि वह वन विभाग में पदस्थ है। इसलिए अभियोजन की स्वीकृति वन विभाग से ली जाना चाहिए। लोकायुक्त ने इस मामले में विधि और विधायी कार्य विभाग से अभियोजन की स्वीकृति ली है। इसलिए अभियोजन की स्वीकृति को निरस्त किया जाए। लोकायुक्त की ओर से अधिवक्ता सत्यम अग्रवाल ने तर्क दिया कि कानून में विधि और विधायी विभाग को अभियोजन की स्वीकृति देने का अधिकार दिया गया है। विधि और विधायी विभाग ने विधि सम्मत तरीके से अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की है। सुनवाई के बाद युगल पीठ ने याचिका खारिज कर दी है।

सेंट्रल यूनिवर्सिटी सागर से शपथ-पत्र पर जवाब-तलब

हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस आरएस झा और जस्टिस विजय शुक्ला की युगल पीठ ने बीएड में नियम विरूद्द्ध तरीके से प्रवेश दिए जाने के मामले में डॉ. हरी सिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी सागर से शपथ-पत्र पर जवाब मांगा है। युगल पीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता का पक्ष सुनने के बाद दिया है। नर्मदा शिक्षा महाविद्यालय जबलपुर की ओर से प्रस्तुत याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि बीएड की काउंसलिंग राज्य सरकार द्वारा निर्धारित एमपी ऑनलाइन के जरिए किया जाए। अधिवक्ता मुकुंददास माहेश्वरी ने तर्क िदया कि डॉ. हरी सिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी सागर द्वारा अलग से वेबसाइट बनाकर बीएड में प्रवेश दिया जा रहा है, जो हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना है। सुनवाई के बाद युगल पीठ ने यूनिवर्सिटी को शपथ- पत्र के साथ जवाब पेश करने का आदेश दिया है।
 

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