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नागपुर के मेडिकल व सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में बनेंगे स्वतंत्र आक्सीजन प्लांट

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 07th, 2018 15:47 IST

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डिजिटल डेस्क, नागपुर। शहर के दोनों सरकारी अस्पताल शासकीय मेडिकल अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ऑक्सीजन बाहर से लाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। दोनों अस्पतालों में स्वतंत्र ऑक्सीजन प्लांट बनने जा रहे हैं। सीधे प्लांट से वार्ड और ऑपरेशन थिएटर में ऑक्सीजन की सप्लाई होगी। मेडिकल में 20 केएल और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 10 केएल क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट बनाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अंतर्गत दोनों प्लांट के लिए 99 लाख 47 हजार 447 रुपए निधि आवंटित हुई है।

मेडिकल अस्पताल में प्रतिदिन हजारों मरीज आते हैं। इसमें से सैकड़ों मरीज रोज भर्ती होते हैं। इनमें से अनेक मरीजों को ऑक्सीजन लगाने की आवश्यकता पड़ती है। फिलहाल बुटीबोरी से ऑक्सीजन सिलेंडर लाए जाते हैं। ट्रांसपोर्टिंग तथा अन्य कारण से समय पर सिलेंडर नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों की जान पर बन आती है। अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगने पर यह समस्या खत्म हो जाएगी। 

प्रतिदिन 550 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत
मेडिकल में प्रतिदिन ऑक्सीजन के 200 से 250 जंबो सिलेंडर की आवश्यकता पड़ती है। रोज औसतन 550 मरीजों को ऑक्सीजन लगाई जाई है। इसमें 70 से 80 मरीजों को अॉपरेशन में ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है। 20 से 30 मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा जाता है। लगभग 450 मरीजों को वार्ड में ऑक्सीजन दी जाती है। एक जंबों सिलेडर में 7 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन रहती है। इस हिसाब से प्रतिदिन 1500 से 1700 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन खर्च होती है। प्लांट की क्षमता 20 केएल होने से ऑक्सीजन की कमी नहीं पड़ने का मेडिकल प्रशासन का दावा है।

चार प्रकार के गैस का उत्पादन
ऑपरेशन थिएटर में चार प्रकार की गैस की जरूरत पड़ती है। इन चारों गैस का ऑक्सीजन प्लांट में उत्पादन होगा। इसमें ऑक्सीजन, नायट्रस ऑक्साइड, वैकूम सक्सेसन और काम्प्रेस्ड एयर सिस्टम शामिल हैं। ऑपरेशन थिएटर में गैस पहुंचाने के लिए 4 प्रकार के पाइप लगाए गए हैं। उसी तरह भर्ती वार्ड में 3 प्रकार की गैस की जरूरत पाइप के माध्यम से पूरी की जाएगी। फिलहाल सिलेंडर को सप्लाई यूनिट से जोड़कर पाइप के माध्यम से गैस सप्लाई की जा रही है। प्लांट शुरू होने के बाद सप्लाई यूनिट को जोड़ा जाएगा।

लिक्विड ऑक्सीजन खरीदी जाएगी
ऑक्सीजन के लए लिक्विड ऑक्सीजन का उपयोग किया जाता है। इसे प्लांट में डालकर वेपराइज सिस्टम से ऑक्सीजन तैयार होती है। लिक्विड ऑक्सीजन की खरीदी के लिए टेंडर निकालकर खरीदी की जाएगी। भारत में भिलाई, बुटीबोरी और कर्नाटक में लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन होता है।

खर्च की होगी बचत
मेडिकल में फिलहाल बुटीबोरी एमआईडीसी से ऑक्सीजन सिलेंडर लाए जाते हैं। प्लांट बनने के लिए केवल लिक्विड ऑक्सीजन का टैंकर लाना पड़ेगा। इसका उपयोग ऑक्सीजन गैस बनाने के लिए प्लांट में होगा। सिलेंडर भरकर लाने और खाली सिलेंडर वापस पहुंचाने की झंझट नहीं रहेगी। सिलेंडर लाने-ले-जाने पर होने वाले ट्रांसपोर्टिंग खर्च की बचत होगी।

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