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वन विभाग की जमीन से 2 करोड़ का उत्खनन, सिर्फ जांच पर जांच

वन विभाग की जमीन से 2 करोड़ का उत्खनन, सिर्फ जांच पर जांच

डिजिटल डेस्क, हिंगना(नागपुर)। तहसील के हिंगना वन परिक्षेत्र अंतर्गत कान्होलीबारा बिट में 2 करोड़ रुपए के मुरुम, पत्थर वन विभाग की जमीन से चोरी किए जाने का मामला जून 2018 में सामने आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन परिक्षेत्र अधिकारी ने आरोपी के खिलाफ मामला दिर्ज कर जांच शुरू की, लेकिन 10 महीने जांच चलने के बाद अप्रैल के अंतिम सप्ताह में आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई। अब वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने देरी से चार्जशीट दाखिल होने के मामले की जांच के आदेश वन परिक्षेत्र अधिकारियों को दिए हैं।

दो जगह किए गड्ढे
वन विभाग की जमीन पर आरोपी हरीश फुलसुंगे ने दो जगह बड़े गड्ढे कर करीब 2 करोड़ रुपए का मुरूम, पत्थर उत्खनन किया। वन विभाग की जमीन वन कक्ष क्र. 185 के खसरा नं. 48 में एक जगह 0.06 हेक्टेयर आर और दूसरी जगह 0.18 हेक्टेयर आर ऐसे कुल 0.24 हेक्टेयर आर जमीन पर खुदाई की गई। इस खुदाई से वहां पर गहरा गड्ढा बन गया है, जो वन्यप्राणियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

अब भी जारी है खुदाई
हिंगना तहसील के शिंगारदीप मौजा खदान क्षेत्र घोषित है। यहां के खसरा नंबर 94, 95 और 96 में हरीश फुलसुंगे द्वारा उत्खनन किया जा रहा है। वन विभाग की जमीन पर खुदाई का मामला उजागर होते ही वन विभाग ने खनिकर्म विभाग को इसकी जानकारी दी। जिसके बाद ख.न. 93 में चल रही खुदाई बंद की गई, लेकिन इसके बगल की ही जमीन पर दिन-रात खुदाई की जा रही है।

न गिरफ्तारी, न जब्ती
हैरत यह है कि वन विभाग की जमीन से 2 करोड़ रुपए के मुरुम पत्थर का उत्खनन किए जाने वाले आरोपी हरीश फुलसुंगे को गिरफ्तार नहीं किया गया। उत्खनन कर ले जाने वाले उपकरण पोकल्याड, जेसीबी, ट्रक को भी जब्त नहीं किया गया। इसके चलते मामले की जांच अधिकारी पर कई सवाल उठ रहे है। जंगल से लगकर ही वह आरोपी अपने जमीन पर अब भी खुदाई कर रहा है।

ऐसा है मामला 
हिंगना तहसील के खड़की ग्राम पंचायत अंतर्गत मौजा शिंगारदीप में खसरा नंबर 93 पर मुरुम पत्थर की खुदाई हरीश दशरथ फुलसुंगे ने वर्ष 2010 में शुरू की। उसकी यह जमीन वन विभाग की जमीन से लगी है। फुलसुंगे ने अपने निजी जमीन पर खुदाई की शुरुआत करने के बजाय वन विभाग की जमीन पर खुदाई शुरू की और करीब 1 करोड़ 99 लाख रुपए के मुरुम, पत्थर उत्खनन किया गया। वन विभाग द्वारा यह मामला वर्ष 2018 में सामने आया। इस बीच 8 साल में वन विभाग के कई अधिकारी व कर्मचारी आए और गए, पर किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया या फिर नजरअंदाज किया गया।

महिला कर्मचारी ने किया खुलासा
हिंगना वन परिक्षेत्र अंतर्गत कान्होलीबारा क्षेत्र में कार्यरत महिला वन रक्षक दुर्गा कुर्वे ने 2 करोड़ रुपए के उत्खनन का मामला उजागर किया। वे जब  सहयोगियों के साथ जंगल में गश्त कर रही थीं, तभी उन्हें जंगल के अंदर खुदाई नजर आई। उन्होंने इसकी जानकारी वनपरिक्षेत्र अधिकारी आशीष निनावे को दी। आशीष निनावे ने वन विभाग के नगर रचना व भूमापन विभाग के कर्मचारियों को बुलाकर क्षेत्र की गिनती की। करीब 1 करोड़ 99 लाख रुपए का उत्खनन किए जाने का खुलासा हुआ। तत्काल 20 जून 2018 को मामला दर्ज किया गया।

90 दिन में करना था चार्जशीट दाखिल
 मामला दर्ज होने के 90 दिन के भीतर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल करना पड़ता है, लेकिन इस मामले मंे जांच अधिकारी ने पूरे 10 महीने से अधिक का समय लिया। हिंगना वन परिक्षेत्र अधिकारी ने सीआरपीसी 469 के तहत एक साल का सजा वाले मामले में चार्जशीट दाखिल करने के लिए एक साल का समय दिया गया है। साथ ही अगर किसी मामले में आरोपी पुलिस कस्टडी या न्यायालयीन कस्टडी में हो तो 90 दिन सीआरपीसी 167 के तहत के भीतर चार्जशीट दाखिल करना पड़ता है।

पांचगांव मामले की खामियां निकालीं
वन विभाग द्वारा पांचपगांव के उत्खनन मामले में जो चार्जशीट पेश की गई थी, उसमें न्यायालय ने कई खामियां निकाली थी। उसे ध्यान में रखते हुए यह चार्जशीट बनाई गई है। 26 अप्रैल को न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई। सीआरपीसी 468 के तहत जांच करने में 1 साल का समय मिला। इसके चलते दोषारोपण सख्त बताया गया। आरोपी क्षेत्र में ही होने के कारण उसे गिरफ्तार नहीं किया गया, जबकि उसने कबूल किया है कि मैंने ही खुदाई की है। वन विभाग क्षेत्र मंे वर्ष 2010 में खुदाई की गई थी।
-आशीष निनावे, वन परिक्षेत्र अधिकारी वन परिक्षेत्र कार्यालय, हिंगना

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