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सेल्फी लेकर कॉपीराइट विवाद में घिरा बंदर बना '2017 पर्सन ऑफ द ईयर'

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 07th, 2017 15:13 IST

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डिजिटल डेस्क, जकार्ता। 2011 में सुर्खियों में आई सेल्फी लेते हुए बंदर की वायरल तस्वीर आपने भी देखी होगी। इसे देखकर आश्चर्य के साथ आपके चेहरे पर हंसी भी आई होगी। आपको बता दें इस तस्वीर से भी ज्यादा चर्चा में है इस सेल्फी से जुड़ा कॉपीराइट विवाद। बहरहाल 2011 में शुरू हुआ कॉपीराइट विवाद 2016 में समझौते के बाद शांत तो हो गया लेकिन अब ये तस्वीर फिर चर्चा में है क्योंकि अब सेल्फी लेकर ऐतिहासिक घटना को जन्म देने वाले इंडोनेशिया के बंदर 'नारूतो' को पेटा ने ‘‘पर्सन ऑफ द ईयर’’ घोषित किया गया है। 



क्या था सेल्फी से जुड़ा विवाद ?

दरअसल वर्ष 2011 में सुलावेसी द्वीप पर नारूतो नाम के इस बंदर ने एक कैमरे को घूरते हुए कैमरे का बटन दबा दिया था जिससे उसकी सेल्फी उस कैमरे में कैद हो गई। ये कैमरा था ब्रिटिश वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर 'डेविड स्लेटर' का, जिन्हें इस तस्वीर के बूते कई सारे वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के अवॉर्ड्स भी मिले। ये फोटो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ था। इस फोटो को पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स 'पेटा' ने कॉपीराइट का उल्लंघन माना था, उनका कहना था कि बंदर नारूतो को ही 'अपनी तस्वीर का रचनाकार एवं मालिक' घोषित करना चाहिए और इससे जो भी पैसे अब तक कमाए गए हैं सभी पर नारूतो का अधिकार होना चाहिए। 

पेटा ने नारुतो नामक इस बंदर को सम्मानित करते हुए यह भी कहा कि काले रंग का ये बंदर 'एक जीव है ना कि कोई वस्तु'। इस बंदर की सेल्फी ने अमेरिका के कॉपीराइट मामले में ऐतिहासिक घटना को जन्म दिया है। हालांकि, पिछले साल जनवरी में सैन फ्रांसिस्को के फेडरल कोर्ट ने बंदर को सेल्फी का मालिकाना हक देने से इनकार कर दिया था, लेकिन कोर्ट का फैसला आने से पहले ही समझौता कर लिया गया था।

कॉपीराइट विवाद का हल

पेटा के संस्थापक इनग्रिड नेवकिर्क ने बुधवार को कहा कि नारुतो की ऐतिहासिक सेल्फी ने उस विचार को चुनौती दी कि 'व्यक्ति कौन है और कौन नहीं है'। ऐसा पहली बार है जब इस पशु को किसी और की संपत्ति घोषित करने के बजाय उसे संपत्ति का मालिक घोषित करने की मांग करते हुए कोई मुकदमा दायर किया गया है। फिलहाल इस मुकदमे से अंतरराष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञों के बीच पशुओं के लिए उनके व्यक्तित्व की पहचान और वे अपनी संपत्ति के मालिक हो सकते हैं या नहीं, इसे लेकर एक बहस छिड़ गई। सितंबर में अदालत के फैसले के साथ मामले में इस बात पर सहमति बनी कि डेविड भविष्य में बंदर की सेल्फी के इस्तेमाल या उसकी बिक्री से होने वाली कमाई का 25 प्रतिशत हिस्सा इंडोनेशिया में इन बंदरों की रक्षा में मदद के लिए देंगे। 
 

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