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राज्य में सूखे की स्थिति का हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया संज्ञान

राज्य में सूखे की स्थिति का हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया संज्ञान

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न इलाकों में सूखे की स्थिति का  गंभीरता से संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि वरिष्ठ अधिवक्ता मामले की पैरवी के लिए उपलब्ध नहीं है तो किसी उपलब्ध वकील को पैरवी की जिम्मेदारी दी जाए। हाईकोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता संजय लाखे पाटील की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है। याचिका में पाटील ने दावा किया गया है कि वर्तमान में राज्य के विदर्भ व मराठवाडा के बांधों का पानी न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। फिर भी सरकार इस मामले को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। याचिका में कहा गया है कि सरकार ने सूखे की निगरानी के लिए अब तक केंद्र स्थापित नहीं किया है। जो कि कानून के हिसाब से जरुरी है। याचिका में मांग की गई है कि सूखा घोषित करने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के कितने निर्देशों का पालन किया है। इसकी भी जानकारी सरकार से मंगाई जाए। याचिका के अनुसार सरकार सूखा प्रबंधन से जुड़ी मैन्युअल का पालन नहीं कर रही है। टैंकर से जो पानी की आपूर्ति की जा रही है। उसकी जांच भी नहीं की जा रही है। जिसका बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। 

सोमवार को अवकाश न्यायमूर्ति अजय गड़करी व न्यायमूर्ति एन जे जमादार की खंडपीठ के सामने पाटील की याचिका सुनवाई के लिए आयी। इस दौरान उन्होंने बांधो में पानी की स्थिति को लेकर खंडपीठ को जानकारी दी। इस दौरान कोर्ट में मौजूद सरकारी वकील ने कहा कि इस प्रकरण की पैरवी के लिए सरकार ने  वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल साखरे को विशेष सरकारी वकील के रुप में नियुक्त किया है। जो फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि राज्य में सूखे की स्थिति बढती जा रही है। यह बेहद गंभीर मामला है। यदि विशेष सरकारी वकील नहीं है तो उपलब्ध वकील को मामले की पैरवी का जिम्मा दिया जाए। यदि अगली सुनवाई के दौरान कोई वकील नहीं आया तो हम अपना आदेश दे देगे। खंडपीठ ने फिलहाल मामला की सुनवाई 20 मई तक के लिए स्थगित कर दी है। 

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