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हिन्दी बनी सेतु, सहियोगी भाषाओं को नहीं कोई खतरा : प्रकाश दुबे

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 14th, 2018 20:44 IST

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हिन्दी बनी सेतु, सहियोगी भाषाओं को नहीं कोई खतरा : प्रकाश दुबे

डिजिटल डेस्क, नागपुर। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज यूनिवर्सिटी के मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट में हिन्दी दिवस पर न्यूज बुलेटिन जारी किया गया। इस मौके पर दैनिक भास्कर ग्रुप के समूह संपादक प्रकाश दुबे, यूनिवर्सिटी के कुलगुरु सिद्धार्थ विनायक काने, विभाग प्रमुख धर्मेश धवनकर और प्रोफेसर मोइज हक मौजूद थे। “हिन्दी की दशा, दिशा और मंथन” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए प्रकाश दुबे ने कहा कि सहियोगी भाषाओं को हिन्दी से किसी प्रकार का खतरा नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि जिस संविधान समिति ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का प्रस्ताव रखा था, उस समिति में ज्यादातर सदस्य गैर हिन्दी भाषी थे। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव का जिक्र करते हुए बताया कि राव एक दर्जन से ज्यादा भाषाओं के जानकार थे। पूर्व गृहमंत्री जार्ज फर्नांडिस जब भी शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे से मराठी में ही बात करते थे। दुबे ने कहा कि नागपुर मध्य भारत में एक आदर्श स्थान है, जहां अधिकांश मराठी हिंदी गलत बोलते हैं, इसी तरह हिंदी बोलने वाले अधिकांश गलत मराठी बोलते हैं। लेकिन यहां दोनो भाषियों में सामंजस्य अच्छा है।

कम से कम तीन भाषाओं का ज्ञान जरूरी
डॉक्टर राममनोहर लोहिया चलती फिरती एनसाइक्लोपीडिया से कम नहीं थे, लोहिया ने जर्मनी से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की थी। उन्हें अंग्रेजी काफी अच्छी आती थी, लेकिन जर्मन भाषा न आने के कारण दाखिला नहीं मिल रहा था, ऐसे में उन्होंने तीन महीने का वक्त मांगा, पहले जर्मन भाषा सीखी, इसके बाद पीएचडी पूरी कर ली। कम ही लोग जानते होंगे कि वे अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, मराठी और बांग्ला धड़ल्ले से बोल सकते थे, लेकिन ज्यादातर वो हिंदी में ही बोलते थे। ताकि आम लोगों तक उनकी बात ज्यादा से ज्यादा पहुंचे। प्रकाश दुबे पत्रकारिता कर रहे छात्रों से कहा कि वे कम से कम तीन भाषा जरूर सीखें, जिससे उन्हें काफी लाभ मिलेगा। 

गुरु ग्रंथ साहिब में भाषाओं का अद्भुत संकलन
प्रकाश दुबे ने कहा की सिखों के 11वें गुरु, गुरु ग्रंथ साहिब में भाषाओं का बहुत ही सुंदर और अद्भुत संकलन हैं। गुरमुखी के अलावा, मराठी, ब्रज भाषा, फारसी, संस्कृत, पाली भाषा और अरबी भाषा में गुरबाणी लिखी है। उन्होंने बताया कि वस्तविक में भाषा का कोई झकड़ा नहीं है। हिन्दी भाषा में कई भाषाओं के शब्द जुड़ते चले गए और हिन्दी व्यापक हो गई।

हिन्दी ने सभी को आपस में जोड़ा  
यूनिवर्सिटी के कुलगुरु सिद्धार्थ विनायक काने ने कहा कि हिन्दी भाषा ने सभी भाषाओं को आपस में जोड़ रखा है। हिन्दी के सहारे हम देश के बड़े हिस्सों में जाकर लोगों से बात कर सकते हैं। हिन्दी समझने में आसान है। काने ने उदाहरण देते कहा कि जैसे फ्रूट सैलेड में फल का अपना जायका है, यदी उसमें थोड़ा नमक और चाट मसाला मिला दिया जाए, तो स्वाद और उम्दा होगा। इसी तरह हिन्दी में कई भाषाओं के शब्द अपना ही स्वाद लिए हैं। जो इसे दूसरी भाषाओं समान बनाते हैं। 

मुद्रा के समान है हिन्दी
मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के प्रमुख धर्मेश धवनकर ने कहा कि हिन्दी मुद्रा के समान है। जिस तरह देश के हर कोने में एक ही मुद्रा चलती है, उसी तरह हिन्दी का चलन है। धवनकरन ने कहा कि हमारे देश में कई भाषाएं हैं, उनका अपना आधार है। कई विविधताएं हैं, जो रहनी भी चाहिए, जिनमें हिन्दी सेतु का काम करती है। 

छात्रों की प्रस्तुति
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद छात्र मंथन पठले ने कविता पेश की। सैनिकों पर लिखी कविता सुनाकर प्रियंका देवासने ने खासा समां बाधा। वहीं सोनाली ने अपनी रचना “हिन्दी है हम” सुनाई। कार्यक्रम के अंत में छात्रा दिशा गोजे में आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन नुसरत खान ने किया। इस मौके पर पत्रकार तजिन्दर सिंह, पत्रकार योगेश पांडे, शिक्षक राजीव गायकवाड़ एवं एमए और वीडियो प्रोग्रामिग के छात्र-छात्राएं मौजूद थे।   

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