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कुंडली में है मंगल दोष तो करें ये उपाय, मिलेगी कष्टों से मुक्ति

BhaskarHindi.com | Last Modified - April 16th, 2018 15:44 IST

कुंडली में है मंगल दोष तो करें ये उपाय, मिलेगी कष्टों से मुक्ति

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 

लग्ने व्यये च पाताले, जामित्रे चाष्ट कुजे।
कन्या जन्म विनाशाय, भर्तुः कन्या विनाशकृत।।


अर्थात जन्म कुंडली में लग्न स्थान से 1, 4, 7, 8, 12वें स्थान में मंगल हो तो ऐसी कुंडली मंगलिक कुंडली कहलाती है। श्लोकानुसार जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल उपर्युक्त भावों में हो तो उसे विवाह के लिए मांगलिक वर-वधू ही खोजना चाहिए। यदि पुरुष या स्त्री की कुंडली में 1, 4, 7, 8, 12वें भाव में शनि, राहु, सूर्य, मंगल हो तो कुंडली का मिलान हो जाता है। यदि एक की कुंडली में मंगल उपरोक्त भावों में स्थित हो तथा दूसरे की कुंडली में नहीं हो तो इस प्रकार के जातकों के विवाह संबंध नहीं होने चाहिए। यदि अनजाने में भी कोर्इ विवाह संपन्न हो जाते हैं तो या तो ऐसे संबंध कष्टकारी होते हैं या फिर दोनों में मृत्यु योग की भी संभावना हो सकती है। इसलिए मंगल दोष का निवारण शादी-विवाह से पहले ही कर लेना चाहिए। कुंडली के अलग-अलग भाव के अनुसार मंगल के फल प्राप्त होते हैं।
 


कुंडली मे भावानुसार मंगल के फल

प्रथम भाव : कार्य सिद्धि में विघ्न, सिर में पीड़ा, चंचल प्रवृत्ति, व्यक्तित्व पर प्रभाव, स्वभाव, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, समृद्धि, बुद्धि।

द्वितीय भाव : पैतृक संपत्ति सुख का अभाव, परिवार, वाणी, निर्दयी प्रवृति, जीवन साथियों के बीच हिंसा, अप्राकृतिक मैथुन।

चतुर्थ भाव : परिवार व भाइयों से सुख का अभाव, घरेलू वातावरण, संबंधी, गुप्त प्रेम संबंधी, विवाहित जीवन में ससुराल पक्ष और परिवार का हस्तक्षेप, आनुवांशिक प्रकृति।

सप्तम भाव : वैवाहिक जीवन प्रभावित, पतिपत्नी का व्यक्तित्व, जीवन साथी के साथ रिश्ता, काम शक्ति, जीवन के लिए खतरा, यौन रोग।

अष्टम भाव : मित्रों का शत्रुवत आचरण, आयु, जननांग, विवाहेतर जीवन, अनुकूल उद्यम करने पर भी मनोरथ कम, मति।

द्वादश भाव : विवाह, विवाहेतर काम क्रीड़ा, काम क्रीड़ा या यौन संबंधों से उत्पन्न रोग, काम क्रीड़ा कमजोरी, शयन सुविधा, शादी में नुकसान, नजदीकी लोगों से अलगाव, परस्पर वैमनस्य, गुप्त शत्रु।
 


यदि किसी जातक को मंगल ग्रह के विपरीत परिणाम प्राप्त हो रहे हों तो उनकी अशुभता को दूर करने के लिए निम्न उपाय करने चाहिए।

मंगल के देवता हनुमान जी हैं, अत: मंदिर में लड्डू या बूंदी का प्रसाद वितरण करें। हनुमान चालीसा, हनुमत-स्तवन, हनुमद्स्तोत्र का पाठ करें। विधानपूर्वक हनुमान जी की आरती एवं शृंगार करें। हनुमान मंदिर में गुड़-चने का भोग लगाएं।

यदि संतान को कष्ट या नुक्सान हो रहा हो तो नीम का पेड़ लगाएं, रात्रि सिरहाने जल से भरा पात्र रखें और सुबह पेड़ में डाल दें।

पितरों का आशीर्वाद लें। बड़े भाई एवं भाभी की सेवा करें, फायदा होगा।

लाल कनेर के फूल, रक्त चंदन आदि डाल कर स्नान करें।

मूंगा, मसूर की दाल, ताम्र, स्वर्ण, गुड़, घी, जायफल आदि दान करें।

मंगल यंत्र बनवाकर विधि-विधानपूर्वक मंत्र जप करें और इसे घर में स्थापित करें।

ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाया नम:। 

 

इस मंत्र के 40,000 जप करें या स्वयं करने में असमर्थ हैं को किसी और से करावाएं इसके बाद दशांश तर्पण, मार्जन व खदिर की समिधा से हवन करें।

अन्य मंत्र

 


''ऊँ अं अगारकाय नम:"

 


जिनकी कुंडली में मंगल दोष है ऐसे जातक मूंगा धारण करें।

मंगलवार के दिन एक समय बिना नमक वाला भोजन या फलाहार से व्रत करें।

अन्य उपाय

हमेशा लाल रुमाल रखें, बाएं हाथ में चांदी की अंगूठी धारण करें, कन्याओं की पूजा करें और स्वर्ण न पहनें, मीठी तंदूरी रोटियां कुत्ते को खिलाएं, ध्यान रखें, कि घर में दूध उबल कर बाहर न गिरे इसे अशुभ माना जाता है। 

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