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आतंक नहीं शांति चाहते हैं, आतंकी आते रहेंगे तो हम मारते रहेंगे- आर्मी चीफ

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 10th, 2019 20:03 IST

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News Highlights

  • भारतीय सेना प्रमुख ने आतंकी गतिविधियों पर दिया जवाब
  • प्रेस कांफ्रेंस में बोले आतंकी आते रहेंगे तो हम मारते रहेंगे
  • हम कश्मीर में शांति चाहते है- सेना प्रमुख


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कश्मीर में अलगाववादी और आतंकियों गतिविधियों को लेकर अपना रूख साफ कर दिया है। सेना प्रमुख रावत ने सेना की सलाना प्रेस कांफ्रेंस में कहा, कश्मीर में कितने आतंकी मरे, इससे सेना या देश की सफलता तय नहीं होती। वहां जब भी कोई आतंकी मरता है तो कश्मीर के लोग उनकी तारीफ करते हैं। आतंकी आते रहेंगे और हम उन्हें मारते रहेंगे। हम कश्मीर में शांति चाहते है, लेकिन ये आतंक के साथ संभव नहीं है। आतंकी गतिविधियों को लेकर रावत ने कहा, सीमापार से 300 से ज्यादा आतंकी घुसपैठ करने के लिए तैयार बैठे हैं। अगर भारतीय सीमा आतंकी घुसपैठ हुई तो सेना उसका मुंहतोड़ जवाब देगी। 

रावत ने कहा कि कश्मीर में हिंसा एकाएक खत्म नहीं होगी। हमारी सेना अगर आतंकी मारेगी, तो नए आतंकी खड़े हो जाएंगे। कश्मीर में शांति बनाए रखने के लिए हमें इन्हीं नए आतंकियों को खड़ा होने से रोकना है। गौरतलब है कि पिछले एक साल से भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ जबरदस्त अभियान चलाया है। सेना की 15 कॉर्प्स के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट ने 10 दिन पहले बताया था कि 2018 के दौरान सेना ने कुल 311 आतंकवादियों को मार गिराया है। यह आंकड़ा पिछले 10 सालों में सर्वाधिक है। रावत ने कहा कि भारतीय सेना हर स्थिति को संभालने के लिए मुस्तैद है। उन्होंने कहा कि हमारे एक तरफ चीन है, तो दूसरी ओर पाकिस्तान। सेना ने दोनों मोर्चों पर अच्छा काम किया है। हम नरम और सख्त एक्शन साथ लेकर चलते हैं।

सेना ने प्रमुख ने दो टूक कहा है कि, अगर आतंकी भारतीय सीमाओं में दाखिल हुए तो उन्हें मार दिया जाएगा। रावत ने पाकिस्तान को सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि आतंकवाद और वार्ता दोनों एक साथ नहीं हो सकती है, इसलिए बंदूकों को छोड़ो और हिंसा बंद करो। कश्मीर में स्थानीय लोगों पर हुई हिंसा को लेकर सेना प्रमुख ने कहा, भारतीय सेना जानबूझकर किसी नागरिक को लक्षित नहीं करती है, लेकिन आतंकी अक्सर कश्मीर गांव-इलाकों में छुप रहते हैं। ऐसे में उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए आम नागरिक से पूछताछ की जाती है। 

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