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हाईकोर्ट : किटनाशकों बिक्री मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, अभिनेता बिचकुले को भी नहीं मिली राहत

हाईकोर्ट : किटनाशकों बिक्री मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, अभिनेता बिचकुले को भी नहीं मिली राहत

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने फसलों में लगनेवाले कीडों को मारने के लिए बनाए जानेवाले कीटनाशकों को निर्माता द्वारा कई एजेंसियों के माध्यम से अलग-अलग ब्रांड के नाम से बेचने पर प्रतिबंध लगाने वाले राज्य सरकार के निर्णय पर रोक लगा दी है। कीटनाशक की ब्रिक्री से जुड़े सरकार इस निर्णय के खिलाफ क्रॉप केयर फेडरेशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति अकिल कुरेशी व न्यायमूर्ति एसजे काथावाला की खंडपीठ के सामने इस याचिका पर सुनवाई हुई। मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि इनसेक्टीसाइड कानून का कोई भी प्रावधान कीटनाशक के निर्माता को अपने उत्पाद को अलग-अलग ब्रांड नेम से कई एजेंसियों के माध्यम से बेचने से नहीं रोकता है। इसलिए कीटनाशको को कई एजेंसियों के मार्फत अलग-अलग ब्रांड से बेचने पर प्रतिबंध लगानेवाले सरकार के फैसले पर रोक लगाई जाती है लेकिन कीटनाशक निर्माता व इसे बेचनेवाले लोगों को इनसेक्टिसाइट कानून के सभी प्रावधानों का पालन करना पड़ेगा। सरकारी अधिकारी इस कानून का कडाई से पालन सुनिश्चित करे। अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारी किटनाशकों की जांच पड़ताल के लिए स्वतंत्र हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कहा कि काफी समय से यह परम्परा रही है कि कीटनाशक निर्माता अपने उत्पाद को कई एजेंसियों के माध्यम से अलग-अलग नाम से बेचते हैं। लेकिन अब सरकार ने इस पर रोक लगा दी है। जबकि महाराष्ट्र के अलावा किसी और दूसरे राज्य में ऐसा नहीं है। कीटनाशक निर्माता व इसे बेचनेवाले लोग सभी नियमों का पालन करते हैं। वहीं सरकारी वकील ने कहा कि कीटनाशक के लेबल में किए जानेवाले बदलाव के मद्देनजर सरकार ने उपरोक्त नियम बनाया है। खंडपीठ ने सरकारी  वकील की दलीलों को अस्वीकार करते हुए सरकार के फैसले पर रोक लगा दी। इस पर सरकारी वकील ने खंडपीठ से अपने इस फैसले पर रोक लगाने का आग्रह किया ताकी वे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके। खंडपीठ ने सरकारी वकील के इस आग्रह को स्वीकार कर लिया। और अपने फैसले पर चार सप्ताह तक के लिए स्टे लगा दिया। 

बेस्ट बस विस्फोट मामला : आरोपी के खिलाफ अपील प्रलंबित रहने पर पासपोर्ट देने से नहीं कर सकते इंकार

उधर बांबे हाईकोर्ट ने कहा है कि निचली अदालत से बरी किए गए आरोपी के खिलाफ अपील प्रलंबित होने की स्थिति में पासपोर्ट जारी करने से कोई दिक्कत पैदा नहीं होती है। यह बात कहते हुए हाईकोर्ट ने पासपोर्ट कार्यालय को घाटकोपर की बेस्ट बस में हुए धमाका मामले में बरी किए गए आरोपी अब्दुल मतीन को पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया है। इससे पहले पासपोर्ट कार्यालय आरोपी मतीन की रिहाई के खिलाफ अपील प्रलंबित होने के आधार पर उसके पासपोर्ट के आवेदन पर विचार नहीं कर रहा था। इसके बाद मतीन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति इंद्रजीत महंती व न्यायमूर्ति एएम बदर की खंडपीठ के सामने मतीन की याचिका पर सुनवाई हुई। आवेदन में मतीन ने कहा था कि उसे सउदी अरब जाना था इसलिए उसने पासपोर्ट कार्यालय में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। याचिका के अनुसार पोटा कोर्ट ने 11 जून 2005 को संदेह का लाभ देते हुए आरोपी मतीन सहित मामले से सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। आरोपियों की रिहाई के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की है, जो अभी भी सुनवाई के लिए उपरी अदालत में प्रलंबित है। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कहा कि पोटा कोर्ट ने मेरे मुवक्किल को सभी आरोपों बरी कर दिया है। रिहाई के खिलाफ अपील प्रलंबित है सिर्फ इस आधार पर मेरे मुवक्किल के पासपोर्ट के आवेदन को प्रलंबित रखा गया है। वहीं सरकारी वकील ने आरोपी मतीन की मांग का विरोध किया। याचिका में उल्लेखित तथ्यों पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि पोटा कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया है। ऐसे में यदि उसे पासपोर्ट जारी किया जाता है तो इससे कोई दिक्कत पैदा नहीं होगी। लिहाजा पासपोर्ट कार्यालय याचिकाकर्ता को पासपोर्ट जारी करे। गौरतलब है कि साल 2002 में घाटकोपर में हुए बम धमाके में दो लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 49 लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। लेकिन पोटा कोर्ट ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर दिया था। 

अभिनेता बिचकुले को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

इसके अलावा बांबे हाईकोर्ट ने टीवी रियलिटी शो ‘बिगबॉस मराठी’ फेम व अभिनेता अभिजीत बिचकुले को राहत नहीं दी है। साल 2012 के हफ्तावसूली के मामले में आरोपी बिचकुले के जमानत आवेदन पर विचार करने से इंकार करते हुए सतारा के मैजिस्ट्रेट कोर्ट में प्रलंबित मुकदमे का शीघ्रता से निपटारा करने का निर्देश दिया है। गुरुवार को न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल ने बिचकुले के जमानत आवेदन पर सुनवाई के बाद उपरोक्त निर्देश दिया। इस दौरान बिचकुले के वकील आदित्य ने न्यायमूर्ति के सामने दावा किया कि उनके मुवक्किल पर लगे आरोप आधारहीन है। मामले से जुड़े ज्यादातर गवाह मुकर चुके है। मामला अंतिम पड़ाव पर है। इस पर न्यायमूर्ति ने कहा कि ऐसी स्थिति में जमानत आवेदन पर विचार करने का औचित्य नहीं है। हम निचली अदालत को प्रलंबित मामले का शीघ्रता से निपटारा करने का निर्देश देते है। बिचकुले फिलहाल कोल्हापुर जेल में है। बिचकुले पिछले दिनों चेक बाउंस के मामले में भी चर्चा में आए थे पर बाद में उन्हें इस मामले में जमानत मिल गई थी। 
 

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