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बेनामी प्रापर्टी व ट्रांजेक्शन का देना होगा ब्यौरा, इनकम टैक्स ने जारी किए 15 हजार से ज्यादा नोटिस

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 11th, 2019 12:23 IST

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बेनामी प्रापर्टी व ट्रांजेक्शन का देना होगा ब्यौरा, इनकम टैक्स ने जारी किए 15 हजार से ज्यादा नोटिस

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बेनामी प्रापर्टी और ट्रांजेक्शन में सरकार की आंखों में धूल झोंकने वालों की शामत आने वाली है। इनकम टैक्स विभाग ने बेनामी प्रापर्टी व ट्रांजेक्शन के मामले में नागपुर जिले में (शहर व ग्रामीण) 15 हजार से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। 

ये भी हैं शामिल
इनकम टैक्स असेसमेंट मानकों के अनुसार, एक साल में 30 लाख से ज्यादा अचल (जमीन, मकान) संपत्ति की खरीदारी करने, 10 लाख से ज्यादा का वाहन खरीदने, 10 लाख बैंक में जमा करने, क्रेडिट या डेबिट कार्ड से 2 लाख से ज्यादा की खरीदारी करने, 2 लाख से ज्यादा से फॉरेन ट्रैवलिंग करने व 2 लाख से ज्यादा म्युचुअल (निवेश) फंड करने पर इनकम टैक्स संबंधित व्यक्ति से स्पष्टीकरण मांगा जाता है। बैंकों को यह जानकारी इनकम टैक्स से साझा करना अनिवार्य है।

सिस्टम इस तरह बनाया गया है कि इस तरह के ट्रांजेक्शन सिस्टम में आ जाते हैं। सिस्टम जनरेटेड इन मामलों में विभाग संबंधितों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगता है। पहले सब रजिस्ट्रार आफिस लिंक नहीं था। अब यहां होने वाले ट्रांजेक्शन भी सिस्टम में आ जाते हैं। इस तरह के ट्रांजेक्शन के मामले में नोटिस जारी करने का दौर जारी है। मुख्य आयकर आयुक्तालय के तहत संपूर्ण विदर्भ आता है। अकेले नागपुर जिले में ही दिसंबर 18 तक 15 हजार से ज्यादा नोटिस जारी हुए हैं। इतने बड़े स्तर पर नोटिस जारी होने से अधिकारी व कर्मचारियों का वर्क लोड भी बढ़ गया है। 

कई एंगल से जांच
सूत्रों के अनुसार, अधिकांश मामलों में बैंकों से कर्ज लेकर ही व्यवहार हुए हैं। इन मामलों में अभी तक बड़ी हेरा-फेरी या इनकम टैक्स की चोरी विभाग के हाथ नहीं लगी, लेकिन कई मामलों की दूसरे एंगल से जांच जरूर शुरू हो गई है। सालाना ढाई लाख तक की आय करमुक्त है। ढाई से 5 लाख तक सालाना आय पर 5 फीसदी टैक्स लगता है। इनकम टैक्स का आर्थिक वर्ष अप्रैल से मार्च होता है, लेकिन दिसंबर महीने में असेसमेंट की प्रक्रिया बढ़ जाती है। 

सिस्टम से पता चल जाते हैं सभी ट्रांजेक्शन 
इस संबंध में मेरे पास जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह मेरे कार्यक्षेत्र में नहीं आता। संबंधित अधिकारी ही जानकारी दे सकते हैं। इस तरह के ट्रांजेक्शन सिस्टम से पता चलते हैं। सिस्टम जनरेटेड यह प्रक्रिया है और उस पर विभाग कार्रवाई करता है। कितने नोटिस जारी हुए और कितनों पर कार्रवाई हुई, इस बारे में भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। 
-प्रदीप घुंगरुड, जनसंपर्क अधिकारी, आयकर, नागपुर

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