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समंदर में देश का नया पहरेदार, इंडियन नेवी में शामिल हुआ 'करंज'

January 31st, 2018 10:34 IST

डिजिटल डेस्क, मुंबई। समंदर में हिन्दुस्तान ने अपनी ताकत थोड़ी और बढ़ा ली है। इससे पहले नौसेना को स्कॉर्पिन सीरीज की पहला सबमरीन कलवरी मिल चुका है। जिसके बाद समंदर में अब दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए भारतीय नौसेना में स्कॉर्पिन सीरीज की एक नया सबमरीन शामिल हुआ। जिसका नाम है 'करंज'। इस सबमरीन (पनडुब्बी) को 31 जनवरी को मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड से लॉन्च किया गया है। इस खास मौके पर नौसेना प्रमुख सुनील लांबा मौजूद थे। बता दें कि इस सबमरीन को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में बनाया गया है। यह एक स्वदेशी सबमरीन है जो 'मेक इन इंडिया' का परचम लहराएगा। 

 

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क्या है 'करंज' की खासियत

इस सबमरीन को दुश्मनों को चकमा देने के लिए बनाया गया है। 
'करंज' अपने आधुनिक फीचर्स और सटीक निशाना लगाने की खूबी के लिए जाना जाएगा। 
'करंज' सबमरीन युद्ध की किसी भी स्थिति में पास होने की पूरी संभावना रखता है। 
'करंज' पानी में लड़ने से लेकर इंटेलिजेंस इकट्ठा करने तक का काम भी करेगा।  
'करंज' का प्रोजेक्ट- 23 हजार करोड़ रुपए है।
'करंज' रडार की पकड़ में न आएगा
जमीन पर हमला करने में 'करंज' बिल्कुल सक्षम है।
सबमरीन में ऑक्सीजन बनाने की क्षमता भी है।
'करंज' सबमरीन लंबे समय तक पानी में रहने के काबिल है।


 

कितना बड़ा है 'करंज' सबमरीन

लंबाई- 67.5 मीटर 
ऊंचाई- 12.3 मीटर 
वजन- 1565 टन 
तकनीक- फ्रांस


 

प्रॉजेक्ट-75 इंडिया के तहत लॉन्च हो रहा सबमरीन

बता दें कि इस सीरीज का दूसरी सबमरीन खंडेरी है। चीन और पाकिस्तान की बढ़ती गुस्ताखियों के चलते भारतीय रक्षा मंत्रालय से भारतीय नेवी को 6 अत्याधुनिक पनडुब्बियों की मंजूरी दी गई थी। दो सबमरीन पहले ही लॉन्च किए जा चुके हैं। इन सभी सबमरीनों को 2020 तक भारतीय नेवी में शामिल करने की योजना है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि करीब 70 हजार करोड़ रुपये के डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी कार्यक्रम को प्रॉजेक्ट-75 इंडिया नाम दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, इसके लिए आगामी 6 फरवरी को अक्सेप्टेंस ऑफ निसेसिटी (एओएन) की समय सीमा खत्म हो रही है, लेकिन भारतीय शिपयार्ड और विदेशी सहयोगी को चुनने की दिशा में 'कोई ठोस प्रगति' नहीं हुई है। इस परियोजना के लिए एओएन को पहली बार नवंबर 2007 में जारी किया गया था जिसे अब फिर बढ़ाया जाएगा।


 

नौसेना को मिली स्कॉर्पिन सीरीज की पहली कलवरी पनडुब्बी

13 पुरानी सबमरीन से काम चला रहा नेवी 

इंडियन नेवी के पास मात्र 13 पुरानी सबमरीन हैं और इनमें से आधे ही एक समय में सक्रिय रहते हैं। बता दें कि चीन के पास पहले ही 56 सबमरीन हैं। देश में लॉन्च हो रहे इन सबमरीन को पहले वर्ष 2017 तक नेवी में शामिल होना था। प्रॉजेक्ट-75 इंडिया में देरी को देखते हुए नेवी अपनी सिंधुघोष क्लास और शिशुमार क्लास की सबमरीन को अपग्रेड करने जा रही है। इस पर करीब पांच हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। बता दें, भारत को कम से कम 18 डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों और छह हमलावर परमाणु सबमरीन की जरूरत है। 

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