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नाबालिग की तस्करी और रेप के दोषी की सजा बरकरार, बलात्कार के दूसरे मामले में आरोपी बरी

नाबालिग की तस्करी और रेप के दोषी की सजा बरकरार, बलात्कार के दूसरे मामले में आरोपी बरी

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने व उसे जबरन वेश्वावृत्ति के व्यवसाय में ढकलनेवाले आरोपी को सुनाई दस साल के कारावास की सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति साधना जाधव ने आरोपी की अपील को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति ने कहा कि आरोपी ने पीड़िता के पूरे जीवन को नष्ट कर दिया है। इसलिए उसे सुनाई गई सजा को यथावत रखा जाता है। निचली अदालत ने इस मामले में पश्चिम बंगाल निवासी आरोपी अरबअली मुल्ला को मार्च 2015 में नाबालिग के साथ दुष्कर्म के साथ दुष्कर्म करने व उसे घर से भगाकर वेश्यावृत्ति में ढकेलने के लिए दोषी ठहराते हुए उसे दस साल के कारावास की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील की थी। निचली अदालत ने मुल्ला को दुष्कर्म के साथ ही मानव तस्करी प्रतिबंधक  कानून की धराओं के तहत भी दोषी ठहराया था। अभियोजन पक्ष के मुताबितक आरोपी 15 साल की लड़की को घर से भगाकर लाया था। इसके बाद उसने उसके साथ शादी की। फिर वह पीड़िता मुंबई लेकर आया। और कुछ समय बाद उसने पीड़िता को एक दंपति के घर में छोड़ दिया। जहां पीड़िता को जबरन वेश्यावृत्ति के व्यवसाय में ढकेला गया। कुछ समय बाद पीड़िता ने अपने घरवालों को फोन कर  घटना की सारी जानकारी दी। इसके बाड पीड़िता के भाई व मां ने पुलिस में शिकायत की। मामले की जांच के बाद पुलिस ने लड़की को छुड़ाया और आरोपी को गिरफ्तार किया। मामले से जुडे तथ्यों पर गौर करने के बाद न्यायमूर्ति ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे जाकर आरोपी पर लगे आरोपोंको साबित किया है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मामला है जिसमें एक नाबालिग बच्ची को जबरन वेश्वाववृत्ति के व्यवसाय में ढकेला गया है। इस मामले में हम आरोपी के प्रति बिल्कुल भी नरमी नहीं दिखा सकते है। क्योंकि आरोपी ने पीड़िता का पूरा जीवन नष्ट कर दिया है। यह कहते हुए न्यायमूर्ति ने आरोपी की अपील को खारिज कर दिया। 

दुष्कर्म के मामले में हमेशा पीड़िता का बयान पर्याप्त सबूत नहीं, आरोपी बरी

वहीं दुष्कर्म के एक और मामले में कोर्ट से आरोपी बरी हुआ। हमेशा पीड़िता के बयान को ही पर्याप्त सुबूत नहीं माना जा सकता। बांबे हाईकोर्ट ने यह बात कहते हुए दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए गए 19 साल के एक युवक को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते ढेरे ने कहा कि बलात्कार के मामलों में पीड़िता का बयान निश्चित तौर पर ठोस और भरोसेमंद होना चाहिए। अगर पीड़िता का बयान पर पूरी तरह से विश्वसनीय न हो तो आरोपी  संदेह का लाभ पाने का  अधिकार रखता है। मामला ठाणे जिले के आरोपी सुनील शेल्के  का है।  शेल्के पर दुष्कर्म का आरोप था। दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली लड़की भी उसके गांव की थी और दोनों की शादी होने वाली थी,जो किसी कारण से टूट गई थी। पीड़िता ने शेल्के पर आरोप लगाया था कि मार्च 2009 में होली के दिन जब गांव के सभी लोग त्योहार मना रहे थे तभी आरोपी अपने दो साथियों के साथ उसे घर से उठाकर सुनसान जगह पर ले गया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। निचली अदालत ने 2014 में शेल्के को दोषी करार देते हुए उसे सात सला कैद के कारावास की सजा सुनाई थी। सुनील ने इस फैसले को हाई कोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा है कि घटनावाले दिन पीड़िता के साथ क्या हुआ था। मेडिकल रिपोर्ट में भी उसके शरीर में चोट लगने की बात नहीं कही गई है। ऐसे में  सिर्फ पीड़िता के बयान को ही भरोसेमंद नहीं माना जा सकता क्योंकि आरोपी व पीड़िता की शादी होने वाली थी जो टूट गई थी।  मामले से जुड़े  सुबूतो से पता चलता है कि घटना से पहले रात में पीड़िता और आरोपी दोनों साथ थे। गांव वालों को भी पता था कि दोनों की शादी होने वाली है। न्यायमूर्ति ने कहा कि इस सब को देखते हुए पीड़िता और उसके घरवालों द्वारा शादी टूटने पर आरोपी को दुष्कर्म मामले में फंसाए जाने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।  यह कहते हुए न्यायमूर्ति ने  आरोपी को दोषमुक्त करार देते हुए उसकी सजा को रद्द कर दिया।


 

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