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Election 2019

हाईकोर्ट: भाजपा विधायक सुरेन्द्र पटवा को नोटिस, चुनाव याचिका पर चार सप्ताह में मांगा जवाब

हाईकोर्ट: भाजपा विधायक सुरेन्द्र पटवा को नोटिस, चुनाव याचिका पर चार सप्ताह में मांगा जवाब

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। हाईकोर्ट ने भोजपुर के भाजपा विधायक सुरेन्द्र पटवा, चुनाव आयोग और भोजपुर के रिटर्निंग ऑफिसर को नोटिस जारी किया है। जस्टिस जेपी गुप्ता की एकल पीठ ने अनावेदकों को चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है।

यह कहा गया दायर याचिका में-
भोजपुर विधानसभा से कांग्रेस के पराजित प्रत्याशी सुरेश पचौरी की ओर से दायर चुनाव याचिका में कहा गया कि भाजपा विधायक सुरेन्द्र पटवा ने शपथ-पत्र में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी दी है। याचिका में कहा गया कि पिछले विधानसभा चुनाव में पटवा ने 1983 में स्नातक होने की जानकारी दी है। इस बार शपथ-पत्र में वर्ष 1984 में स्नातकोत्तर होने की जानकारी दी है। याचिका में कहा गया कि कोई व्यक्ति एक साल में स्नातकोत्तर डिग्री कैसे हासिल कर सकता है।

वीडियो भी किया पेश-
याचिका में कहा गया कि शपथ-पत्र में बैंक की बकाया राशि के बारे में भी गलत जानकारी दी गई है। कई मतदान केन्द्रों में ईवीएम और वीवीपेट की मतगणना में अंतर पाया गया, लेकिन रिटर्निंग अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिका के साथ एक वीडियो भी पेश किया गया है कि जिसमें भाजपा प्रत्याशी अपने लोगों से 10-10 वोट डालने की बात कह रहे है। अधिवक्ता अमित सिंह और अतुल जैन के तर्क सुनने के बाद एकल पीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।

एटीएम का क्लोन बनाकर रुपए निकालने वाले की जमानत खारिज-
दिनांक 7-1-19 को प्रार्थी लक्ष्मी नारायण साहू ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके एसबीआई बैंक के अकाउंट से अज्ञात व्यक्ति ने एटीएम का क्लोन बनाकर1,16,500 रुपए निकाल लिए हैं, जिसकी रिपोर्ट फरियादी ने थाना गढ़ा के अपराध क्रमांक 26/19 धारा 420 भादवि में दर्ज कराया विवेचना के दौरान धारा 467, 468, 471, 474, 380, 34, 120 बी भादवि एवं धारा 66 सी 66 बी 43 आईटी एक्ट का इजाफा किया गया।

प्रकरण में आरोपी थाना ओमती के अपराध क्रमांक 20 /19 दिनांक 8 /5/19 को गिरफ्तार किए गए वह इस प्रकरण में दिनांक 11/05/ 19 को गिरफ्तारी की गई और आरोपी बजरंग और कुलदीप को माननीय न्यायालय वरुण पुनासे न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी के समक्ष पेश किया गया। आरोपी में अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत आवेदन पेश किया, जिस पर अभियोजन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी वर्षा मेहता द्वारा शासन की ओर से विरोध प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखते हुए जमानत का विरोध किया सहायक जिला अभियोजन अधिकारी वर्षा मेहता के तर्क देते हुए कहा कि आरोपी को यदि जमानत का लाभ दिया जाता है तो समाज में न्याय के विरुद्ध विपरीत संदेश पहुंचेगा न्यायालय ने अभियोजन द्वारा व्यक्त किए गए तर्कों से सहमत होते हुए व अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आरोपीयों की जमानत निरस्त कर आरोपीगण को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।

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