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बढ़ती ही जा रही है शराब की खपत, राज्य सरकार की प्रस्तावित शराब नीति पर चर्चा तक नहीं

बढ़ती ही जा रही है शराब की खपत, राज्य सरकार की प्रस्तावित शराब नीति पर चर्चा तक नहीं

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शराब बिक्री पर पाबंदी की उठ रही मांगों के बीच राज्य में शराब की खपत बढ़ती ही जा रही है। शराब बिक्री के मामले में कई स्थानों पर नियमों का उल्लंघन होने की भी शिकायतें बढ़ी है। पूरे मामले पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार ने नई शराब नीति प्रस्तावित की है। लेकिन उस नीति पर कोई चर्चा तक नहीं हो रही है। चुनाव वर्ष को देखते हुए विधानमंडल के मानसून सत्र में भी यह मामला उठने की संभावना कम ही है। आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो शराब बिक्री में नागपुर विभाग भी पीछे नहीं है। वाइन व बीयर की बिक्री के मामले में नागपुर विभाग राज्य में दूसरे स्थान पर है। राज्य के 3 जिलों चंद्रपुर, गड़चिरोली व वर्धा में शराब बिक्री की बंदी है। ये जिले नागपुर विभाग में ही आते हैं। पाबंदी के बाद भी नागपुर विभाग में शराबबिक्री बढ़ती ही जा रही है। 

क्या है स्थिति

राज्य में गत वर्ष की तुलना में वाइन की खपत 22.12 प्रतिशत बढ़ी है। बनावटी विदेशी शराब की खपत भी 15.89 प्रतिशत बढ़ी है। देसी शराब की खपत 12.2 प्रतिशत बढ़ी है। बीयर की खपत 8.26 प्रतिशत बढ़ी है। अप्रैल 2018 से मार्च 2019 तक के ये आंकड़े हैं। अप्रैल व मई 2019 में खपत और भी बढ़ने की संभावना है। 2018 में राज्य में 60.56 लाख बल्क लीटर वाइन की बिक्री हुई थी। इस वर्ष 73.95 लाख बल्क लीटर बिक्री हुई है। राज्य में 6 विभागों में सबसे अधिक कोल्हापुर विभाग में 62.40 प्रतिशत शराब बिक्री बढ़ी है। नागपुर विभाग में 58.22 प्रतिशत, औरंगाबाद विभाग में 49.60 प्रतिशत,नाशिक विभाग में 29.16 प्रतिशत, पुणे विभाग में 27.77 प्रतिशत व ठाणे विभाग में सबसे कम 12.92 प्रतिशत की बढ़त हुई है। देसी शराब की बिक्री में राज्य में 12.2 प्रतिशत बढ़त है। 18.84 प्रतिशत के साथ पुणे विभाग शराब बिक्री में सबसे आगे है। ठाणे जिले में 6.19 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। नाशिक विभाग में 13.58 , कोल्हापुर विभाग में 10.29 प्रतिशत , औरंगाबाद विभाग में 11.56 व नागपुर विभाग में 13.84 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। देसी बनावटी विदेशी शराब बिक्री में राज्य में 15.89 प्रतिशत बढ़त है। आैरंगाबाद विभाग में सबसे अधिक 25.25 प्रतिशत व नागपुर विभाग में 13.84 प्रतिशत बिक्री बढ़ी है। बीयर बिक्री में औरंगाबाद विभाग 24.13 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है। नागपुर विभाग में 17.65 प्रतिशत की बढ़त हुई है। पुणे विभाग में 13.52 प्रतिशत की बढ़त हुई है। 

प्रस्ताव भी लंबित

राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि जल्द ही नई शराब नीति लायी जाएगी। उत्पादन शुल्क विभाग के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने उस नीति के बारे में विधानसभा में भी जिक्र किया था। लेकिन 2 वर्ष से शराब नीति का मामला लंबित है। कहा जा रहा है कि चुनाव दर चुनाव होने का परिणाम प्रस्तावित शराब नीति पर पड़ा है। शराब ऐसा कोई निर्णय नहीं लेना चाहती है जिससे चुनाव में नुकसान होगा। सरकार ने आनलाइन शराब बिक्री का प्रस्ताव भी लंबित रखा है। इसके अलावा शराब उत्पादन के संबंध में भी नियम सुधार का मामला लंबित है। सरकार की ओर से यह अवश्य माना गया है कि राज्य में अवैध शराब बिक्री में भी कमी नहीं है। अवैध शराब बिक्री रोकने के लिए ग्राम रक्षक दल बनाए गए हैं। उधर सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे व अन्य के भी सुझाव लिए जा रहे हैं। गुजरात, बिहार जैसे राज्यों की तरह महाराष्ट्र में भी संपूर्ण शराबबंदी की मांग उठती रही है। लेकिन सरकार की ओर से बार बार कहा जा रहा है कि संपूर्ण बिक्री बंद नहीं होगी। संपूर्ण बिक्री बंद होने से राज्य सरकार को 23,000 करोड़ का वार्षिक राजस्व नुकसान होगा। 

नई नीति नहीं

मंत्री राज्य उत्पादन शुल्क विभाग चंद्रशेखर बावनकुले के मुताबिक सरकार की ओर से फिलहाल नई शराब नीति पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अवैध बिक्री रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। ग्राम रक्षक दल को और अधिक सक्षम बनाया जाएगा। शराब का मामला समाज से जुड़ा है। इसके दुष्प्रभाव को रोकने के लिए सभी को सहयोग करना होगा। जिन जिलों में बिक्री पर पाबंदी है वहां पाबंदी कायम रहेगी।

जानलेवा स्थिति

कांग्रेस उपनेता विधानसभा विजय वडेट्टीवार के मुताबिक शराब बिक्री पर कोई नियंत्रण नहीं है। जिन जिलों में बंदी लागू हैं वहां तो और अधिक खपत हो रही है। शराब माफिया सक्रिय हुए हैं। अवैध शराब ढुलाई के चलते हादसे भी हुए हैं। विधानसभा में मामला उठाया गया था लेकिन सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। अवैध शराब बिक्री को बढ़ावा देकर सरकार करोड़ों के राजस्व का नुकसान कर रही है।

 

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