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अबू धाबी : अदालतों में अब हिन्दी का भी होगा इस्तेमाल, बनी आधिकारिक भाषा

February 11th, 2019 17:30 IST

हाईलाइट

  • अबू धाबी ने हिंदी को कोर्ट में इस्तेमाल की जाने वाली तीसरी आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल किया है।
  • अभी तक अरबी और अंग्रेजी भाषा का ही यहां की अदालतों में इस्तेमाल किया जाता था।
  • न्याय तक पहुंचने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

डिजिटल डेस्क, दुबई। एक ऐतिहासिक फैसले में अबू धाबी ने हिंदी को कोर्ट में इस्तेमाल की जाने वाली तीसरी आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल किया है। अभी तक अरबी और अंग्रेजी भाषा का ही यहां की अदालतों में इस्तेमाल किया जाता था। न्याय तक पहुंचने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। बता दें कि  पिछले साल नवंबर में, अबू धाबी ने एक नियम लागू किया था जिसमें कहा गया था कि सिविल और कमर्शियल मामलों में गैर-अरबी प्रतिवादियों को सभी दस्तावेज अंग्रेजी में प्रस्तुत किया जाए। 

अबू धाबी ज्यूडिशियल डिपार्टमेंट (ADJD) ने शनिवार को कहा कि यहां की अदालतों में श्रम मामलों के निपटारे के लिए अरबी और अंग्रेजी के अलावा हिंदी में भी बयान, दावे और अपील दायर करने की शुरुआत की गई है। इसका मकसद हिंदी भाषी लोगों को बिना किसी भाषा बाधा के मुकदमे की प्रक्रिया, उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में सीखने में मदद करना है। हिंदी भाषियों को अबुधाबी न्यायिक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात की आबादी लगभग पांच मिलियन है, जिसमें से 2 / 3rd विदेशी देशों के प्रवासी हैं। यूएई में भारतीय समुदाय 2.6 मिलियन की संख्या के साथ, कुल जनसंख्या का 30 प्रतिशत है और यह देश का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। ADJD के अंडर सेक्रेटरी यूसुफ सईद अल आबरी ने कहा कि 2021 की भविष्य की योजना को देखते हुए याचिकाओं, आरोपों और अपीलों को कई भाषाओं में स्वीकार करने की योजना तैयार की है। मुकदमेबाजी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को बढ़ाना भी इसका मकसद है।

उन्होंने कहा कि कोर्ट में कई भाषाओं को शेख मंसूर बिन जायद अल नाहयान, उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के मामलों के मंत्री और ADJD अध्यक्ष के निर्देशों के तहत अपनाया गया है। अल आबरी ने बताया कि नई भाषाओं को द्विभाषी कानूनी व्यवस्था के तहत अपनाया गया है। द्विभाषी कानूनी व्यवस्था का पहला चरण नवंबर 2018 में लॉन्च किया गया था। इसके तहत सिविल और कमर्शियल मामलों में गैर-अरबी प्रतिवादियों को सभी दस्तावेज अंग्रेजी में प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। 
 

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